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देवरिया के संस्कृत कॉलेज में CDO की छापेमारी, तीन कमरों के संस्थान में सोते मिले कर्मचारी और सभी छात्र नदारदशिक्षा
1 अग॰ 2026, 2:08 pm (87 दिन पहले)· 0

देवरिया के संस्कृत कॉलेज में CDO की छापेमारी, तीन कमरों के संस्थान में सोते मिले कर्मचारी और सभी छात्र नदारद

देवरिया के पांडेचक बरनई स्थित श्री विजय राघव संस्कृत महाविद्यालय में मुख्य विकास अधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई है। तीन कमरों में चल रहे इस कॉलेज में छात्र-शिक्षक गायब मिले, जिसके बाद विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान एक शिक्षण संस्थान में भारी अव्यवस्था देखने को मिली। देवरिया के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) राजेश कुमार सिंह ने जब पांडेचक बरनई स्थित श्री विजय राघव संस्कृत महाविद्यालय का अचानक दौरा किया, तो वहां का माहौल हैरान करने वाला था। केवल तीन कमरों की एक छोटी सी इमारत में चल रहे इस महाविद्यालय में एक भी छात्र मौजूद नहीं था और न ही कोई शिक्षक कक्षाएं लेता हुआ पाया गया। इसके विपरीत, संस्थान का एक कर्मचारी कुर्सी पर बैठा हुआ मेज पर पैर फैलाकर आराम से सोता हुआ मिला, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

औचक निरीक्षण के दौरान सामने आया चौंकाने वाला दृश्य

मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह सुबह के समय बिना किसी पूर्व सूचना के पांडेचक बरनई स्थित इस संस्कृत महाविद्यालय में पहुंचे थे। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य संस्थान में पठन-पाठन की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेना था। हालांकि, मौके पर पहुंचते ही अधिकारी और उनकी टीम को गंभीर अनियमितताएं दिखाई दीं। कॉलेज परिसर के नाम पर महज तीन छोटे-छोटे कमरे बने हुए थे, जिनमें शैक्षणिक गतिविधियों का कोई नामोनिशान नहीं था।

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जांच टीम जब कमरों के भीतर दाखिल हुई, तो वहां न तो कोई विद्यार्थी पढ़ाई करता दिखा और न ही अध्यापन कार्य के लिए कोई शिक्षक उपस्थित था। पूरे परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था और एक कमरे में संस्थान का कर्मचारी टेबल पर पैर रखकर बेफिक्र सो रहा था। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी करवाई, ताकि साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सके।

प्रशासनिक जांच और नियमों की समीक्षा के आदेश

इस निरीक्षण के बाद जिला प्रशासन ने संस्थान की वैधता और इसके कामकाज के तरीकों पर कई बुनियादी सवाल खड़े किए हैं। सबसे मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह संस्थान सरकार से मिलने वाले अनुदान का सही उपयोग कर रहा है या फिर कागजों पर ही इसका संचालन दिखाया जा रहा है। क्या यह महाविद्यालय शिक्षा विभाग के निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप चलाया जा रहा है या इसकी मान्यता कागजी दावों तक ही सीमित है?

सीडीओ राजेश कुमार सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महाविद्यालय की मान्यता, भवन मानकों, छात्र संख्या और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संस्थान को किसी प्रकार का सरकारी अनुदान प्राप्त हो रहा है या नहीं, और यदि ऐसा है तो छात्रों की अनुपस्थिति के बावजूद निधि का उपयोग किस आधार पर किया जा रहा था।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन

इस पूरी घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुबह के समय जब टीम पांडेचक बरनई संस्कृत महाविद्यालय पहुंची, तब तीन छोटे कमरों के इस परिसर में कर्मचारी दवा खाकर या किसी अन्य वजह से सोता हुआ पाया गया, जिसकी वीडियो बनाई गई है।

अधिकारी ने बताया कि यदि यह विद्यालय सरकारी अनुदान प्राप्त है, तो यहां पठन-पाठन ठप्प रहने के कारणों की गहनता से पड़ताल की जा रही है। वहीं, अगर यह एक निजी संस्थान के रूप में पंजीकृत है, तो भी इसके संचालन और नियमों के उल्लंघन को लेकर पूरी रिपोर्ट तलब की गई है। सीडीओ ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि नियमों के उल्लंघन या अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सवाल-जवाब

यह मामला किस जिले और किस कॉलेज से जुड़ा है?
यह मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के पांडेचक बरनई स्थित श्री विजय राघव संस्कृत महाविद्यालय का है।
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारी को क्या स्थिति मिली?
तीन कमरों के कॉलेज में कोई छात्र या शिक्षक मौजूद नहीं था, और एक कर्मचारी मेज पर पैर रखकर सोता हुआ मिला।
इस औचक निरीक्षण को किस अधिकारी ने अंजाम दिया?
देवरिया के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) राजेश कुमार सिंह ने इस कॉलेज का औचक निरीक्षण किया।
लापरवाही सामने आने पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
CDO ने कॉलेज की मान्यता, अनुदान और संचालन नियमों की जांच के आदेश दिए हैं तथा दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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