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मिर्जापुर द मूवी पसंद आई तो देखें ये 9 डार्क क्राइम थ्रिलर, रोंगटे खड़े कर देंगी सच्ची और खौफनाक कहानियांमनोरंजन
7 सित॰ 2026, 11:21 pm (2 घंटे पहले)· 2

मिर्जापुर द मूवी पसंद आई तो देखें ये 9 डार्क क्राइम थ्रिलर, रोंगटे खड़े कर देंगी सच्ची और खौफनाक कहानियां

यदि आपको मिर्जापुर का अंदाज और डार्क क्राइम थ्रिलर पसंद हैं, तो बॉलीवुड की ये नौ फिल्में आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं। इनमें से कई कहानियां रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्ची घटनाओं पर आधारित हैं।

यदि आपको 'मिर्जापुर द मूवी' का जॉनर और उसका खौफनाक माहौल पसंद आया है, तो भारतीय सिनेमा में ऐसी कई और शानदार डार्क क्राइम थ्रिलर मौजूद हैं जो आपके रोंगटे खड़े कर सकती हैं। सत्ता के संघर्ष, खूनी दुश्मनी और समाज की कड़वी सच्चाइयों को उजागर करती ये नौ फिल्में अपनी दमदार कहानियों और बेहतरीन अभिनय के लिए जानी जाती हैं। इन फिल्मों की दुनिया कल्पना से भी ज्यादा भयानक और रोमांचक है।

गैंग्स ऑफ वासेपुर और सत्ता की खूनी विरासत

कोयला खदानों के काले सच, राजनीतिक सत्ता और निजी बदले की आग के बीच बुनी गई यह कहानी कई पीढ़ियों तक फैली एक खूनी और वीभत्स दुश्मनी को परदे पर उतारती है। वर्चस्व की इस अंतहीन लड़ाई ने कैसे हंसते-खेलते परिवारों को पूरी तरह तबाह कर दिया, फिल्म इसी का जीवंत दस्तावेज है। मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और हुमा कुरैशी जैसे मंझे हुए कलाकारों की बेहतरीन अदाकारी ने इस गाथा को भारतीय सिनेमा में एक अलग ही मुकाम पर पहुंचा दिया है।

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तलवार और न्याय व्यवस्था की परतें

यह फिल्म दिल्ली में हुए एक चर्चित डबल मर्डर केस जैसी डरावनी और सनसनीखेज सच्ची घटना पर गहराई से आधारित है। यह कहानी एक युवा लड़की आयूषी तलवार की जिंदगी से जुड़ी है, जिसके घटनाक्रम कल्पना से भी कहीं ज्यादा खौफनाक हैं। फिल्म में इस अंधे कत्ल से जुड़े अलग-अलग पहलुओं, देश की जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और हमारी न्याय व्यवस्था की अंदरूनी खामियों को बेहद बेबाकी से सबके सामने लाया गया है।

अंधाधुन का उलझा हुआ झूठ और सच

आयुष्मान खुराना अभिनीत इस फिल्म में एक ऐसा पियानो वादक दिखाया गया है जो अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए अंधे होने का नाटक करता है। लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आता है जब वह अपनी आंखों से एक ऐसी रहस्यमयी हत्या देख लेता है जिससे उसकी पूरी जिंदगी ही उलट-पुलट हो जाती है। इसके बाद झूठ, फरेब और धोखे का एक ऐसा खतरनाक खेल शुरू होता है जो दर्शकों को आखिरी पल तक भ्रम में रखता है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि पर्दा गिरने तक दर्शक यह तय नहीं कर पाते कि आखिर सच क्या है और झूठ क्या।

सत्या और अंडरवर्ल्ड की कड़वी हकीकत

राम गोपाल वर्मा द्वारा निर्देशित यह वह क्लासिक कल्ट फिल्म है जिसने अभिनेता मनोज बाजपेयी को फिल्म जगत में एक नई पहचान दिलाई। सत्या एक हाई ऑक्टेन क्राइम-एक्शन फिल्म है, जो अंडरवर्ल्ड की दुनिया को दिखाती है। यह फिल्म इसलिए बेहद खास मानी जाती है क्योंकि यह किसी भी गैंगस्टर की अपराध भरी जिंदगी को जरा भी ग्लैमराइज नहीं करती, बल्कि उसके काले सच और खतरनाक अंजाम को पूरी बेबाकी से परदे पर रखती है।

