नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ राजस्थान में कानून प्रवर्तन तंत्र को उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य पुलिस की विशेष शाखा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने अपने गठन के करीब एक वर्ष के भीतर एक व्यापक अभियान चलाकर 100 बड़े नशा तस्करों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस पूरी मुहिम के दौरान टास्क फोर्स ने अपनी निगरानी और दबिश को केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि देशभर के 12 राज्यों में फैले अपराधियों के ठिकानों पर सीधी कार्रवाई की। इस विशेष अभियान में पकड़े गए अपराधियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो दशकों से कानून की नजरों से बचकर लगातार अपने अवैध धंधे का संचालन कर रहे थे।
12 राज्यों में फैला अभियान और 27 लाख रुपये के इनामी अपराधी
ANTF के महानिरीक्षक विकास कुमार के अनुसार, नशा तस्करी की जड़ें किसी एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं होतीं, इसलिए जांच एजेंसी ने देशव्यापी रणनीति पर काम किया। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक विभिन्न राज्यों में स्थानीय सुरागों और तकनीकी निगरानी के आधार पर धरपकड़ की गई। राजस्थान में अपराध करने के बाद जो तस्कर दूसरे राज्यों में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे, उन्हें चिह्नित कर गिरफ्तार किया गया। इस तरह का अंतरराज्यीय समन्वय उन अपराधियों के लिए कड़ा संदेश बना जो सीमाओं का फायदा उठाकर कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश में थे।
गिरफ्तार किए गए इन 100 आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि काफी संगीन रही है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इन सभी पर संयुक्त रूप से 27 लाख रुपये से ज्यादा का नकद इनाम घोषित था। पकड़े गए तस्करों में ऐसे अपराधी भी थे जिन पर 25 हजार रुपये का इनाम था, जबकि कुछ कुख्यात मामलों में आरोपियों पर लाखों रुपये का इनाम रखा गया था। यह तथ्य साबित करता है कि ANTF ने केवल जमीनी स्तर पर नशा बेचने वाले छोटे प्यादों को ही नहीं पकड़ा, बल्कि सिंडिकेट के उन बड़े चेहरों पर हाथ डाला जिनकी तलाश पुलिस रिकॉर्ड में वर्षों से दर्ज थी।
जालोर और बाड़मेर के संवेदनशील इलाकों में ताबड़तोड़ कार्रवाई
राजस्थान के सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इस पूरी मुहिम में पश्चिमी राजस्थान के दो प्रमुख जिले जालोर और बाड़मेर विशेष रूप से केंद्र में रहे। जालोर से पुलिस टीम ने 12 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया, जबकि बाड़मेर जिले से 11 तस्करों को पकड़ा गया। ये वे क्षेत्र हैं जहां से मादक पदार्थों की आवाजाही और स्थानीय स्तर पर उनके भंडारण की गतिविधियां अक्सर कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनती रही हैं।
इन दोनों जिलों से हुई 23 गिरफ्तारियों ने स्थानीय नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। पकड़े गए व्यक्तियों में से कई आरोपी पुलिस की लगातार दबिश के कारण नियमित रूप से अपने ठिकाने बदल रहे थे। ANTF की स्थानीय खुफिया इकाइयों और क्षेत्रीय टीमों ने सटीक सूचनाएं जुटाकर इन फरार आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी और सही समय पर उन्हें दबोचने में सफलता प्राप्त की।
दो दशकों से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड
इस एक साल के अभियान का सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि इसमें 20 साल से ज्यादा समय से फरार चल रहे तस्करों को भी पकड़ा गया। दो दशक पहले दर्ज हुए मामलों के बाद जो अपराधी अपनी पहचान बदलकर सामान्य जीवन जीने या पर्दे के पीछे से नशीले पदार्थों का नेटवर्क चलाने में जुटे थे, उनकी फाइलें दोबारा खोली गईं। पुराने मुकदमों की बारीकी से पड़ताल की गई और तकनीकी व मानवीय इनपुट के जरिए इन पुराने वांछित अपराधियों तक पहुंचा गया।
इसके साथ ही, पकड़े गए 100 आरोपियों में से 15 अपराधी ऐसे हैं जिनके खिलाफ पहले से 10-10 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे आदतन अपराधियों का पकड़ा जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इनका सीधा जुड़ाव नशे के बड़े सिंडिकेट्स, सप्लायर्स और वितरण नेटवर्क से रहा है। इनके पकड़े जाने से पुलिस को मादक पदार्थों के परिवहन के पारंपरिक रास्तों, हवाला लेनदेन और वित्तीय स्रोतों को समझने में भी अहम जानकारियां मिल रही हैं।
सप्लाई चेन तोड़ने और नेटवर्क ध्वस्त करने पर जोर
महानिरीक्षक विकास कुमार ने स्पष्ट किया है कि ANTF का यह अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में भी नशे के अवैध कारोबार में सक्रिय सिंडिकेट्स के खिलाफ कार्रवाई पूरी ताकत से जारी रहेगी। कार्यबल की प्राथमिक रणनीति नशे की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ध्वस्त करने की है, जिसमें स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने वाले हर स्तर पर प्रहार किया जा रहा है।
गठन के पहले ही वर्ष में 12 राज्यों में की गई कार्रवाइयों, 100 बड़ी गिरफ्तारियों और 27 लाख रुपये से अधिक के इनामी तस्करों को पकड़ने से लंबित मामलों की जांच में भी तेजी आई है। अब ANTF की टीमें इन गिरफ्तारियों से मिले सुरागों के आधार पर फरार चल रहे अन्य सहयोगियों और बैकवर्ड व फॉरवर्ड लिंकेज की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं, ताकि इस अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त किया जा सके।





















