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अजा एकादशी व्रत को लेकर कन्फ्यूजन दूर, 7 सितंबर को बनेंगे कई शुभ योगत्योहार
5 सित॰ 2026, 1:57 pm (14 मिनट पहले)· 2

अजा एकादशी व्रत को लेकर कन्फ्यूजन दूर, 7 सितंबर को बनेंगे कई शुभ योग

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि दो दिनों में बंटने से अजा एकादशी की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है, लेकिन उदयातिथि के हिसाब से व्रत 7 सितंबर को ही रखा जाएगा और इस दिन कई दुर्लभ शुभ योग भी बन रहे हैं।

हिंदू पंचांग में भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी कहा जाता है, और साल 2026 में सितंबर की तारीखों को लेकर व्रती लोगों के मन में असमंजस बना हुआ है। दरअसल एकादशी तिथि दो दिनों में बंट रही है, जिसके चलते कुछ लोग इसे 6 सितंबर तो कुछ 7 सितंबर से जोड़कर देख रहे हैं। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना करने के साथ निर्जल या फलाहार व्रत रखने की परंपरा है, और मान्यता है कि इससे न सिर्फ मनचाहा आशीर्वाद मिलता है बल्कि व्रती की आत्मशुद्धि भी होती है।

अजा एकादशी की सही तारीख

पंचांग के हिसाब से एकादशी तिथि 6 सितंबर की रात 7 बजकर 31 मिनट पर शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 7 सितंबर की सुबह 5 बजकर 6 मिनट तक चलेगी। चूंकि हिंदू धर्म में व्रत की तारीख उदयातिथि के आधार पर तय होती है, यानी सूर्योदय के वक्त जो तिथि लगी हो उसे ही मान्य माना जाता है, इसलिए 7 सितंबर को उदयातिथि में एकादशी होने के चलते अजा एकादशी का व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। जो लोग व्रत रखेंगे, उन्हें पारण यानी व्रत खोलने के लिए 8 सितंबर की सुबह 6 बजे के बाद तक इंतजार करना होगा।

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पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

7 सितंबर को पूजा और व्रत के संकल्प के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। सुबह जल्दी उठने वालों के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, वहीं प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 5 बजकर 15 मिनट से 6 बजकर 25 मिनट के बीच है। दोपहर में पूजा करने वालों के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 1 बजकर 1 मिनट तक शुभ रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक और सायाह्न सन्ध्या 6 बजकर 48 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 3 बजकर 59 मिनट से शाम 5 बजकर 29 मिनट तक बताया गया है, जिसे किसी भी शुभ काम के लिए बेहद अनुकूल समय माना जाता है।

दिनभर बनने वाले शुभ योग

2026 की अजा एकादशी सिर्फ तारीख की वजह से ही नहीं बल्कि उस दिन बनने वाले दुर्लभ खगोलीय संयोगों की वजह से भी खास मानी जा रही है। सुबह के वक्त आकाश में पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, जो रात होते-होते पुष्य नक्षत्र में बदल जाएगा। इसी दौरान चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा, जिसे समृद्धि और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। इसके अलावा शुक्र ग्रह के अपनी ही राशि यानी स्वराशि में मौजूद होने से पंचमहापुरुष योग में शामिल मालव्य योग का निर्माण होगा, जबकि बुध ग्रह अपनी उच्च राशि में रहते हुए भद्र योग बनाएंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इतने सारे शुभ योगों का एक साथ बनना दुर्लभ है, और इस दिन व्रत रखने के साथ तुलसी से जुड़े धार्मिक उपाय करने पर भक्तों को विशेष लाभ मिल सकता है। जो लोग किसी वजह से व्रत नहीं रख पाते, उनके लिए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना भी शुभ फलदायी बताया गया है।

सवाल-जवाब

अजा एकादशी 2026 में किस दिन रखी जाएगी?
उदयातिथि के हिसाब से अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा।
एकादशी तिथि कब शुरू होगी और कब खत्म होगी?
तिथि 6 सितंबर रात 7 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 7 सितंबर सुबह 5 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी।
व्रत का पारण कब किया जाएगा?
व्रत का पारण 8 सितंबर को सुबह 6 बजे के बाद किया जाएगा।
पूजा के लिए सबसे शुभ समय कौन सा है?
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:52 से 5:38) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:12 से 1:01) को विशेष शुभ माना जा रहा है।
इस दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
इस दिन गजकेसरी योग, मालव्य योग और भद्र योग के साथ पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र भी रहेंगे।
जो लोग व्रत नहीं रख पाते, उनके लिए क्या उपाय है?
ऐसे लोग भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करके भी शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।
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