बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर खुलकर अपने विचार रखे। इस वीडियो में उन्होंने अपनी सहमति और असहमति के बिंदुओं पर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्द कहने वाली नोएडा की लड़की और अन्य युवाओं के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया। हालांकि, उनका यह वीडियो अभिनेत्री को काफी भारी पड़ गया और इंटरनेट पर लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई, जहां कई यूजर्स ने उनसे असहमति जताई तो कइयों ने उनकी फिल्मों में परोसी जाने वाली संस्कृति और बोल्ड सीन्स का हवाला देकर उन पर जमकर निशाना साधा।
छात्र आंदोलन और मांगों पर अभिनेत्री का पक्ष
वीडियो की शुरुआत में भूमि पेडनेकर ने जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उसके खत्म होने के बाद के हालातों पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और उनकी मांगों के कई पहलुओं से वह सहमत हैं, क्योंकि देश की तरक्की और छात्रों को सही न्याय मिलना हम सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक के बाद जब छात्रों ने आत्महत्या जैसे चरम कदम उठाए, तो उनका दिल भी यह सब देखकर पसीज गया था। हालांकि, उनका मुख्य तर्क यह था कि आज के युवा पढ़े-लिखे हैं और विदेशों से शिक्षा प्राप्त करके लौट रहे हैं, इसलिए उन्हें अपनी वाजिब मांगों और सलाह को अधिक शालीन तरीके से आगे रखना चाहिए था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक जैसे ठोस सुझाव क्यों नहीं दिए गए, जबकि अब एंटी पेपर लीक बिल 2026 भी पास हो चुका है।
पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्द और संस्कृति पर सवाल
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेत्री ने जंतर मंतर पर हुए सीजेपी के प्रोटेस्ट के दौरान सामने आए कुछ चौंकाने वाले वीडियो का जिक्र किया और उस पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा कि आखिर हमारे देश के युवाओं की भाषा इतनी आपत्तिजनक और गिरती हुई कब और कैसे हो गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या हम अपने घर के बुजुर्गों और बड़ों के साथ भी इतनी अभद्रता से बात करते हैं और क्या यही हमारी संस्कृति है। उनका मानना था कि देश को आगे ले जाने के लिए हम सबको एकजुटता के साथ आगे बढ़ना होगा। भूमि ने इस वीडियो में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अपने तर्क रखे, लेकिन सोशल मीडिया पर बैठी जनता को उनका यह अंदाज रास नहीं आया।
सोशल मीडिया पर यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं और ट्रोलिंग
भूमि पेडनेकर के इस वीडियो के सामने आते ही कमेंट सेक्शन में आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया। कई यूजर्स ने उनके बयानों पर पलटवार करते हुए लिखा कि वातानुकूलित कमरों यानी एसी में बैठकर दूसरों को ज्ञान देना बहुत आसान होता है। एक यूजर ने लिखा कि यह देखकर थोड़ा अच्छा लगा कि उन्होंने कम से कम इस तरह की भाषा पर अपनी राय रखी, लेकिन सवाल यह है कि जब खुद मंत्री और नेता ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं तब उनकी संस्कृति कहां जाती है। एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि भूमि दिमाग से घूमी हैं, जबकि एक अन्य ने यहां तक कह दिया कि इससे तो बेहतर होता कि वह इस मामले पर पूरी तरह चुप ही रहतीं। इसके अलावा, लोगों ने उनके पुराने बयानों और हालिया धार्मिक यात्राओं का जिक्र करते हुए भी उन्हें घेरा, जैसे कि जब वह शिवलिंग पर जल चढ़ाते वक्त चश्मा नहीं उतारने को लेकर पहले ही ट्रोल हो चुकी थीं और लोगों ने कहा था कि हद है मैडम जी।
लाठीचार्ज और फिल्मों में फूहड़ता पर उठे सवाल
ट्रोलर्स ने भूमि पेडनेकर को यह भी याद दिलाया कि आखिर वह तब कहां थीं जब अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतरे युवाओं पर पुलिस द्वारा लाठियां और टियर गैस के गोले छोड़े जा रहे थे। कुछ यूजर्स ने तो यहां तक आरोप लगाया कि अभिनेत्री का यह वीडियो किसी के इशारे पर प्रायोजित यानी पेड हो सकता है, हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि उन्होंने काफी संतुलित तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की है। एक यूजर ने तीखा सवाल पूछते हुए लिखा कि जब युवा किसी वास्तविक और गंभीर मुद्दे पर विरोध दर्ज कराते हैं, तब अचानक लोगों को भारतीय संस्कृति की चिंता सताने लगती है, लेकिन जब फिल्मों के अंदर फूहड़ता और बोल्ड सीन परोसे जाते हैं, तब यह सामाजिक जिम्मेदारी और संस्कृति कहां गायब हो जाती है?



















