मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित महोबा जिले का श्रीनगर किला क्षेत्र एक ऐतिहासिक विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। यहाँ की एक ऊँची पहाड़ी पर बना 120 साल पुराना प्राथमिक विद्यालय आज भी स्थानीय बच्चों के लिए ज्ञान का केंद्र बना हुआ है। साल 1901 में स्थापित यह स्कूल राजशाहियों के दौर की मजबूत इमारत में चल रहा है। आजादी से पहले बनी इस इमारत में सौ साल पुराने लकड़ी के किवाड़ आज भी लगे हुए हैं और बिना किसी तकनीकी खराबी या संरचनात्मक शिकायत के बच्चे यहाँ रोजाना तालीम हासिल कर रहे हैं।
महाराजा छत्रसाल के परिवार और राजा मोहन सिंह से जुड़ा इतिहास
इस प्राथमिक विद्यालय का ऐतिहासिक संबंध बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल के राजवंश से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध छतरपुर नगरी बसाई थी। इस स्कूल और श्रीनगर किले का निर्माण महाराजा छत्रसाल के 8वें दत्तक पुत्र बुंदेला राजा मोहन सिंह ने कराया था। साल 1901 में राजा मोहन सिंह ने किला परिसर के भीतर पहाड़ की चोटी पर इस विद्यालय की आधारशिला रखी थी। देश को आजादी मिलने के बाद जब राज्यों का पुनर्गठन हुआ और नई प्रशासनिक सीमाएँ तय की गईं, तब श्रीनगर गाँव उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के अंतर्गत आ गया। हालांकि, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की सीमा इस ऐतिहासिक स्कूल से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है।
100 साल पुराने दरवाजों और नए कमरों का अनूठा मेल
राजा मोहन सिंह द्वारा बनवाई गई यह इमारत स्थापत्य कला और मजबूती की दृष्टि से आज भी बेमिसाल है। 120 से अधिक वर्षों का सफर तय करने के बावजूद इस मुख्य भवन की संरचना में अब तक कोई खामी या शिकायत सामने नहीं आई है। स्कूल में लगे सदी पुराने दरवाजे आज भी मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ साल पहले परिसर में अलग से नए कमरे बनवाए गए थे। वर्तमान में पुराने ऐतिहासिक भवन के साथ-साथ इन नए कमरों में भी नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जाती हैं।
15 वर्षों में बदला पहाड़ी परिसर का माहौल और बना सुंदर गार्डन
पहाड़ी पर स्थित होने के कारण इस स्कूल को अतीत में कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ा था। प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर किला में पिछले 15 सालों से प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत प्रियंका तिवारी बताती हैं कि जब उन्होंने यहाँ कार्यभार संभाला था, तब स्कूल की स्थिति काफी दयनीय थी। पहाड़ी की चोटी पर होने के कारण यहाँ पेड़-पौधों का अभाव था और असामाजिक तत्व आकर गंदगी फैलाया करते थे। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रिंसिपल प्रियंका तिवारी और स्कूल स्टाफ ने व्यापक बदलाव की योजना बनाई। उन्होंने पहाड़ी के ऊपर ही बच्चों के खेलने के लिए एक सुंदर पार्क और गार्डन तैयार करवाया और परिसर में बड़े पैमाने पर पौधे लगवाए। इन सतत प्रयासों के बाद अब असामाजिक तत्वों का आना बंद हो गया है और बच्चे रोजाना खुशी-खुशी स्कूल आकर पढ़ाई कर रहे हैं।



















