बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होते ही विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सामने भविष्य की दिशा तय करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे पुराने अकादमिक कोर्स अब इस बात की गारंटी नहीं देते कि डिग्री पूरी होते ही रोजगार मिल जाएगा। यही वजह है कि आज के दौर में छात्र ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जहाँ केवल किताबों के पन्ने पलटने तक सीमित न रहना पड़े, बल्कि वास्तविक कार्यकुशलता और व्यावहारिक ज्ञान भी सीखने को मिले। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए 'बैचलर ऑफ वोकेशन' यानी बीवॉक का विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह एक ऐसा त्रि-वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम है जो पारंपरिक शिक्षा पद्धति के उलट किताबी ज्ञान से कहीं अधिक व्यावहारिक प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करता है।
शिक्षा नीति और व्यावहारिक पाठ्यक्रम का महत्व
देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद से ही कौशल-आधारित यानी स्किल-बेस्ड कोर्सेस का महत्व कई गुना बढ़ चुका है। शिक्षा और वेलनेस के क्षेत्र से जुड़े प्रमुख संस्थान क्षेमवन के चीफ वेलनेस ऑफिसर डॉ. नरेंद्र के शेट्टी का इस बारे में कहना है कि यह डिग्री उन युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित होती है जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ सीधे उद्योग जगत की जरूरतों के मुताबिक तैयार होना चाहते हैं। क्षेमवन परिसर में ट्रांस-डिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से संबद्धता के तहत इन बीवॉक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है, जहाँ छात्रों को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर सीधे जमीनी हकीकत से रूबरू कराया जाता है।
पाठ्यक्रम की संरचना और प्रवेश प्रक्रिया
यह तीन साल की अवधि वाला एक ऐसा वोकेशनल डिग्री प्रोग्राम है जिसे यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी यूजीसी से आधिकारिक मान्यता प्राप्त है। किसी भी शैक्षणिक स्ट्रीम से बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाला कोई भी विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकता है। पारंपरिक बीए, बीएससी और बीकॉम की पढ़ाई से बिल्कुल अलग, बीवॉक के पूरे पाठ्यक्रम का साठ से सत्तर प्रतिशत हिस्सा केवल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, ऑन-जॉब ट्रेनिंग और इंटर्नशिप पर आधारित होता है। इस पूरी व्यवस्था में केवल तीस से चालीस प्रतिशत समय ही सैद्धांतिक पढ़ाई के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे छात्रों का अधिकांश समय हुनर सीखने में बीतता है।
विशेष प्रशिक्षण और प्रमुख क्षेत्र
व्यावहारिक शिक्षा पर जोर देने की वजह से ही इस कोर्स को पूरा करने वाले युवाओं के लिए रोजगार के द्वार बहुत आसानी से खुल जाते हैं। क्षेमवन जैसे संस्थानों के भीतर बीवॉक के अंतर्गत मुख्य रूप से दो विशेष कोर्स पढ़ाए जाते हैं, जिनमें पंचकर्म और नेचुरोपैथी थेरेपी के साथ-साथ हॉस्पिटैलिटी का क्षेत्र शामिल है। पंचकर्म और नेचुरोपैथी पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को केवल पन्ने नहीं पढ़ाए जाते, बल्कि विषय विशेषज्ञों की सीधी निगरानी में थेरेपी, योग, ब्यूटी और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट का लाइव क्लिनिकल अनुभव प्रदान किया जाता है। दूसरी तरफ हॉस्पिटैलिटी एंड वेलनेस के क्षेत्र में छात्रों को फ्रंट office, फूड एंड बेवरेज सर्विस, गेस्ट रिलेशंस और वेलनेस टूरिज्म का बिल्कुल वास्तविक समय का अनुभव मिलता है, जिसकी आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारी मांग बनी हुई है।
मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का लचीलापन
इस वोकेशनल पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी असाधारण फ्लेक्सिबिलिटी यानी लचीलापन है। यदि कोई छात्र किसी भी व्यक्तिगत या पारिवारिक कारण से लगातार तीन साल तक अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाता है, तो उसकी पिछली मेहनत और समय बिल्कुल भी व्यर्थ नहीं जाता है। इस व्यवस्था के नियम के अनुसार यदि कोई विद्यार्थी एक साल पूरा कर लेता है तो उसे डिप्लोमा प्रदान किया जाता है, दो साल पूरे होने पर एडवांस डिप्लोमा मिलता है, और यदि वह तीनों साल सफलतापूर्वक पूरे कर लेता है तो उसे पूरी बीवॉक डिग्री से सम्मानित किया जाता है।
करियर की संभावनाएं और नौकरी के अवसर
इस डिग्री को हासिल करने वाले युवाओं के सामने अवसरों का कभी अभाव नहीं रहता है। पंचकर्म और नेचुरोपैथी विषय में बीवॉक की पढ़ाई पूरी करने वाले नौजवान देश-विदेश के नेचुरोपैथी अस्पतालों, स्पा सेंटर्स, रिजॉर्ट्स और वेलनेस सेंटर्स में आसानी से नौकरी पा सकते हैं या फिर खुद अपना वेलनेस स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। इसके विपरीत हॉस्पिटैलिटी से जुड़े ग्रेजुएट्स के लिए बड़े होटल्स, रेस्तरां, इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों, एविएशन सेक्टर और हेल्थकेयर हॉस्पिटैलिटी में रोजगार के अनगिनत रास्ते खुल जाते हैं। यदि अभिभावक चाहते हैं कि उनका बच्चा किसी चुनिंदा क्षेत्र में विशेष दक्षता हासिल करे और पढ़ाई समाप्त होते ही नौकरी की पक्की गारंटी मिले, तो यह विकल्प बेहद मुफीद है। हालांकि किसी भी संस्थान में दाखिला दिलाने से पहले माता-पिता को यह अवश्य जांच लेना चाहिए कि वह कॉलेज या यूनिवर्सिटी यूजीसी से मान्यता प्राप्त हो और उसके पास छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए बेहतरीन इंडस्ट्री पार्टनर्स मौजूद हों।


















