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चेन्नई के पोएस गार्डन में रहने वाले दिग्गज अभिनेता मोहन शर्मा पहुंचे वृद्धाश्रम, दवाइयों के खर्च के लिए फिल्म जगत से मांगी मददमनोरंजन
31 जुल॰ 2026, 5:38 pm (7 घंटे पहले)· 0

चेन्नई के पोएस गार्डन में रहने वाले दिग्गज अभिनेता मोहन शर्मा पहुंचे वृद्धाश्रम, दवाइयों के खर्च के लिए फिल्म जगत से मांगी मदद

साउथ सिनेमा के बहुमुखी कलाकार और निर्देशक मोहन शर्मा 80 वर्ष की उम्र में गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। तमिलनाडु के गुमिदिपुंडी स्थित वृद्धाश्रम में रह रहे अभिनेता ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं और दवाइयों के खर्च के लिए सहायता की अपील की है।

दक्षिण भारतीय सिनेमा में दशकों तक अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय देने वाले वरिष्ठ अभिनेता, निर्देशक और पटकथा लेखक मोहन शर्मा आज जीवन के 80वें पड़ाव पर बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। कभी चेन्नई के सबसे महंगे और चर्चित इलाकों में गिने जाने वाले पोएस गार्डन में रहने वाले मोहन शर्मा को आज बुढ़ापे से जुड़ी बीमारियों के इलाज और दैनिक दवाइयों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। फिल्मों में अभिनय के साथ-साथ निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले इस वरिष्ठ कलाकार को अपनी बुनियादी चिकित्सा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए फिल्म उद्योग और सहकर्मियों से आर्थिक मदद की गुहार लगानी पड़ रही है।

पोएस गार्डन के आलीशान निवास से वृद्धाश्रम तक की कठिन यात्रा

एक दौर वह था जब मोहन शर्मा का ठिकाना चेन्नई का पोएस गार्डन हुआ करता था। यह वही पॉश इलाका है जहाँ दक्षिण भारतीय सिनेमा के महानायक रजनीकांत, अभिनेता धनुष और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता जैसे दिग्गजों के आवास स्थित हैं। हालाँकि, समय के साथ जीवन में आई भीषण आर्थिक तंगी और घरेलू उलझनों के कारण उन्हें अपना वह प्रतिष्ठित घर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। गृह विहीन होने और देखरेख करने वाला कोई निकट संबंधी न होने की स्थिति में उन्होंने अपने उन पुराने मित्रों से संपर्क साधा जो रोटरी क्लब के सदस्य थे। रोटरी क्लब के दोस्तों के सहयोग से उन्हें तमिलनाडु के गुमिदिपुंडी स्थित एक जैन वृद्धाश्रम में आश्रय प्राप्त हुआ। इस ओल्ड एज होम में उन्हें भोजन और रहने की छत तो मिल गई है, लेकिन उम्र संबंधी बीमारियों से निपटने के लिए आवश्यक दवाइयां खरीदने का बजट उनके पास पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

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साउथ सिनेमा के बहुमुखी दिग्गज और एफटीआईआई के अग्रदूत

केरल के पलक्कड़ जिले में जन्मे मोहन शर्मा के नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अनूठी उपलब्धि दर्ज है। वह महाराष्ट्र के पुणे स्थित प्रतिष्ठित 'फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया' (एफटीआईआई) से स्नातक करने वाले पहले दक्षिण भारतीय छात्र थे। एफटीआईआई से सिनेमा की औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने 1970 के दशक में तमिल और मलयालम सिनेमा के पर्दे पर कदम रखा। अपनी प्रभावी अभिनय शैली के बल पर उन्होंने जयशंकर, शिवाजी गणेशन, विजयकांत, सरथकुमार, प्रशांत, अजित कुमार और विजय जैसे तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं के साथ स्क्रीन साझा की। उन्होंने अपने लंबे करियर के दौरान तमिल और मलयालम के अतिरिक्त तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी भाषा की अनगिनत फिल्मों में विविध भूमिकाएं निभाईं।

बहुआयामी करियर, राष्ट्रीय पुरस्कार जूरी और धारावाहिकों की सफलता

मोहन शर्मा केवल एक सक्षम अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने पटकथा लेखन, फिल्म निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी कलात्मक छाप छोड़ी। सिनेमा में उनके अनुभव और तकनीकी समझ का सम्मान करते हुए उन्हें तीन बार प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की जूरी समिति का सदस्य भी मनोनीत किया गया। जब समय के साथ बड़े पर्दे पर मुख्य भूमिकाएं मिलना कम हुईं, तो उन्होंने सहजता से टेलीविजन माध्यम का रुख किया और वहां भी सफलता के नए आयाम स्थापित किए। उन्होंने 'कोलांगाल', 'मुंथनाई मुदिचु', 'वाणी रानी', 'माया' और 'थलट्टू' जैसे बेहद लोकप्रिय धारावाहिकों में महत्त्वपूर्ण चरित्र निभाकर घर-घर में पहचान बनाई। इसके अतिरिक्त वर्ष 2012 में उन्होंने 'नम्मा ग्रामम' नामक प्रशंसित तमिल फिल्म का निर्देशन और निर्माण किया, जिसे अपनी उत्कृष्ट कहानी और कलात्मकता के लिए तमिलनाडु तथा केरल राज्य सरकारों द्वारा प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

