लगातार हो रही बारिश ने टमाटर की सप्लाई पर असर डाला है, जिसकी वजह से बाजार में टमाटर के दाम आसमान छू रहे हैं और हर घर के बजट पर सीधा बोझ बढ़ गया है। ऐसे में अगर आपके घर में बड़ा बगीचा नहीं है, तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। सिर्फ एक छोटी बालकनी, थोड़ी सी धूप और सही तरीके से देखभाल करके आप घर पर ही ताजे और बिना केमिकल वाले टमाटर उगा सकते हैं। जानते हैं इसका पूरा तरीका, कदम दर कदम।
सही गमले का चुनाव कैसे करें
टमाटर के पौधे को जड़ों के फैलाव के लिए पर्याप्त जगह चाहिए होती है, इसलिए गमला चुनते समय उसका साइज सबसे जरूरी बात है। कम से कम 12 से 15 इंच चौड़ा और उतना ही गहरा गमला, ग्रो बैग या घर में पड़ी पुरानी बाल्टी भी इस्तेमाल की जा सकती है। ध्यान रखें कि गमले के तल में पानी निकासी के लिए 2 से 3 छेद जरूर हों। अगर पानी गमले में जमा रहता है तो जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधा कमजोर होकर मुरझा सकता है, इसलिए ड्रेनेज का इंतजाम शुरुआत में ही पक्का कर लेना चाहिए।
मिट्टी को कैसे तैयार करें
टमाटर के पौधे की सेहत और पैदावार दोनों काफी हद तक मिट्टी की गुणवत्ता पर टिकी होती है। इसके लिए 40 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 40 प्रतिशत वर्मीकंपोस्ट या पुरानी गोबर की खाद और 20 प्रतिशत कोकोपीट को आपस में अच्छी तरह मिलाएं। कोकोपीट मिट्टी में नमी को बनाए रखने का काम करती है और मिट्टी को हल्का रखती है, जिससे जड़ों को फैलने और तेजी से बढ़ने में आसानी होती है। यह मिश्रण गमले या ग्रो बैग में भरकर पौधा लगाने के लिए तैयार किया जाता है।
पौधा लगाने का सही तरीका
टमाटर उगाने के लिए आप दो तरीके अपना सकते हैं, या तो नर्सरी से तैयार पौधे खरीद लाएं या फिर घर पर ही बीज से पौध तैयार करें। पौधा लगाते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि उसका मुख्य तना मिट्टी के थोड़ा अंदर दबा हो, इससे पौधे को मजबूत सहारा मिलता है और वह हवा या बारिश में आसानी से गिरता नहीं। अगर एक ही गमले या ग्रो बैग में एक से ज्यादा पौधे लगा रहे हैं तो दोनों के बीच सही दूरी बनाए रखना भी जरूरी है, वरना पौधों को बढ़ने के लिए पूरी जगह और धूप नहीं मिल पाती।
धूप और पानी की सही मात्रा
टमाटर के पौधों को स्वस्थ रहने और अच्छे फल देने के लिए रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे सीधी धूप चाहिए होती है। इसलिए गमलों को बालकनी के उसी कोने में रखें जहां दिनभर में सबसे ज्यादा धूप आती हो। पानी देने का एक आसान नियम याद रखें, जब भी मिट्टी की ऊपरी परत सूखी हुई महसूस हो, तभी पानी दें। जरूरत से ज्यादा पानी देने यानी ओवर-वाटरिंग से पौधे की जड़ें खराब हो सकती हैं, जिसका सीधा असर पौधे की ग्रोथ और उसमें आने वाले फलों पर पड़ता है।
खाद देने और कीड़ों से बचाव के उपाय
पौधे को सही पोषण देने के लिए हर 15 से 20 दिन में उसकी निराई-गुड़ाई करें और मिट्टी में वर्मीकंपोस्ट या नीम की खली मिलाते रहें। जब पौधे में फूल आना शुरू हों, उस समय लिक्विड फर्टिलाइजर डालना बेहद फायदेमंद साबित होता है क्योंकि इससे फूल जल्दी झड़ते नहीं और फल बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है। कीड़ों और बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए हर हफ्ते नीम के तेल का छिड़काव करना एक असरदार और पूरी तरह से केमिकल-फ्री तरीका है। इस पूरी प्रक्रिया को अपनाकर बिना बड़े गार्डन या ज्यादा खर्च के, सिर्फ एक छोटी बालकनी में ही ढेर सारे लाल टमाटर उगाए जा सकते हैं।


















