भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति 18 के मंच पर अपने शुरुआती संघर्ष से जुड़ा एक अनसुना वाकया साझा किया है। खेल के दौरान एक प्रतियोगी से बातचीत में उन्होंने बताया कि जब वे फिल्मों में काम तलाश रहे थे, तब कई फिल्म निर्माताओं को लगा था कि उनकी असामान्य रूप से लंबी कद-काठी के चलते शायद कोई भी अभिनेत्री उनके साथ काम करने के लिए तैयार नहीं होगी।
शो के अठारहवें संस्करण में भाग लेने पहुंचे प्रतियोगी विनम्र, जिनके दादा अतीत में फिल्म वितरक रह चुके हैं, ने अभिनेता के मशहूर लंबे बालों और खास साइडबर्न्स की चर्चा छेड़ी। प्रतियोगी ने कहा कि उनका यह विशिष्ट हेयरस्टाइल उनके स्टारडम की एक प्रमुख पहचान बन गया था। इसके जवाब में अमिताभ बच्चन ने खुलासा किया कि यह स्टाइल किसी फैशन ट्रेंड या शौक का परिणाम नहीं था, बल्कि काम हासिल करने के लिए मजबूरी में उठाया गया एक सोचा-समझा कदम था।
फिल्म निर्माताओं की दो प्रमुख आपत्तियां
सिनेमा में शुरुआती दस्तक देते वक्त नए कलाकारों को कई तरह के आकलन का सामना करना पड़ता है। अमिताभ बच्चन ने बताया कि उस समय निर्माता अक्सर उनके सामने दो बड़ी अड़चनें रखते थे। पहली चिंता उनकी असाधारण ऊंचाई को लेकर थी, जहां निर्माताओं का मानना था कि उनकी तुलना में अभिनेत्रियों की जोड़ी पर्दे पर जमना मुश्किल होगा और कोई अभिनेत्री उनके साथ काम करने को राजी नहीं होगी।
दूसरी आपत्ति उनके चेहरे के आकार को लेकर थी। निर्माताओं का कहना था कि इतनी लंबी कद-काठी के अनुपात में उनका चेहरा काफी छोटा दिखाई देता है। इस संतुलन को दुरुस्त करने के लिए अमिताभ बच्चन ने अपने रूप-रंग में रणनीतिक बदलाव करने का फैसला किया।
कमी छिपाने की तरकीब बनी हमेशा के लिए पहचान
अपने चेहरे को भरा-पूरा और कद के अनुपात में दिखाने के लिए उन्होंने अपने बालों को बढ़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने बालों को कनपटी तक लंबा रखा, जिससे उनके चेहरे का ढांचा संतुलित नजर आने लगा। जिस हेयरस्टाइल को उन्होंने सिर्फ अपनी कथित शारीरिक खामियों को संतुलित करने और काम पाने के लिए अपनाया था, वही आगे चलकर हिंदी सिनेमा में उनकी सबसे लोकप्रिय और आइकॉनिक पहचान बन गया। लाखों प्रशंसकों ने बाद में उनके इस लुक की नकल की।
सात हिंदुस्तानी से एंग्री यंग मैन बनने तक का सफर
अमिताभ बच्चन के फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1969 में आई फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से हुई थी। शुरुआती प्रोजेक्ट्स में उनके अभिनय कौशल को समीक्षकों द्वारा सराहा गया, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर बड़ी व्यावसायिक कामयाबी उनसे लगातार दूर रही। कई फिल्मों में काम करने के बावजूद वे एक निर्णायक मोड़ की तलाश में थे, जिससे वे फिल्म जगत में मजबूती से पैर जमा सकें।
यह प्रतीक्षित मोड़ साल 1973 में आई प्रकाश मेहरा निर्देशित फिल्म ‘जंजीर’ के साथ आया। इस फिल्म में पुलिस अधिकारी विजय की दमदार भूमिका निभाकर उन्होंने पूरे देश का ध्यान खींचा। ‘जंजीर’ जबरदस्त हिट साबित हुई और इसी के साथ अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा में ‘एंग्री यंग मैन’ का खिताब मिला। इसके बाद उन्होंने ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘डॉन’, ‘अमर अकबर एंथनी’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी एक से बढ़कर एक ऐतिहासिक व यादगार फिल्मों में अभिनय कर बॉलीवुड पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।


















