राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में राशमी थाना पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने साझा अभियान चलाकर एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर की जान लेने की बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया। पुलिस टीमों ने घेराबंदी करते हुए वारदात की फिराक में जुटे छह हथियारबंद आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए बदमाशों के पास से भारी मात्रा में असलहा, धारदार हथियार और दो चार पहिया गाड़ियां जब्त की गई हैं। इस त्वरित पुलिस कार्रवाई से क्षेत्र में दो गुटों के बीच सुलग रही खूनी गैंगवार की बड़ी घटना टल गई।
हथियार और दो गाड़ियां जब्त, गुजरात से जुड़े तार
पुलिस पड़ताल के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों में राशमी के स्थानीय निवासी राहुल खटीक और राहुल कीर शामिल हैं। इनके अलावा चार अन्य आरोपी अजय भरवाड़, चिराग यादव, फैजान उस्मानी और काना रविन्द्र गुजरात के सूरत शहर के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस को खुफिया तंत्र से सटीक सूचना मिली थी कि बाहरी और स्थानीय बदमाशों का यह गठजोड़ इलाके के एक हिस्ट्रीशीटर पर जानलेवा हमला करने की फिराक में है। सूचना पुख्ता होते ही पुलिस बल ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर सभी छह आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
तलाशी लेने पर आरोपियों के कब्जे से एक अवैध देशी कट्टा, एक रिवॉल्वर, चार जिंदा कारतूस तथा कई धारदार हथियार बरामद किए गए। इसके साथ ही वारदात को अंजाम देने के मकसद से लाई गई एक क्रेटा और एक स्विफ्ट कार को भी पुलिस ने मौके पर जब्त कर लिया। जांच अधिकारी अब यह कड़ियां जोड़ने में लगे हैं कि इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए हथियारों और दोनों गाड़ियों का इस्तेमाल किस रणनीति के तहत किया जाना था।
सूरत में कारोबारी का अपहरण और पुलिस पर गोलीबारी का इतिहास
पकड़े गए गिरोह के सदस्यों की शुरूआती जांच में कई चौंकाने वाले आपराधिक कारनामों का खुलासा हुआ है। इस गिरोह के सदस्यों पर पूर्व में गुजरात के सूरत शहर में एक बड़े व्यापारी के अपहरण का गंभीर आरोप है। उस वारदात में गिरोह ने कारोबारी को मुक्त करने के एवज में करीब 1 करोड़ रुपये की मोटी फिरौती वसूली थी। इतना ही नहीं, जब वहां की पुलिस ने बदमाशों की घेराबंदी की थी, तब इस गिरोह ने सूरत पुलिस टीम पर भी सीधे गोलियां चला दी थीं। जांच दल अब आरोपियों के पुराने मुकदमों, उनके अंतरराज्यीय नेटवर्क और अन्य साथियों की विस्तृत कुंडली खंगाल रहा है।
16 मुकदमों वाले हिस्ट्रीशीटर पर था निशाना, वर्चस्व की रंजिश
प्रारंभिक पूछताछ के दौरान सामने आया है कि इस सुनियोजित साजिश की मुख्य वजह गिरोहों के बीच इलाके में खुद का दबदबा कायम करने की होड़ थी। जिस व्यक्ति की हत्या की योजना ये आरोपी बना रहे थे, उसका अपना आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा है और उसके खिलाफ विभिन्न पुलिस थानों में 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी आधार पर पुलिस इसे दो आपराधिक सिंडिकेट्स के बीच वर्चस्व की सीधी लड़ाई मानकर तफ्तीश को आगे बढ़ा रही है।
पुलिस प्रशासन ने सभी आरोपियों के विरुद्ध संगठित अपराध की तैयारी और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि इस हत्याकांड की साजिश रचने में पर्दे के पीछे और कौन से मददगार शामिल थे तथा इन बदमाशों को अवैध हथियार किसने मुहैया कराए थे। सूरत और राजस्थान भर में फैले इनके संपर्कों की पड़ताल जारी है और पुलिस का मानना है कि पूछताछ के बाद मामले में कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।



















