ओटीटी रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल 2' के टॉवर में सत्ता का खेल एक नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया है, जहां अल्टीमेट रूलर बने शहजाद पूनावाला के एक कड़े फैसले ने पुराने रिश्तों और समीकरणों को हिलाकर रख दिया। गेम के खास पड़ाव 'फॉल का फरमान' के दौरान शहजाद को यह तय करना था कि टॉवर के शीर्ष पर मौजूद पेंटहाउस में कौन रहेगा और किसे नीचे बेसमेंट में उतरना होगा। इस पूरी प्रक्रिया से पहले ही निहारिका तिवारी अपनी जगह सुरक्षित कर चुकी थीं, जिसके चलते सारा दारोमदार और दबाव शहजाद के फैसलों पर आ टिका था। शहजाद ने जब अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए रूलर्स खेमे के दो मजबूत चेहरों गौतम गुलाटी और राज ग्रोवर को बेसमेंट में भेजने का फरमान सुनाया, तो टॉवर की शांति एकाएक हंगामे में बदल गई। इस अप्रत्याशित कदम ने न केवल पेंटहाउस बल्कि नीचे बेसमेंट में मौजूद वर्कर्स के बीच भी तीखा तनाव पैदा कर दिया।
रेड रूम का फैसला और दरकती दोस्ती
रणनीति का यह पूरा सिलसिला रेड रूम के भीतर से शुरू हुआ। वहां शहजाद पूनावाला के सामने अपनी पहली प्राथमिकता तय करने की चुनौती थी, जहां उन्होंने सबसे पहले तेज प्रताप यादव को सुरक्षित रखने का चुनाव किया। इसके फौरन बाद शहजाद को रूलर्स की दो जोड़ियों में से फैसला करने का सख्त निर्देश मिला, जहां हर प्रतियोगी पेंटहाउस में अपनी जगह बचाने के लिए दलीलें पेश कर रहा था। पहली जोड़ी के रूप में राज ग्रोवर और स्वरा भास्कर ने अपना पक्ष रखा। दोनों की दलीलें सुनने के बाद शहजाद ने राज को नीचे बेसमेंट में भेजने का फैसला किया, जिससे स्वरा ऊपर सुरक्षित रह गईं।
असली नाटकीय मोड़ तब आया जब अगली बारी गौतम गुलाटी और इरीना रुदाकोवा की आई। दोनों ही कंटेस्टेंट्स के साथ दोस्ताना समीकरण होने के बावजूद शहजाद पूनावाला ने इरीना को सुरक्षित करने का मन बनाया और गौतम को बेसमेंट में भेजने का आदेश सुना दिया। इस फैसले ने गौतम को भीतर तक आहत और नाराज कर दिया। रेड रूम का माहौल तुरंत गरमा गया, जहां तेज प्रताप यादव ने खुलकर शहजाद के फैसले के पीछे की नीयत पर सवाल उठाए। वहीं दूसरी तरफ गौतम गुलाटी ने शहजाद पर व्यक्तिगत जलन और असुरक्षा की भावना से ग्रस्त होने का सीधा आरोप लगाया। इस पूरे विवाद के बीच स्वरा भास्कर मजबूती से शहजाद के फैसले के समर्थन में खड़ी नजर आईं। इस तरह जो बातचीत विशुद्ध रणनीतिक चयन के साथ शुरू हुई थी, उसने वफादारी की कठिन परीक्षा का रूप ले लिया और गौतम को यह सोचने पर विवश कर दिया कि शहजाद के साथ उनकी दोस्ती की असलियत क्या है।
बेसमेंट में भिड़ंत और धक्का-मुक्की
रूलर से वर्कर बनकर जब गौतम गुलाटी बेसमेंट में पहुंचे, तो वहां भी उनका स्वागत किसी गर्मजोशी के साथ नहीं हुआ। वर्कर्स के बीच पहले से दबी पुरानी शिकायतें और गिले-शिकवे फिर से उभर आए, जिससे नीचे का माहौल और भारी हो गया। इसके कुछ ही देर बाद शहजाद पूनावाला खुद बेसमेंट में उतरे ताकि वह गौतम के साथ बैठकर बातचीत कर सकें और गलतफहमियों को सुलझा सकें। शहजाद का कहना था कि वह खेल की वजह से अपने व्यक्तिगत रिश्ते को खराब नहीं करना चाहते।
हालात उस वक्त अचानक बेकाबू हो गए जब तेज प्रताप यादव ने एक संभावित रोमांटिक एंगल को लेकर तंज कस दिया। यह टिप्पणी सुनते ही शहजाद अपना आपा खो बैठे और उन्होंने गुस्से में तेज प्रताप को धक्का दे दिया। इस अप्रत्याशित शारीरिक टकराव पर तेज प्रताप बुरी तरह भड़क गए और उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि वह अपनी ऐसी बेइज्जती किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। स्थिति को बिगड़ता देख गौतम गुलाटी ने तुरंत बीच-बचाव किया और दोनों को शांत करने का प्रयास करते हुए स्पष्ट किया कि वह टिप्पणी महज एक हल्के-फुल्के मजाक के तौर पर की गई थी। हालांकि, इस दखल के बावजूद कमरे में तनाव जस का तस बना रहा।
लिफ्ट ऑफ जजमेंट और नॉमिनेशन की आंच
विवादों के इस दौर के बाद खेल आगे बढ़ा और 'लिफ्ट ऑफ जजमेंट' के तहत निष्कासन प्रक्रिया शुरू हुई, जिसका पूरा केंद्र बिंदु बेसमेंट में मौजूद वर्कर्स बन गए। नॉमिनेशन का सिलसिला शहजाद द्वारा शुरू हुआ, जिन्होंने सबसे पहले प्रियंका को सीधे नॉमिनेट कर दिया। नियम के मुताबिक प्रियंका को किसी अन्य वर्कर को इस खतरे में घसीटने का अधिकार मिला, जिस पर उन्होंने गौतम का नाम आगे बढ़ा दिया।
जब दांव चलने की बारी गौतम गुलाटी की आई, तो उन्होंने शुरुआत में राज ग्रोवर का नाम लिया, लेकिन फौरन अपना फैसला बदलते हुए कायरा अनु को नॉमिनेट कर दिया। गौतम का तर्क था कि कायरा ने पहले ही साफ कर दिया था कि उन्हें किसी के एहसान की दरकार नहीं है। नॉमिनेशन की यह जंजीर यहीं नहीं रुकी। कायरा ने बदला लेते हुए तुरंत राज को नॉमिनेट कर दिया, जबकि राज ने इसके जवाब में सारा गुरपाल का नाम ले लिया। राज के इस कदम से काजल राघवानी बेहद नाराज हो गईं और उनके व राज के बीच जोरदार बहस छिड़ गई। पूरी प्रक्रिया खत्म होने तक केवल सारा गुरपाल और मनीष कश्यप ही खुद को पूरी तरह सुरक्षित रख पाए, जबकि बाकी सभी वर्कर्स के सिर पर निष्कासन की तलवार लटकती रह गई।



















