किसी भी बहुमंजिला या सामान्य मकान की मजबूती उसकी नींव की बनावट पर निर्भर करती है। नींव खुदाई के समय की गई छोटी सी अनदेखी आगे चलकर पूरी इमारत के लिए गंभीर संरचनात्मक जोखिम खड़ा कर सकती है। इस महत्वपूर्ण चरण पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार चौधरी ने मकान मालिकों को वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है।
नींव निर्माण से पहले मिट्टी की जांच अनिवार्य
डॉ. अवधेश कुमार चौधरी, जिनकी विशेषज्ञता शैलो फाउंडेशन, ग्राउंड इम्प्रूवमेंट और फाउंडेशन सिस्टम में है, का स्पष्ट कहना है कि नींव की गहराई या आकार का फैसला कभी भी केवल अंदाज या अनुमान से नहीं किया जाना चाहिए। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले जमीन के नीचे मौजूद मिट्टी के प्रकार और उसकी भार सहन करने की क्षमता (बेयरिंग कैपेसिटी) की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। इसी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर सिविल इंजीनियर फाउंडेशन का सटीक डिजाइन तैयार करते हैं और खुदाई की गहराई तय होती है।
खुदाई के दौरान सतह की स्थिति की जांच
खुदाई प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि नींव को किसी भी हाल में कमजोर या ढीली सतह पर न टिकाया जाए। गड्ढा खोदने के बाद नीचे की जमीन का बारीक निरीक्षण करें ताकि वहां पेड़-पौधों की जड़ें, कचरा, ढीली मिट्टी या बाद में भरी गई मिट्टी (फिल्ड सॉइल) अवशेष के रूप में न रह जाए। नींव को हमेशा एक सख्त, ठोस और स्थिर प्राकृतिक मिट्टी की परत पर ही स्थापित करना चाहिए, जो पूरी इमारत के वजन को सुरक्षित रूप से नीचे जमीन में स्थानांतरित कर सके।
इंजीनियर की स्ट्रक्चरल ड्राइंग का कड़ाई से पालन
मकान की नींव के गड्ढे की चौड़ाई और गहराई सिविल इंजीनियर द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक स्ट्रक्चरल ड्राइंग के अनुसार ही होनी चाहिए। अपनी मर्जी से या मिस्त्री के व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर खुदाई के आकार में बदलाव करना बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है।
जल भराव और पड़ोसी संपत्तियों की सुरक्षा
नींव की खुदाई के समय पानी के प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि बारिश का पानी या भूजल खुदाई वाले स्थान में जमा हो जाता है, तो मिट्टी की प्राकृतिक मजबूती कमजोर पड़ जाती है। ऐसे मामलों में जमा पानी को पंप से बाहर निकालने के बाद नींव के तल की दोबारा जांच करना अनिवार्य है। इसके अलावा, पास के किसी पड़ोसी मकान से सटी जमीन पर खुदाई करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि गहरी खुदाई से पड़ोसी के घर की नींव या आसपास की जमीन धंस सकती है। भारतीय निर्माण मानकों (इंडियन कंस्ट्रक्शन गाइड्स) में भी नींव के चारों तरफ जल निकासी व्यवस्था बनाए रखने और आसपास की खुदाई से फाउंडेशन बेड को सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। खुदाई का काम पूरा होने के बाद नींव के निचले हिस्से को पूरी तरह समतल और साफ सुथरा रखना चाहिए।



















