अमेरिकी मौद्रिक नीति के गलियारों से महंगाई पर सतर्क रहने का स्पष्ट संकेत सामने आया है। फेडरल रिजर्व के अधिकारी श्मिट ने चेताया है कि बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्रीय बैंक को अभी लंबा सफर तय करना होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि महंगाई को फेडरल रिजर्व के 2% के तय लक्ष्य तक वापस खींचने में संस्थान की साख दांव पर लगी है। श्मिट का मानना है कि श्रम बाजार अभी एक मजबूत स्थिति में बना हुआ है, लेकिन अनियंत्रित महंगाई काफी परेशान करने वाली है और इसे हर हाल में दुरुस्त करना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी चिन्हित किया कि आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI भी महंगाई के सबसे बड़े चालकों में से एक बन चुकी है।
मुद्रा बाजारों का मिजाज और अमेरिकी डॉलर की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा मंच पर अमेरिकी मुद्रा का प्रदर्शन अलग-अलग मुद्राओं के मुकाबले उतार-चढ़ाव भरा रहा। विभिन्न प्रमुख मुद्राओं की सूची में अमेरिकी डॉलर जापानी येन के मुकाबले सबसे मजबूत स्थिति में दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा तालिका में आधार मुद्रा और कोटेड मुद्रा के बीच के प्रतिशत बदलावों से यह स्पष्ट दिखाई दिया कि मंगलवार को निवेशकों का रुझान किस ओर स्थानांतरित हुआ। जापानी येन के मुकाबले डॉलर 158.00 के स्तर से ऊपर निकल गया, क्योंकि जापान के केंद्रीय बैंक की ओर से संभावित सख्ती या बाजार में हस्तक्षेप के जोखिम के बावजूद येन को कोई ठोस सहारा नहीं मिल पा रहा था। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा में मामूली नरमी देखी गई, जहां मंगलवार के एशियाई सत्र के दौरान AUD/USD की जोड़ी पिछले सप्ताह के दो महीने के निचले स्तर से उबरने के बाद थोड़ी सुस्त पड़ गई। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की तरफ से इस महीने ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए मददगार साबित हो रही हैं।
फेडरल रिजर्व का दोहरा जनादेश और ब्याज दरों का तंत्र
संयुक्त राज्य अमेरिका में पूरी मौद्रिक व्यवस्था का संचालन फेडरल रिजर्व द्वारा किया जाता है, जो अपने दो मुख्य दायित्वों के तहत काम करता है। पहला लक्ष्य कीमतों में स्थिरता कायम करना है और दूसरा अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना है। इन दोहरे लक्ष्यों को साधने के लिए फेडरल रिजर्व का मुख्य हथियार नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव करना होता है। जब अर्थव्यवस्था में मांग अनियंत्रित होने लगती है और महंगाई दर 2% के दायरे से बाहर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक उधारी लागत बढ़ा देता है। ब्याज दरों में यह वृद्धि पूरी अर्थव्यवस्था में कर्ज को महंगा कर देती है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बाजार आकर्षक बन जाता है और डॉलर मजबूत होता है। इसके उलट, जब महंगाई 2% के नीचे फिसलती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से बढ़ जाती है, तो विकास को रफ्तार देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जिससे अमेरिकी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है।
नीतिगत बैठकों का ढांचा और निर्णय प्रक्रिया
फेडरल रिजर्व पूरे वर्ष में आठ नियमित नीतिगत बैठकें आयोजित करता है। यह दायित्व फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी FOMC संभालती है, जो देश की समष्टि आर्थिक परिस्थितियों का समग्र मूल्यांकन कर ब्याज दरों पर फैसला सुनाती है। इस समिति की मेज पर बारह प्रमुख अधिकारी बैठते हैं। इनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, न्यूयॉर्क स्थित फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष, और शेष ग्यारह क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों में से बारी-बारी से एक-एक वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले चार क्षेत्रीय अध्यक्ष शामिल होते हैं। यह बारह सदस्यीय पैनल ही निर्णय लेता है कि वित्तीय प्रणाली में तरलता का स्तर क्या होना चाहिए।
क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का असर
असाधारण वित्तीय संकटों के समय केंद्रीय बैंक पारंपरिक उपायों से आगे बढ़कर क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी QE का सहारा लेता है। इस व्यवस्था में केंद्रीय बैंक आर्थिक तंत्र में नकदी का प्रवाह अचानक और व्यापक स्तर पर बढ़ा देता है। वर्ष 2008 के भीषण वैश्विक वित्तीय संकट के समय फेडरल रिजर्व ने इसी रणनीति को प्रमुख हथियार बनाया था, जिसके तहत नई मुद्रा सृजित करके वित्तीय संस्थानों से उच्च श्रेणी के बॉन्ड खरीदे गए थे। इस प्रक्रिया का सामान्य परिणाम यह होता है कि बाजार में डॉलर की प्रचुरता के कारण मुद्रा कमजोर पड़ती है। इसके ठीक विपरीत प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी QT कहा जाता है। इसमें फेडरल रिजर्व बॉन्ड खरीद बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि को दोबारा निवेश नहीं करता, जिससे व्यवस्था से तरलता सोख ली जाती है। यह कदम सामान्यतः अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान करता है।
कमोडिटी, बॉन्ड यील्ड और अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों का परिदृश्य
ऋण बाजार में सरकारी बॉन्ड की यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई है, जिसने डॉलर को मजबूती देने में सहायता की है। हालांकि, सोने की कीमतों में सोमवार की मामूली बढ़त के बाद मंगलवार को भी तेजी का रुख दिखा, यद्यपि पीली धातु अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को दोबारा हासिल करने के लिए संघर्ष करती नजर आई। सोने की यह हलचल ट्रेजरी यील्ड में नरमी और डॉलर में आए ताजा दबाव के बीच दर्ज की गई। क्रिप्टो बाजार में भी हलचल तेज रही, जहां बिटकॉइन 85,837 डॉलर के स्तर पर मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि बिकवाल रुझान बदलने का प्रयास कर रहे थे। दूसरी ओर, इथेरियम 2,700 डॉलर के ऊपर सीमित दायरे में रहा और रिपल 1.50 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास डटा रहा। यूरोप में भी केंद्रीय बैंक के सामने जटिल दुविधा है, जहां तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी चल रही महंगाई के दौर में बॉन्ड बाजार खुद वित्तीय स्थितियां सख्त कर रहा है।

















