डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI का दायरा जितनी तेजी से बढ़ा है, उतनी ही तेजी से फर्जी सामग्री, क्लोन आवाज और छेड़छाड़ किए गए चेहरों का खतरा भी गहराने लगा है। सोशल मीडिया के इस दौर में मशहूर हस्तियों के ऐसे वीडियो तैयार कर लिए जाते हैं, जिनकी उन्होंने कभी शूटिंग तक नहीं की होती। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए अपनी आगामी फिल्म ‘राणाबाली’ के सिनेमाघरों में आने से कुछ दिन पहले अभिनेता विजय देवरकोंडा ने दिल्ली हाईकोर्ट की शरण ली। अभिनेता ने अपनी पहचान, छवि और गरिमा के व्यावसायिक व अनधिकृत दुरुपयोग के खिलाफ न्यायिक दखल की मांग की थी। मामले पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए अदालत ने उनकी व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा में अहम अंतरिम फैसला सुनाया है।
व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा पर अदालत का सख्त रुख
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विकास महाजन ने निर्देश जारी किया कि अभिनेता की पूर्व सहमति के बिना उनके नाम, चेहरे, आवाज या अन्य निजी विशिष्टताओं का किसी भी रूप में उपयोग न किया जाए। अदालत ने मेटा, गूगल और एक्स जैसी प्रमुख इंटरनेट कंपनियों को साफ तौर पर आदेश दिया कि वे याचिकाकर्ता द्वारा चिह्नित की गई उन सभी पोस्ट, वीडियो, रील्स, अकाउंट और चैनलों को स्थायी रूप से हटा दें जो कथित तौर पर उनकी नकल करते हैं या उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल करते हैं। अदालत का मानना था कि किसी भी कलाकार की पहचान और छवि पर उसका अपना वैध अधिकार होता है, जिसे व्यावसायिक लाभ या भ्रामक प्रचार के लिए रौंदा नहीं जा सकता।
72 घंटे के भीतर डिजिटल सामग्री हटाने की स्पष्ट समय-सीमा
अदालत ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और अन्य संबंधित पक्षों को आदेशित सामग्री पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए 72 घंटे की कड़ी समय-सीमा तय की है। इसके तहत ऑनलाइन मार्केटप्लेस को अदालती आदेश की प्रति प्राप्त होने के 72 घंटे के भीतर संबंधित लिंक हटाने होंगे। इसी अवधि के भीतर डोमेन नेम रजिस्ट्रार को भी उन वेबसाइट डोमेन को लॉक और सस्पेंड करने के लिए कहा गया है जो अभिनेता के नाम या पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस न्यायिक आदेश का दायरा केवल सामान्य नाम और चेहरे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ‘विजय देवरकोंडा’, ‘विजय देवराकोंडा’, ‘विजय साई देवरकोंडा’ और उनके नाम के संक्षिप्त शुरुआती अक्षर ‘वीडी’ तक को पूरी कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है।
वेबसाइट ब्लॉकिंग, मंत्रालय का दायित्व और कानूनी संतुलन
फैसले के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित मंत्रालय को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय को इंटरनेट और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को यह सुनिश्चित करने का आदेश देना होगा कि आदेश में दर्ज वेबसाइटों तक पहुंच को 72 घंटे के भीतर ब्लॉक या समाप्त किया जाए। इसके साथ ही सभी संबंधित पक्षों को अदालत में अपनी अनुपालन रिपोर्ट के रूप में दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करना अनिवार्य किया गया है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान रेखांकित किया कि विजय देवरकोंडा ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों के हनन को लेकर एक बेहद मजबूत कानूनी पक्ष प्रस्तुत किया है और मामले में सुविधा का संतुलन पूरी तरह अभिनेता के पक्ष में है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिनेता की साख और प्रतिष्ठा को होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई केवल आर्थिक मुआवजे से नहीं की जा सकती। अभिनेता ने अपनी याचिका में विशेष रूप से उन AI-जनित वीडियोज पर गहरी चिंता जताई थी, जिनमें उन्हें कथित रूप से अश्लील, भद्दे और बेहद आपत्तिजनक संदर्भों में दर्शाया गया था।


















