इन दिनों खेतों में बाजरे की फसल की कटाई का काम जोरों पर चल रहा है और किसान लगातार अपनी फसल समेटने में लगे हुए हैं। कटाई के इस अहम चरण के दौरान कुछ बुनियादी सावधानियां बरतने से न केवल उत्पाद की गुणवत्ता बेहतरीन बनी रहती है, बल्कि दानों को खराब होने से भी पूरी तरह बचाया जा सकता है। कृषि जानकारों के अनुसार किसानों को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बाजरे की बालियां पूरी तरह पक जाएं और दानों में पर्याप्त सूखापन आ जाए, तभी कटाई का काम शुरू किया जाए। यदि कटाई में जल्दबाजी की जाती है, तो दानों में नमी की मात्रा अधिक रह जाती है, जिससे आगे चलकर जब फसल का भंडारण किया जाता है तो उसके सड़ने या खराब होने का भारी जोखिम पैदा हो जाता है।
कटाई के समय मौसम और सफाई का रखें खास ख्याल
फसल की कटाई के दौरान खेत में आसपास के मौसम पर भी कड़ी नजर रखना बेहद जरूरी होता है। यदि आसमान में बारिश की संभावना नजर आए तो कटाई टाल देनी चाहिए और यदि फसल पहले ही काटी जा चुकी है तो उसे खुले आसमान के नीचे ज्यादा देर तक बिल्कुल न छोड़ें। बालियों को धूप में अच्छी तरह सुखाने के बाद ही उनमें से दाने अलग करने का काम करना चाहिए। यदि इसके बावजूद दानों में नमी ज्यादा महसूस हो, तो उन्हें धूप में अच्छी तरह फैलाकर सुखाना आवश्यक है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जब कटाई और मड़ाई का काम चल रहा हो, तो फसल में मिट्टी, कचरा, अवांछित खरपतवार के बीज और अन्य किसी भी प्रकार की बाहरी सामग्री न मिलने पाए।
भंडारण से पहले दानों की सफाई और सुखाने की प्रक्रिया
कटाई का काम पूरा होने के बाद बाजरे को गोदाम या घर में रखने से पहले बेहद अच्छी तरह साफ करके सुखाना जरूरी होता है। दानों को तब तक लगातार धूप में सुखाते रहना चाहिए जब तक उनकी अतिरिक्त नमी पूरी तरह खत्म न हो जाए। इसके बाद इस साफ फसल को सूखे हुए बोरों या फिर उपयुक्त भंडारण कंटेनरों के अंदर सुरक्षित भर देना चाहिए। जिस जगह पर भी फसल का भंडारण किया जाना है, वह जगह पूरी तरह साफ, सूखी और हवादार होनी चाहिए ताकि हवा का संचार बना रहे। बाजरे की बोरियों को सीधे ठंडे या नम फर्श पर रखने के बजाय लकड़ी के पट्टों या किसी ऊंचे स्थान पर रखना ज्यादा फायदेमंद रहता है, जिससे जमीन की नमी बोरों तक न पहुंच सके।
कीड़ों और सीलन से बचाव के लिए नियमित निगरानी
भंडारण की पूरी अवधि के दौरान किसानों को समय-समय पर अपने बाजरे के स्टॉक की जांच करते रहना चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर दानों के अंदर नमी, फफूंद, अजीब सी बदबू या फिर कीड़े पनपते हुए दिखाई दें, तो उन प्रभावित दानों को तुरंत मुख्य फसल से अलग कर देना चाहिए। खासकर बरसात के मौसम में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि भंडारण वाली जगह के आसपास पानी जमा न हो और न ही वहां किसी प्रकार की सीलन पैदा हो सके। पुराने अनाज को कभी भी नए अनाज के साथ मिलाकर नहीं रखना चाहिए, बल्कि दोनों को हमेशा अलग-अलग स्थानों पर स्टोर करना चाहिए। इसके अलावा, भंडारण के लिए जिन बोरों और कमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें भी पहले से अच्छी तरह साफ और रोगामुक्त कर लेना चाहिए।
लंबी अवधि तक फसल की गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय
किसानों के लिए बाजरे की कटाई के बाद सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यही है कि वे फसल को पूरी तरह सुखाने के बाद ही उसका भंडारण करें। कटाई के वक्त केवल पूरी तरह पकी हुई फसल का चुनाव करें, उसे बारिश और नमी से बचाकर रखें तथा मड़ाई का काम पूरा होने के बाद दानों की बेहतरीन तरीके से सफाई करें। इन सभी वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीकों से फसल को सुखाने और एक सूखी जगह पर रखने से बाजरे की गुणवत्ता लंबे वक्त तक सुरक्षित बनी रहती है। ऐसा करने से किसानों को फसल के खराब होने की वजह से होने वाले आर्थिक नुकसान से आसानी से बचाया जा सकता है और उन्हें उनकी मेहनत का पूरा फल मिलता है।



