व्यक्तिगत जीवन के उतार-चढ़ाव और रजनीकांत की ओर से मिली तात्कालिक मदद

पेशेवर उपलब्धियों के बावजूद मोहन शर्मा का व्यक्तिगत जीवन काफी उथल-पुथल और मुश्किलों से भरा रहा। अपनी पहली ही फिल्म की सह-कलाकार प्रसिद्ध अभिनेत्री लक्ष्मी के साथ उन्हें प्रेम हुआ और दोनों ने विवाह कर लिया। हालाँकि, यह वैवाहिक संबंध अधिक समय तक नहीं चल सका और पांच वर्षों के भीतर दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने शांति नाम की महिला से दूसरा विवाह किया, परंतु आर्थिक विषमताओं और पारिवारिक संकटों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। जब उनकी वर्तमान आर्थिक तंगी और दयनीय स्थिति की जानकारी सुपरस्टार रजनीकांत तक पहुंची, तो रजनीकांत ने त्वरित सहायता के रूप में 1 लाख रुपये की राशि भेजी। इस सहायता से मोहन शर्मा को अपने तात्कालिक दैनिक खर्चों को संभालने में बहुत राहत मिली।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात की उम्मीद

अपनी आर्थिक बदहाली से उबरने के प्रयास में मोहन शर्मा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात करने की इच्छा जताई है। उल्लेखनीय है कि मोहन शर्मा ने विजय के साथ ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सचिन' में काम किया था, जिसमें उन्होंने मुख्य अभिनेत्री जेनेलिया डिसूजा के किरदार के पिता की भूमिका निभाई थी। मोहन शर्मा को उम्मीद है कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का अवसर मिलता है, तो वह उनके समक्ष अपनी परिस्थितियां रखकर दोबारा फिल्मों में छोटी-मोटी भूमिकाएं करने का अवसर मांग सकेंगे, ताकि वह सम्मानपूर्वक अपना जीविकोपार्जन कर सकें।

फिल्म चैंबर के नियमों में बदलाव और उपेक्षित प्रस्ताव की दास्तान

मोहन शर्मा दक्षिण भारतीय सिनेमा की शीर्ष संस्था 'साउथ इंडियन फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स' के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जब वह चैंबर के प्रेसिडेंट थे, तब उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण कल्याणकारी प्रस्ताव पारित कराया था। उस प्रस्ताव के तहत वृद्धावस्था, बीमारी या आर्थिक तंगी झेल रहे किसी भी वरिष्ठ कलाकार को सहायता स्वरूप 5 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया था। हाल ही में जब उन्होंने अपनी लाचारी का हवाला देते हुए इसी नियम के तहत आर्थिक मदद के लिए पत्र लिखा, तो चैंबर की ओर से सूचित किया गया कि अब उस प्रस्ताव के नियमों में संशोधन कर दिया गया है। नए नियम के अनुसार यह वित्तीय राशि केवल किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात ही प्रदान की जाती है। मोहन शर्मा ने व्यथित होकर सवाल उठाया कि जब कोई कलाकार जीवित रहकर कष्ट सह रहा है, तब उसकी सहायता क्यों नहीं की जाती और मृत्यु के बाद मिलने वाले पैसे का क्या औचित्य है, परंतु उन्हें इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिला।

सैटेलाइट अधिकारों की अधूरी योजना और भावी कलाकारों के लिए संदेश

अपनी लाचारी को दूर करने के लिए मोहन शर्मा ने अपनी पुरस्कार विजेता फिल्म 'नम्मा ग्रामम' का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने जया टीवी के माध्यम से इस फिल्म के सैटेलाइट अधिकार खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन उनके आकस्मिक निधन के कारण वह व्यावसायिक सौदा अंतिम रूप नहीं ले सका। उन्होंने अपील की है कि यदि आज भी कोई नेटवर्क या डिजिटल प्लेटफॉर्म 'नम्मा ग्रामम' के सैटेलाइट या स्ट्रीमिंग अधिकार खरीद लेता है, तो उससे मिलने वाली राशि से वह अपने शेष जीवन की दवाइयों का खर्च आसानी से उठा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म उद्योग में काम करने वाले नए और वर्तमान कलाकारों को भावुक सलाह दी कि वे केवल अच्छी फिल्में बनाने के जुनून में अपनी वित्तीय सुरक्षा को दांव पर न लगाएं और अपने पैसों का प्रबंधन समझदारी से करें, ताकि बुढ़ापे में उन्हें ऐसी कठिन परिस्थितियों से न गुजरना पड़े।

सवाल-जवाब

मोहन शर्मा कौन हैं और उन्होंने किन क्षेत्रों में काम किया है?
मोहन शर्मा दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक हैं। उन्होंने तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम किया है।
मोहन शर्मा वर्तमान में कहाँ रह रहे हैं?
80 वर्षीय मोहन शर्मा वर्तमान में तमिलनाडु के गुमिदिपुंडी में स्थित एक जैन वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।
सुपरस्टार रजनीकांत ने मोहन शर्मा की क्या मदद की?
अभिनेता की आर्थिक तंगी की खबर मिलने पर सुपरस्टार रजनीकांत ने उनके त्वरित खर्चों के लिए 1 लाख रुपये की सहायता राशि भेजी।
मोहन शर्मा की फिल्म 'नम्मा ग्रामम' से जुड़ा मामला क्या है?
2012 में बनी उनकी पुरस्कार विजेता फिल्म 'नम्मा ग्रामम' के सैटेलाइट अधिकार जया टीवी द्वारा खरीदे जाने थे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के कारण सौदा पूरा नहीं हो सका।
मोहन शर्मा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से क्या अपील की है?
मोहन शर्मा ने मुख्यमंत्री विजय से मिलने की इच्छा व्यक्त की है ताकि वे अपनी स्थिति बताकर फिल्मों में अभिनय का एक और अवसर मांग सकें।
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