केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के नेय्याट्टिनकारा इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मां ने मोबाइल फोन से जुड़े मामूली विवाद में अपनी छह साल की मासूम बेटी पर गंभीर हमला कर दिया। मोबाइल फोन से मैसेजिंग ऐप्लिकेशन हटने और उसका डेटा दोबारा न मिल पाने की खीझ में महिला ने बच्ची के साथ इतनी बेरहमी से मारपीट की कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल प्रशासन की सतर्कता के बाद पुलिस ने आरोपी मां को हिरासत में ले लिया है, जबकि राज्य के बाल अधिकार निकाय ने भी पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है।
मोबाइल से ऐप हटाने और चैट गायब होने पर भड़की महिला
पुलिस के अनुसार यह पूरी वारदात शुक्रवार की सुबह घटित हुई। घर में मौजूद छह साल की बच्ची ने अपनी मां के मोबाइल फोन से वॉट्सऐप ऐप्लिकेशन को अनइंस्टॉल कर दिया था। जब महिला को इस बात का पता चला, तो उसने दोबारा ऐप डाउनलोड किया। हालांकि, दोबारा इंस्टॉलेशन के बावजूद पुराने मैसेज और बातचीत का बैकअप वापस नहीं आ सका। पुराने संदेश खो जाने की बात से महिला इस कदर आपा खो बैठी कि उसने अपनी ही मासूम बेटी की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी।
परिजनों ने अस्पताल में गढ़ी झूठी कहानी
लगातार पिटाई के कारण छह साल की बच्ची गंभीर रूप से जख्मी हो गई। बच्ची की नाजुक हालत को देखते हुए परिजन उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले गए। अस्पताल पहुंचने पर परिजनों ने मामले को दबाने की कोशिश की और चिकित्सकों को बताया कि बच्ची घर में खेलते समय दुर्घटनावश गिरकर घायल हो गई है। शुरुआत में परिजनों के इस दावे के चलते किसी को भी घर के भीतर हुई क्रूरता का अंदेशा नहीं हुआ।
चिकित्सक के संदेह से खुला घरेलू हिंसा का राज
अस्पताल में इलाज के दौरान बच्ची के शरीर पर उभरे गंभीर घावों और चोटों के निशानों को देखकर ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक को परिजनों की बात पर गहरा संदेह हुआ। उन्हें लगा कि ये चोटें सामान्य खेलकूद या गिरने से नहीं आ सकती हैं। इसके बाद डॉक्टर ने परिजनों को अलग हटाकर बच्ची से अकेले में पूछताछ की। बातचीत के दौरान डरी-सहमी मासूम बच्ची ने पूरी सच्चाई बयां कर दी और बताया कि उसकी अपनी मां ने ही उसे इस कदर पीटा है।
बाल अधिकार आयोग का कड़ा कदम, पुलिस जांच तेज
बच्ची के खुलासे के तुरंत बाद अस्पताल प्रबंधन ने बिना देर किए स्थानीय पुलिस को घटना से अवगत कराया। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और बच्ची की मां को हिरासत में लेकर औपचारिक जांच शुरू कर दी। इस बीच केरलम राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने पारस्साला थाने के प्रभारी और जिला बाल संरक्षण अधिकारी से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण तलब किया है, जिसके बाद इलाके में बच्चों के संरक्षण और घरेलू हिंसा को लेकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।



