दृश्यम फ्रेंचाइजी और परिवार की सुरक्षा का ताना-बाना

अजय देवगन, तब्बू और श्रिया सरन अभिनीत इस सफल फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी दर्शकों के बीच आने को तैयार है। फिल्म की कहानी एक ऐसे आम पिता के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपने परिवार को हर कीमत पर बचाने के लिए पुलिस और कानून से छुपने की मास्टरप्लानिंग करता है। वह फिल्मों और टेलीविजन से मिली अपनी सामान्य जानकारी और तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसे जाल बुनता है कि अच्छे-अच्छे पुलिसकर्मी भी उलझन में पड़ जाते हैं।

रमन राघव 2.0 का खौफनाक मनोवैज्ञानिक सफर

यह फिल्म अपनी डार्क थीम और भयानक दृश्यों के कारण बेहद अलग और परेशान करने वाली है। एक सनकी और क्रूर सीरियल किलर तथा नशे की लत में डूबे एक पुलिसवाले की यह समानांतर कहानी धीरे-धीरे इतनी खतरनाक मोड़ ले लेती है कि दोनों के बीच का गहरा और अजीब रिश्ता दर्शकों के भीतर सिहरन पैदा कर देता है। यदि आपको मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्में देखने का शौक है, तो यह फिल्म आपके लिए एक अनिवार्य और गहरा अनुभव साबित हो सकती है।

आर्टिकल 15 और समाज की कड़वी सच्चाइयों का सामना

एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी तीन युवा लड़कियों के अचानक रहस्यमयी तरीके से गायब होने की गुत्थी सुलझाने के लिए निकलता है। लेकिन जैसे-जैसे वह इस गंभीर केस की परतें उधेड़ता है, उसे समाज के भीतर रचे-बसे कई कड़वे और डरावने सच का सामना करना पड़ता है। जातिगत भेदभाव, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और गंदी राजनीति के बीच आगे बढ़ने वाली यह फिल्म महज एक साधारण क्राइम थ्रिलर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हमारे समाज के सिस्टम पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगाती है।

कहानी और विद्या बालन का बेहतरीन अभिनय

विद्या बालन के अभिनय करियर की सबसे चमकदार फिल्मों में शुमार यह कहानी शुरुआत से लेकर अंत तक बांधे रखती है। फिल्म में विद्या बालन ने एक गर्भवती महिला का किरदार निभाया है जो अपनी ही गर्भावस्था के मुश्किल दौर में अपने लापता पति की तलाश करने के लिए शहर की सड़कों पर निकल पड़ती है। इसके बाद फिल्म की पटकथा में ऐसे जबरदस्त और अप्रत्याशित ट्विस्ट आते हैं जो दर्शकों को अपनी सीट से हिलने नहीं देते।

अग्ली और मानवीय स्वार्थ का काला चेहरा

एक छोटी सी बच्ची के अचानक गायब हो जाने के बाद शुरू होने वाली यह कहानी धीरे-धीरे उन चेदहरों से नकाब उतारती है जिनके पीछे भयानक लालच और स्वार्थ छिपा होता है। फिल्म यह दिखाती है कि संकट और मुसीबत के वक्त एक इंसान अपने मामूली फायदे के लिए किस हद तक गिर सकता है। इसकी कहानी बेहद गहरी, डार्क और झकझोर देने वाली है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक आपके जहन में सवाल खड़े करती रहती है।

सवाल-जवाब

मिर्जापुर द मूवी पसंद आने पर कौन सी फिल्में देखनी चाहिए?
यदि आपको मिर्जापुर पसंद है तो आप गैंग्स ऑफ वासेपुर, सत्या और रमन राघव 2.0 जैसी डार्क क्राइम थ्रिलर देख सकते हैं।
कौन सी फिल्में सच्ची घटनाओं पर आधारित हैं?
तलवार फिल्म दिल्ली के एक चर्चित डबल मर्डर केस जैसी सच्ची घटना पर आधारित है।
अंधाधुन फिल्म की कहानी क्या है?
अंधाधुन में एक पियानो वादक अंधे होने का नाटक करता है और एक हत्या देखने के बाद झूठ और धोखे के खेल में उलझ जाता है।
दृश्यम फ्रेंचाइजी की फिल्मों का मुख्य विषय क्या है?
दृश्यम में एक पिता फिल्मों से सीखी जानकारियों का उपयोग करके अपने परिवार को पुलिस से बचाने की साजिश रचता है।
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