हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी परदे के जादुई मेल की चर्चा होती है, तो राजेश खन्ना और किशोर कुमार की जोड़ी का जिक्र सबसे पहले आता है। परदे पर काका का अंदाज और पृष्ठभूमि में किशोर दा की जादुई आवाज का ऐसा मेल बैठा कि आज भी उनके गीत श्रोताओं के दिलों पर राज करते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि राजेश खन्ना के लिए अपनी आवाज देने से पहले किशोर कुमार ने खुद उनसे मुलाकात की थी और उनके व्यक्तित्व को करीब से परखने के बाद ही अपनी सहमति दी थी।
मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को जन्मे किशोर कुमार का वास्तविक नाम आभास कुमार गांगुली था। उनके पिता कुंजलाल गांगुली एक जाने-माने वकील थे। उनके बड़े भाई अशोक कुमार पहले से ही हिंदी फिल्म उद्योग के बड़े सितारे बन चुके थे, जिनकी प्रेरणा और प्रभाव के चलते किशोर कुमार मायानगरी मुंबई पहुंचे थे।
सिनेमा गलियारों में किस्सा मशहूर है कि निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने जिस फिल्म के लिए वह गीत रिकॉर्ड करवाया था, उसकी पटकथा किशोर कुमार और उनकी पहली पत्नी रुमा गुहा ठाकुरता के निजी जीवन के घटनाक्रम से प्रेरित थी। हालांकि, शुरुआती दौर में किशोर कुमार इस सच्चाई से अनजान थे। यही वजह थी कि उन्होंने इस फिल्म के दो लोकप्रिय गीत ‘मीत न मिला रे मन का’ और ‘तेरे मेरे मिलन की यह रैना’ अपनी आवाज में रिकॉर्ड करवा दिए।
साल 1969 किशोर कुमार के फिल्मी सफर का सबसे बड़ा निर्णायक मोड़ साबित हुआ। फिल्म ‘आराधना’ के संगीतकार एसडी बर्मन और निर्देशक शक्ति सामंत की यह जिद थी कि परदे पर राजेश खन्ना के लिए सिर्फ किशोर कुमार ही अपनी आवाज दें। उस वक्त राजेश खन्ना फिल्म जगत में अपनी नई पहचान बना रहे थे। कहा जाता है कि किशोर कुमार किसी भी नए कलाकार के लिए प्लेबैक सिंगिंग करने से पहले उससे मिलकर उसके मिजाज को समझना पसंद करते थे।
इसी प्रक्रिया के तहत राजेश खन्ना को किशोर कुमार के आवास पर मिलने भेजा गया था। दोनों कलाकारों के बीच एक लंबी और सार्थक बातचीत हुई। किशोर कुमार, राजेश खन्ना की वैचारिक स्पष्टता, उनके आत्मविश्वास और विशिष्ट व्यक्तित्व से बेहद प्रभावित हुए। इस मुलाकात के बाद ही उन्होंने उस दौर के उभरते हुए अभिनेता के लिए अपनी आवाज देने की हामी भरी थी।
फिल्म ‘आराधना’ के गीत ‘मेरे सपनों की रानी’ और ‘रूप तेरा मस्ताना’ जैसे ही सिनेमाघरों और रेडियो पर आए, वे रातों-रात चार्टबस्टर बन गए। इन गानों ने एक तरफ जहां किशोर कुमार को संगीत की दुनिया में एक नई बुलंदी पर पहुंचाया, वहीं दूसरी तरफ राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा का पहला सुपर स्टार बना दिया। इस कामयाबी के बाद इस जोड़ी ने लगातार एक से बढ़कर एक नायाब और यादगार गीत संगीत प्रेमियों को दिए।
सिनेमा के आंकड़ों के मुताबिक, किशोर कुमार ने अपने पूरे सफर में अकेले राजेश खन्ना पर फिल्माए गए लगभग 245 गानों को अपनी आवाज दी और इस जोड़ी ने करीब 92 फिल्मों में एक साथ काम किया। ‘अमर प्रेम’, ‘कटी पतंग’ और ‘हाथी मेरे साथी’ जैसी फिल्मों के सदाबहार गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं।
अपने लंबे और शानदार करियर में किशोर कुमार ने एसडी बर्मन, आरडी बर्मन और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल समेत कई दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया। उन्होंने न केवल हिंदी बल्कि बंगाली, मराठी और अन्य कई भाषाओं में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया। उन्हें अपनी कला के लिए आठ बार प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। तेरह अक्टूबर 1987 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी बेजोड़ आवाज आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों की सांसों में जिंदा है।



















