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कर्नाटक में फर्जी अदालती आदेश से उम्रकैद के मुजरिम को छुड़वाने पर कारागार डीआईजी सोमशेखर गिरफ्तारभारत
5 अक्तू॰ 2026, 9:34 pm (53 मिनट पहले)· 0

कर्नाटक में फर्जी अदालती आदेश से उम्रकैद के मुजरिम को छुड़वाने पर कारागार डीआईजी सोमशेखर गिरफ्तार

बेंगलुरु की केंद्रीय जेल से जाली अदालती दस्तावेज के सहारे उम्रकैद के दोषी को छोड़ने के मामले में जांच के बाद डीआईजी सोमशेखर को पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

कर्नाटक कारागार विभाग में सर्वोच्च अदालत के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उम्रकैद की सजा भुगत रहे एक कैदी को जेल से बाहर निकालने के सनसनीखेज मामले में कड़ा कानूनी शिकंजा कसा गया है। केंद्रीय जेल बेंगलुरु के तत्कालीन मुख्य अधीक्षक और मौजूदा समय में डीआईजी प्रिजन्स के पद पर तैनात अधिकारी सोमशेखर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गंभीर गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब इसी वर्ष 20 मई को बेंगलुरु केंद्रीय जेल के प्रभारी अधीक्षक ने परप्पना अग्रहारा थाने में आधिकारिक शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया था कि चिकपेट थाना क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर अपराध में सजायाफ्ता कैदी शंकर ए. को उच्चतम न्यायालय के कथित आदेश की जालसाजी करके 13/11/2018 को रिहा करवा दिया गया था।

फास्ट ट्रैक कोर्ट से उम्रकैद और अपीलों का इतिहास

परप्पना अग्रहारा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जब जांच दल ने अदालती और जेल के पुराने दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की, तो पूरे मामले की परतें खुलती चली गईं। दोषी शंकर ए. के खिलाफ चिकपेट पुलिस थाने में आपराधिक मामला दर्ज था, जिसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट-I में चली थी। निचली अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद 12/07/2004 को शंकर ए. को उम्रकैद की कठोर सजा सुनाई थी और साथ ही ₹10,000/- का जुर्माना भी लगाया था। दोषी ने अपनी इस सजा को चुनौती देने के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय और बाद में देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। हालांकि उच्च अदालतों ने उसकी तमाम अपीलों को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की गई उम्रकैद की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा था।

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जेल कर्मियों की मिलीभगत और जाली आदेश का निर्माण

जांच अधिकारियों की पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि जेल प्रशासन के भीतर से ही जालसाजी का ताना-बाना बुना गया था। उस दौर में जेल में एसडीए के पद पर कार्यरत और मौजूदा समय में केंद्रीय कारागार के दोषी कैदी अनुभाग में एफडीए के रूप में सेवारत कर्मचारी श्रीकांत एस. ने इस फर्जीवाड़े में अहम भूमिका निभाई। श्रीकांत एस. ने दोषी शंकर ए. की आपराधिक अपील से जुड़ा उच्चतम न्यायालय का एक पूरी तरह नकली आदेश पत्र तैयार किया। इस जाली दस्तावेज में यह झूठा दावा दर्ज किया गया था कि अदालत ने 02/11/2018 को कैदी की रिहाई का आदेश पारित कर दिया है। इसी फर्जी कागजात को असली ठहराते हुए मुजरिम शंकर ए. को 13/11/2018 को जेल की सलाखों से अवैध रूप से रिहा कर दिया गया।

गंभीर आरोपों के बीच पूछताछ और न्यायिक कार्रवाई

पुलिस जांच के दायरे को बढ़ाते हुए जब दोषी कैदी की पत्नी से पूछताछ की गई, तो मामले में और भी चौंकाने वाले पहलू सामने आए। कैदी की पत्नी ने आरोप लगाया कि उस समय के मुख्य अधीक्षक ने उनके पति को जेल से छुड़ाने में सीधी मदद की थी और इस काम के बदले अधिकारी ने अनुचित लाभ और यौन फेवर लिया था। जांच एजेंसियां इन संगीन आरोपों की सत्यता की गहराई से छानबीन कर रही हैं। इस पूरे प्रकरण में पकड़े गए दो आरोपियों को अदालत में पेश किया जा चुका है, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जांच में असहयोग और डीआईजी सोमशेखर की पुलिस हिरासत

जांच आगे बढ़ने पर कारागार एवं सुधार सेवा विभाग के तत्कालीन मुख्य अधीक्षक और वर्तमान डीआईजी सोमशेखर की संदिग्ध भूमिका पूरी तरह उजागर हुई। अधिकारियों के मुताबिक सोमशेखर ने जांच प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग नहीं दिया और मामले से जुड़ी अहम जानकारियां जानबूझकर छिपाईं। इसके बाद 04/10/2026 को पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया। अदालत ने मामले की तह तक जाने और विस्तृत पूछताछ के लिए आरोपी अधिकारी को 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में सौंप दिया है, जहां इस पूरे षड्यंत्र से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल जारी है।

सवाल-जवाब

डीआईजी सोमशेखर को क्यों गिरफ्तार किया गया है?
उन्हें बेंगलुरु सेंट्रल जेल के मुख्य अधीक्षक रहने के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश पर उम्रकैद के कैदी को रिहा कराने और जांच में सहयोग न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
कैदी शंकर ए. को किस मामले में सजा हुई थी?
चिकपेट थाने में दर्ज केस में फास्ट ट्रैक कोर्ट-I ने 12/07/2004 को शंकर ए. को उम्रकैद और ₹10,000/- जुर्माने की सजा सुनाई थी।
उच्च अदालतों में शंकर ए. की अपील का क्या हुआ था?
कर्नाटक उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय दोनों ने ही शंकर ए. की अपील को खारिज कर ट्रायल कोर्ट की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।
फर्जी रिहाई आदेश किसने तैयार किया था?
जांच के अनुसार तत्कालीन एसडीए और वर्तमान एफडीए श्रीकांत एस. ने उच्चतम न्यायालय के नाम से जाली आदेश तैयार किया था।
अदालत ने सोमशेखर को कितने दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा है?
अदालत ने मामले की गहन पूछताछ और जांच के लिए सोमशेखर को 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

जेल के अंदर से ऐसा फर्जीवाड़ा कैसे चल सकता है जहाँ खुद कानून का पहरा हो? बाकी और कितने कैदी ऐसे छूटे होंगे?

Ravikash Gupta@ravikash·3 मिनट पहले

बिल्कुल सही कहा आपने करण! क्या आपको लगता है कि इस खेल में सिर्फ डीआईजी और एक क्लर्क ही शामिल थे या ऊपर तक और भी लोग बैठे हैं?

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