महाराष्ट्र साइबर ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो भारत में डॉक्टरी पेशा अपनाने के लिए जरूरी फर्जी मेडिकल परीक्षा दस्तावेज और प्रमाण पत्र तैयार कर रहा था। इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने अब तक तीन लोगों को हिरासत में लिया है। पूरा मामला तब सामने आया जब महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल यानी एमएमसी ने संदेह के आधार पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन, मुंबई में एफआईआर संख्या 72/2026 दर्ज की गई। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66, 66(सी) और 66(डी) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
जाली दस्तावेजों के जरिए पंजीकरण का पूरा खेल
यह मामला उन विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स से जुड़ा है जिन्होंने अन्य देशों से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है। भारतीय नियमों के मुताबिक, किसी भी विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट को देश में चिकित्सा अभ्यास करने और आधिकारिक पंजीकरण पाने से पहले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन यानी एफएमजीई उत्तीर्ण करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है। इस परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज के पास होती है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल जब अपने पास आए पंजीकरण आवेदनों की नियमित जांच और सत्यापन कर रही थी, तब अधिकारियों को कुछ ऐसे संदिग्ध मामले मिले जहां छात्रों ने यह अनिवार्य परीक्षा उत्तीर्ण ही नहीं की थी, फिर भी उनके पास अधिकृत मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र मौजूद थे। इस गंभीर विसंगति की जानकारी मिलते ही एमएमसी ने महाराष्ट्र साइबर को सूचित किया, जिसके बाद विस्तृत तकनीकी पड़ताल शुरू की गई। जांचकर्ताओं ने डिजिटल रिकॉर्ड, तकनीकी विश्लेषण और सिस्टम लॉग का गहन अध्ययन करके जालसाजी के इस खेल में शामिल संदिग्धों की पहचान स्थापित की।
गिरफ्तार आरोपियों में दो अभ्यर्थी और मुख्य संचालक शामिल
पुलिस द्वारा पकड़े गए तीन आरोपियों में से दो ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने खुद यह परीक्षा पास नहीं की थी, लेकिन कथित तौर पर अवैध तरीके से मेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट हासिल कर लिया था। इनमें पहला आरोपी 28 वर्षीय वरुण प्रतापराव आखाड़े है, जो बुलढाणा का निवासी है। दूसरा आरोपी 26 वर्षीय संकेत प्रभाकर उन्हाले है, जो भी बुलढाणा का रहने वाला है। इन दोनों ने बिना पात्रता परीक्षा पास किए फर्जी कागजात का इस्तेमाल कर खुद को पंजीकृत चिकित्सक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की थी।
नासिक से पकड़ा गया रैकेट का अहम ऑपरेटर
मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए जब पुलिस ने तकनीकी, डिजिटल और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल की, तो गिरोह के मुख्य संचालक तक पहुंचने में सफलता मिली। इस कड़ी में नासिक जिले के निवासी 35 वर्षीय राहुल गोपाल पाटील को गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच के अनुसार, राहुल इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट का एक बेहद महत्वपूर्ण ऑपरेटर है, जिसकी सीधी भूमिका जाली दस्तावेज बनवाने, उन्हें हासिल करने और आगे पहुंचाने में रही है। इससे पहले भी राज्य में परीक्षाओं में धांधली को लेकर कड़े कदम उठाए गए थे, जैसे महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में पुलिस ने आरोपपत्र में नामजद सभी 18 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
पंद्रह से बीस छात्रों के लिए तैयार कराए गए थे फर्जी स्कोरकार्ड
प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने करीब 15 से 20 आवेदकों के लिए फर्जी परीक्षा स्कोरकार्ड, अंकतालिकाएं, प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए थे। इन जाली कागजातों को मुहैया कराने के बदले आरोपियों ने आवेदकों से कथित तौर पर मोटी रकम वसूली थी। महाराष्ट्र साइबर की टीम अब इस पूरे नेटवर्क के हर पहलू की तहकीकात कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी दस्तावेजों को मूल रूप से किसने डिजाइन और प्रिंट किया, इन्हें किन डिजिटल माध्यमों या एजेंटों के जरिए भेजा गया, काउंसिल के समक्ष किसने पेश किया और किन-किन लोगों ने इनका उपयोग कर प्रैक्टिस शुरू करने की कोशिश की। इसके लिए आरोपियों के बैंक खातों के लेन-देन, जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों, कॉल और मैसेजिंग रिकॉर्ड तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि रैकेट के पूरे दायरे और इससे जुड़े अन्य लोगों का पर्दाफाश हो सके।
महाराष्ट्र साइबर की विदेशी मेडिकल स्नातकों को सख्त चेतावनी
इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद महाराष्ट्र साइबर ने विदेश से मेडिकल की डिग्री लेकर आने वाले सभी छात्रों और पेशेवर पंजीकरण के लिए आवेदन करने वालों से अपील जारी की है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि हर अभ्यर्थी को निर्धारित कानूनी और नियामक प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन करना चाहिए। पुलिस ने आगाह किया है कि अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा से बचने या जाली कागजात के जरिए डॉक्टर का पंजीकरण हासिल करने के लिए किसी भी बिचौलिए, दलाल या अवैध सिंडिकेट के झांसे में न आएं। महाराष्ट्र साइबर ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि फर्जी दस्तावेज जमा करने या डिजिटल प्रणालियों के साथ छेड़छाड़ कर अवैध पंजीकरण हासिल करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी ने दोहराया कि डिजिटल गवर्नेंस और पेशेवर नियामक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए साइबर अपराध, जालसाजी और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।



















