बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र में शिक्षा से जुड़े दो अहम फैसलों की घोषणा हुई है. सदन में हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया कि आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों को एक महीने के भीतर भरा जाएगा, जबकि अपनी जमीन से वंचित हाई स्कूलों को छह महीने में भूमि मुहैया कराकर वहां भवन निर्माण शुरू कराया जाएगा.
आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती पर जोर
चर्चा के दौरान बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों का मुद्दा उठा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने माना कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से देख रही है और शिक्षा विभाग को इसकी निगरानी सख्ती से करने को कहा गया है. सदन में भरोसा दिलाते हुए उन्होंने कहा, "एक महीने के अंदर शिक्षक बहाली की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी." इस ऐलान से आवासीय विद्यालयों के उन छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनकी पढ़ाई शिक्षकों की कमी से प्रभावित हो रही थी.
छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, यही मकसद
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवासीय विद्यालयों के छात्रों को अच्छी शिक्षा मिले, यही सरकार की प्राथमिकता है, और स्टाफ की कमी की वजह से उनकी पढ़ाई पर असर नहीं पड़ना चाहिए. यही वजह है कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि कक्षाओं में पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके.
बिना जमीन वाले हाई स्कूलों को मिलेगी भूमि
शिक्षकों की भर्ती के अलावा मुख्यमंत्री ने राज्य के हाई स्कूलों के ढांचागत हालात पर भी बड़ी घोषणा की. उन्होंने बताया कि जिन हाई स्कूलों के पास अब तक अपनी जमीन नहीं है, उन्हें आने वाले छह महीनों में भूमि दी जाएगी. जमीन मिलने के तुरंत बाद वहां स्कूल भवनों का निर्माण शुरू होगा, जिससे छात्रों को पढ़ाई के लिए बेहतर कमरे, प्रयोगशालाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी.
सदन में विधायकों ने भी उठाया भवनों का मुद्दा
गौरतलब है कि मॉनसून सत्र के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों तरफ के सदस्यों ने स्कूल भवनों की कमी को जोरदार ढंग से रखा. बीजेपी से जीवेश मिश्रा और आरजेडी से आलोक मेहता ने मिथिलेश तिवारी से स्कूलों में भवन और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल दागे, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री की यह घोषणा सामने आई.



















