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दीपावली पर भरतपुर के बाजारों में बढ़ी लाख की चूड़ियों की चमक, पारंपरिक श्रृंगार के लिए उमड़ीं महिलाएंराजस्थान
10 अक्तू॰ 2026, 6:28 pm (53 मिनट पहले)· 1

दीपावली पर भरतपुर के बाजारों में बढ़ी लाख की चूड़ियों की चमक, पारंपरिक श्रृंगार के लिए उमड़ीं महिलाएं

दीपावली की तैयारियों के बीच भरतपुर के चूड़ी बाजार में लाख की पारंपरिक चूड़ियों और चूड़ों की भारी मांग देखी जा रही है, जहां महिलाएं पारंपरिक रंगों और डिजाइनों को प्राथमिकता दे रही हैं।

दीपावली का पावन पर्व करीब आते ही भरतपुर के प्रमुख बाजारों में रौनक अपने चरम पर पहुंचने लगी है। शहर के प्रसिद्ध चूड़ी बाजार में इस समय खरीदारी करने वाली महिलाओं की चहल-पहल साफ देखी जा सकती है। त्योहार के मद्देनजर महिलाएं पारंपरिक लाख की चूड़ियों को लेकर खास उत्साह दिखा रही हैं। इन हस्तनिर्मित आभूषणों की विशिष्ट बनावट, मनमोहक रंग संयोजन और लोक संस्कृति से गहरा जुड़ाव इन्हें आज के दौर में भी बेहद खास बनाए हुए हैं। आधुनिक दौर के नए पहनावे के बीच भी पारंपरिक लाख के चूड़ों के प्रति महिलाओं का आकर्षण लगातार बना हुआ है।

दीपावली के श्रृंगार में पारंपरिक आभूषणों का महत्व

रोशनी के इस बड़े पर्व पर नए वस्त्रों के चयन के साथ-साथ पारंपरिक साज-सज्जा की खरीदारी महिलाओं की प्राथमिकताओं में शामिल रहती है। त्योहार के पूरे श्रृंगार में लाख से बने चूड़े सदियों से एक अहम भूमिका निभाते रहे हैं। विशेषकर ग्रामीण आंचल से आने वाली महिलाएं इन चूड़ों को अत्यंत पसंद करती हैं। स्थानीय बाजार में इस समय विविध रंगों, बारीक कलाकृतियों और नए डिजाइनों में उपलब्ध चूड़ियां ग्राहकों को अपनी ओर खींच रही हैं।

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लाल और हरे रंगों के चूड़ों का खास आकर्षण

दुकानों पर त्योहार के माहौल को देखते हुए पारंपरिक लाल और हरे रंगों के चूड़ों की सबसे अधिक मांग बनी हुई है। इसके साथ ही नए जमाने की पसंद को ध्यान में रखते हुए चमकीले व लाइट वर्क वाले डिजाइनों की किस्में भी बाजार में उतारी गई हैं। लाख की चूड़ियों की मुख्य विशेषता उनकी प्रामाणिक हस्तकला और नक्काशीदार बनावट है। महिलाओं का मानना है कि त्योहार के दिन इन्हें धारण करने से पारंपरिक वेशभूषा में एक अलग ही निखार आ जाता है। यही कारण है कि तेजी से बदलते फैशन ट्रेंड्स के बावजूद इनकी प्रतिष्ठा फीकी नहीं पड़ी है।

लोक संस्कृति और स्थानीय व्यापार की रीढ़

गांवों और कस्बों में लाख की चूड़ियां केवल एक सामान्य आभूषण नहीं, बल्कि रीति-रिवाजों और पारंपरिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती हैं। भरतपुर के चूड़ी बाजार में त्योहारी सीजन के दौरान बिक्री में आने वाले इस उछाल से स्थानीय दुकानदारों और कारीगरों को भी बेहतर मुनाफे की उम्मीद जगी है। दीपावली की तारीख पास आते ही खरीदार अपनी पसंद के परिधानों से मेल खाते चूड़े चुनने के लिए दुकानों का रुख कर रहे हैं।

त्योहारों से लेकर मांगलिक प्रसंगों तक पहली पसंद

महिलाएं केवल दीपावली के दिन ही नहीं, बल्कि आने वाले पारिवारिक समारोहों, शादियों और अन्य मंगल आयोजनों के लिए भी लाख के चूड़ों का चयन कर रही हैं। यह आभूषण केवल रूप-रंग निखारने का जरिया भर नहीं हैं, बल्कि भरतपुर के स्थानीय बाजार की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग भी बन चुके हैं। बाजार का वर्तमान रुख यह स्पष्ट करता है कि समकालीन बदलावों के बावजूद अपनी समृद्ध परंपरा और जड़ों से जुड़ाव आज भी लोगों के लिए सर्वोपरि है।

सवाल-जवाब

भरतपुर के चूड़ी बाजार में इस समय किस चीज की सबसे ज्यादा मांग है?
दीपावली के चलते बाजार में पारंपरिक लाख की चूड़ियों और चूड़ों की सबसे अधिक मांग देखी जा रही है।
लाख की चूड़ियों में महिलाएं कौन से रंग सबसे ज्यादा पसंद कर रही हैं?
खरीदार पारंपरिक लाल, हरे और अन्य शुभ रंगों के साथ-साथ आकर्षक लाइट वर्क वाले डिजाइनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
लाख के चूड़ों को विशेष रूप से कौन पसंद करता है?
ग्रामीण आंचल की महिलाएं अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और देसी रीति-रिवाजों के कारण इन चूड़ों को विशेष रूप से पसंद करती हैं।
महिलाएं लाख की चूड़ियां किन अवसरों पर पहनना पसंद करती हैं?
महिलाएं इन्हें दीपावली के त्योहार के अलावा पारिवारिक समारोहों और अन्य मांगलिक अवसरों पर पहनना पसंद करती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·11 मिनट पहले

भरतपुर में लाख की चूड़ियों की मांग बढ़ने की बात तो ठीक है, पर आज कल के फैशन में सब लोग इन्हें कहां ही पहनते हैं। ज्यादातर लड़कियां तो अब मेटल या कांच वाली ही पसंद करती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 मिनट पहले

रविकेश जी, आप सही कह रहे हैं कि मेटल और कांच ज्यादा दिखते हैं, पर ग्रामीण इलाकों में आज भी लाल-हरे चूड़ों का जो क्रेज है, वो इस बाजार में साफ दिख रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·31 मिनट पहले

भरतपुर के बाजारों में ऐसी रौनक देखकर अच्छा लगा। वैसे भी त्योहारों के दिनों में लोकल कारीगरों की चीजें बिकती हैं तो उनका भी अच्छा भला रोजगार चल जाता है, इस बार डिमांड ज्यादा दिख रही है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 मिनट पहले

रोहन भाई, रोजगार तो ठीक है पर बाजारों में इतनी भीड़ देखकर जेबकतरों और संदिग्धों पर भी नजर रखनी होगी, त्योहार पर कानून-व्यवस्था संभालना असली चुनौती है।

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