उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी धाम परिसर और उसके नए बने कॉरिडोर क्षेत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। मंदिर परिसर में बिना पूर्व मंजूरी के मनमाने ढंग से होने वाले कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है। अब किसी भी तरह की सांस्कृतिक गतिविधि या धार्मिक अनुष्ठान आधारित मंच कार्यक्रम आयोजित करने से पहले विंध्य तीर्थ विकास परिषद से औपचारिक अनुमति हासिल करनी होगी। इसके साथ ही तय शुल्क जमा करने के बाद मिलने वाली रसीद दिखाने पर ही आयोजकों को कार्यक्रम शुरू करने की इजाजत दी जाएगी। प्रशासन ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए सभी नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है।
कॉरिडोर बनने के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और बिजली व्यवस्था की चुनौतियां
मां विंध्यवासिनी धाम में भव्य कॉरिडोर का निर्माण पूरा होने के बाद से ही यहां दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती आवक के साथ ही मंदिर के परिक्रमा पथ और आसपास के खुले इलाकों में सांस्कृतिक तथा सामाजिक आयोजनों का चलन भी काफी बढ़ गया था। इससे पहले तक मंदिर परिसर के भीतर किसी भी कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए आयोजकों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था और न ही कोई जटिल अनुमति प्रक्रिया मौजूद थी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, बिना किसी पूर्व अनुमति या योजना के होने वाले इन आयोजनों के कारण कई बार मंदिर परिसर की व्यवस्था बिगड़ जाती थी। खासकर बड़े साउंड सिस्टम और लाइटिंग के इस्तेमाल से विद्युत आपूर्ति बाधित होती थी और आम श्रद्धालुओं की आवाजाही में भारी अड़चनें पैदा होती थीं। इसी अव्यवस्था को दूर करने और भीड़ नियंत्रण को सुचारू बनाने के लिए विंध्य विकास परिषद ने परिक्रमा पथ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए यह नया नियम लागू किया है।
मुंडन और यज्ञोपवीत संस्कार रहेंगे इस नियम से पूरी तरह मुक्त
विंध्य विकास परिषद द्वारा जारी किए गए इस नए आदेश में श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा ख्याल रखा गया है। नए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि बच्चों के मुंडन संस्कार और यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार जैसे निजी तथा पारिवारिक धार्मिक अनुष्ठानों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी। इन पारंपरिक संस्कारों के लिए श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की पूर्व अनुमति लेने या अतिरिक्त शुल्क चुकाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, और वे पूर्ववत अपनी परंपराएं पूरी कर सकेंगे।
बिना अनुमति आयोजन करने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
विंध्य विकास परिषद के सचिव और नगर मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार ने इस नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि कॉरिडोर परिसर के भीतर व्यवस्था बनाए रखना और प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करना बेहद जरूरी हो गया था। उनका कहना है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए यह कदम उठाया गया है।
नगर मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार ने चेतावनी दी है कि अब बिना वैध अनुमति और निर्धारित शुल्क जमा किए बिना यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था मां विंध्यवासिनी धाम परिसर में सांस्कृतिक आयोजन करती पाई गई, तो उसके खिलाफ संबंधित नियमों के तहत सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी आयोजकों को सलाह दी गई है कि वे कार्यक्रम की तारीख से पहले परिषद के कार्यालय में आवेदन करके मंजूरी प्राप्त कर लें।



















