अपना घर बनाना हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है। लोग अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी और मेहनत की कमाई एक सुंदर मकान खड़ा करने में लगा देते हैं। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि गृह निर्माण में जल्दबाजी या सही जानकारी न होने की वजह से लोग कुछ बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं। मकान बनकर तैयार होते ही प्लास्टर और पेंट कराकर लोग गृह प्रवेश कर लेते हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद दीवारों पर नमी और सीलन की पपड़ी दिखाई देने लगती है। इससे न केवल घर का सुंदर लुक खराब होता है, बल्कि मकान मालिक को दोबारा मरम्मत पर भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है।
फाउंडेशन के स्तर पर ध्यान देना है बेहद जरूरी
घर की दीवारों को जीवनभर सीलन और नमी से सुरक्षित रखने के लिए निर्माण के शुरुआती चरण यानी नींव (फाउंडेशन) के दौरान ही विशेष ध्यान देना होता है। बिहार के जहानाबाद जिले स्थित घोसी के रहने वाले राज मिस्त्री बैजू कुमार, जिनके पास भवन निर्माण का 11 साल का लंबा अनुभव है, बताते हैं कि सीलन रोकने का सबसे प्रभावी काम नींव भरते समय ही किया जा सकता है। उनके अनुसार, अगर फाउंडेशन बनाते समय सही प्रक्रिया अपनाई जाए तो मकान में सीलन की समस्या कभी पैदा नहीं होगी।
डीपीसी के बाद वॉटरप्रूफिंग घोल का इस्तेमाल
बैजू कुमार के अनुसार, जब मकान का निर्माण जमीन के स्तर से 3 फीट ऊपर तक पहुंच जाए, तो वहां सबसे पहले डीपीसी (डैम प्रूफ कंक्रीट) की परत बिछानी चाहिए। लेकिन केवल डीपीसी कराना ही काफी नहीं होता। अधिकांश लोग डीपीसी का काम पूरा होते ही तुरंत उसके ऊपर ईंटों की जुड़ाई शुरू कर देते हैं, जो एक बड़ी भूल है। सही तरीका यह है कि डीपीसी की कंक्रीट सेट होने के बाद उसके ऊपर वॉटरप्रूफिंग रसायन या वॉटरप्रूफ घोल की एक अच्छी कोटिंग की जाए। बाजार में किसी भी निर्माण सामग्री की दुकान पर वॉटरप्रूफिंग केमिकल आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
घोल सूखने के बाद ही शुरू करें ईंटों की जुड़ाई
राज मिस्त्री का कहना है कि डीपीसी पर वॉटरप्रूफिंग घोल लगाने के बाद उसे पूरी तरह सूखने देना चाहिए। जब यह कोटिंग अच्छी तरह सूखकर एक मजबूत परत बना ले, तभी उसके ऊपर आगे की ईंट जुड़ाई का काम शुरू करना चाहिए। यह वॉटरप्रूफ परत जमीन की नमी को ऊपर की दीवारों तक चढ़ने से पूरी तरह रोक देती है। यदि इस चरण को छोड़ दिया जाता है, तो जमीन की नमी ईंटों के जरिए धीरे-धीरे पूरे मकान की दीवारों में फैल जाती है और पपड़ी बनकर पेंट को उखाड़ देती है।
थोड़ी सी बचत भविष्य में पड़ती है भारी
मकान बनवाते समय अक्सर लोग थोड़े से पैसे बचाने के चक्कर में डीपीसी पर वॉटरप्रूफिंग का घोल नहीं लगवाते। लेकिन यह छोटी सी बचत बाद में बेहद महंगी साबित होती है। नमी के कारण दीवारों का प्लास्टर झड़ने लगता है, पेंट खराब होता है और बार-बार मरम्मत करानी पड़ती है। इसलिए शुरुआत में ही सही तकनीक और वॉटरप्रूफिंग में थोड़ा सा अतिरिक्त निवेश करके हमेशा के लिए सीलन से मुक्ति पाई जा सकती है और मकान को मजबूत व टिकाऊ बनाया जा सकता है।



















