भारतीय सिनेमा जगत की सबसे प्रमुख संस्था केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड में बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने इस बोर्ड का नए सिरे से गठन कर दिया है जिसकी कमान पूर्व प्रसार भारती प्रमुख शशि शेखर वेम्पटि को सौंपी गई है। इस नई समिति में देश भर से सिनेमा और कला जगत के अठारह नामचीन चेहरों को जगह दी गई है। यह नया सेंसर बोर्ड पैनल तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और अगले तीन साल या अगले आदेश तक अपनी सेवाएं देगा। इस बदलाव के तहत बॉलीवुड के साथ-साथ क्षेत्रीय सिनेमा के कई जाने-माने कलाकारों और निर्देशकों को इस पैनल में शामिल किया गया है।
नई सेंसर बोर्ड टीम में मनोरंजन जगत की कई जानी-पहचानी हस्तियों को शामिल किया गया है। सूची में प्रीति जिंटा, मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, पल्लवी जोशी, बंगाली सिनेमा के दिग्गज प्रसेनजीत चटर्जी, लोकप्रिय टेलीविजन अभिनेत्री रुपाली गांगुली, जाने-माने निर्देशक प्रियदर्शन और तीन बार ग्रैमी पुरस्कार जीत चुके संगीतकार रिकी केज का नाम शामिल है। इसके अलावा राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार नीला माधब पांडा, अभिनेता मनोज जोशी, गुजराती सिनेमा के निर्माता अभिषेक जैन, तेलुगु फिल्म निर्माता सुप्रिया यारलागड्डा, प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम, जाने-माने कवि और लेखक यतींद्र मिश्रा, अभिनेत्री निशिगंधा वाड और गायक व पूर्व सांसद हंसराज हंस को भी इस बोर्ड का सदस्य बनाया गया है।
दिलचस्प पहलू यह है कि पुरानी समिति में से केवल दो सदस्यों को ही इस नई सूची में स्थान मिला है। इनमें निर्देशक वामन केंद्रे और वरिष्ठ लेखक रमेश पतंगे के नाम शामिल हैं, जिन्हें नए बोर्ड में भी बरकरार रखा गया है। बोर्ड की कमान संभालने के तुरंत बाद शशि शेखर वेम्पटि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने सभी नए सदस्यों का स्वागत करते हुए अपनी खुशी जाहिर की और नए पैनल को बधाई दी।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब कुछ समय पहले ही बोर्ड की एक अहम उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस हाई-लेवल मीटिंग में फिल्मों के सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने तथा रिवाइजिंग कमेटी से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबित मामलों पर गंभीर चर्चा हुई थी। जानकारों के अनुसार सेंसर बोर्ड का यह पुनर्गठन बेहद खास समय पर हुआ है क्योंकि नियमों के मुताबिक बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन वर्ष 2017 के बाद से पूरे नौ सालों तक बोर्ड का आधिकारिक तौर पर पुनर्गठन नहीं किया गया था। इस प्रकार काफी लंबे अंतराल के बाद सेंसर बोर्ड को नई टीम मिली है।
बता दें कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड भारत सरकार के अंतर्गत काम करने वाली वह सर्वोच्च संस्था है जो देश भर के सिनेमाघरों और विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर प्रदर्शित होने वाली फिल्मों की जांच करती है और उन्हें सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्त प्रमाण पत्र जारी करती है। यह बोर्ड सिनेमेटोग्राफ एक्ट और उसके तमाम तय नियमों तथा दिशा-निर्देशों के तहत ही फिल्मों को यू, यू/ए या फिर ए श्रेणी में प्रमाणित करने की जिम्मेदारी निभाता है ताकि दर्शकों तक सही सामग्री पहुंच सके।



















