अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाने वाली अदाकारा प्रियंका चोपड़ा अक्सर अपने अभिनय के साथ-साथ निजी जीवन के खूबसूरत पलों के चलते चर्चा में रहती हैं। इस बार मौका हैलोवीन के रंगारंग जश्न का बना, जहां अभिनेत्री अपने पूरे परिवार के साथ बेहद अनोखे परिधानों में दिखाई दीं। अपने पति निक जोनस और नन्हीं बेटी मालती मैरी के साथ इस उत्सव को खास बनाते हुए उन्होंने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर कुछ अनदेखी तस्वीरें साझा की हैं, जिन्हें लोग काफी उत्साह के साथ देख रहे हैं। इस आयोजन में पूरे परिवार का पहनावा पूरी तरह अलग और बेहद दिलचस्प अंदाज में नजर आया।
काउबॉय बने निक और नन्ही मालती का अनोखा अंदाज
इस पारिवारिक आयोजन में सभी सदस्यों ने अपनी पसंद के अलग-अलग किरदारों को चुना। निक जोनस पूरी तरह से एक काउबॉय के पारंपरिक परिधान में सजे-धजे दिखे, जिसमें उनका वेस्टर्न लुक बेहद आकर्षक लग रहा था। दूसरी ओर, उनकी बेटी मालती मैरी ने एक प्यारी सी घोस्ट प्रिंसेस का रूप धारण किया था, जिसकी मासूमियत ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खुद प्रियंका चोपड़ा इस बार 'किंग काइली' के चर्चित और स्टाइलिश रूप में नजर आईं। अपनी तस्वीरों के साथ लिखे संदेश में प्रियंका ने इस मेलजोल को एक बेहद अनोखा संगम करार दिया। उन्होंने लिखा कि एक काउबॉय, एक घोस्ट प्रिंसेस और किंग काइली मिलकर ट्रिक ऑर ट्रीटिंग के लिए निकले हैं, और इसी के साथ उन्होंने सभी चाहने वालों को इस पर्व की बधाई भी दी।
दिवाली और हैलोवीन का मिलाजुला संगम 'दिवालोवीन'
प्रियंका के इस साझा किए गए संदेश में केवल पश्चिमी पर्व का ही रंग नहीं था, बल्कि भारतीय त्योहार की मिठास भी साफ घुली नजर आई। उन्होंने इस पूरे माहौल को 'दिवालोवीन' का एक नया नाम दिया, जो दिवाली और हैलोवीन के खूबसूरत मिश्रण को दर्शाता है। भारतीय और पश्चिमी संस्कृतियों के इस सुंदर तालमेल को अभिनेत्री अक्सर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करती रही हैं। वे समय-समय पर अपने पति निक और बेटी मालती के साथ बिताए गए ऐसे यादगार लम्हों को इंटरनेट पर साझा करती हैं, जिससे उनके प्रशंसकों को उनके पारिवारिक जीवन के आत्मीय पलों से रूबरू होने का अवसर मिलता है।
हैलोवीन की परंपरा और इसका ऐतिहासिक सफर
यह उत्सव हर वर्ष 31 अक्टूबर के दिन मनाया जाता है, जिसमें लोग कई तरह के रहस्यमयी और डरावने वेश धारण करते हैं। इनमें भूत, चुड़ैल, वैंपायर और अन्य पौराणिक या काल्पनिक पात्रों के रूप शामिल होते हैं। इस अवसर पर विशेष रूप से तैयार की गई वेशभूषा और खास मेकअप के साथ बड़ी-बड़ी पार्टियां आयोजित की जाती हैं। त्योहार की एक प्रमुख परंपरा में छोटे बच्चे घर-घर जाकर ट्रिक ऑर ट्रीट की आवाज लगाते हैं और बदले में टॉफियां, कैंडी या चॉकलेट जमा करते हैं।
इस परंपरा की ऐतिहासिक जड़ें करीब दो हजार साल पुरानी हैं, जिनका संबंध प्राचीन सेल्टिक पर्व 'समहेन' से जोड़ा जाता है। प्राचीन काल में आयरलैंड और स्कॉटलैंड के क्षेत्रों में लोग इसे खेतों में फसलों की कटाई पूरी होने और सर्दियों के मौसम की शुरुआत के प्रतीक के रूप में मनाते थे। वक्त बीतने के साथ यह प्रथा ईसाई धर्म के पवित्र पर्व 'ऑल सेंट्स डे' की पूर्व संध्या से जुड़ती चली गई और आगे चलकर पूरी दुनिया में हैलोवीन के नाम से लोकप्रिय हो गई।
भारतीय महानगरों में बढ़ता चलन
समय के साथ यह पश्चिमी त्योहार अब भारत की सीमाओं में भी अपनी जगह बना चुका है। देश के प्रमुख महानगरों जैसे मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और कोलकाता में युवाओं और परिवारों के बीच इसका क्रेज तेजी से देखा जा रहा है। इन बड़े शहरों में लोग विभिन्न थीम पार्टियों, कॉस्ट्यूम आयोजनों और मिलन समारोहों के जरिए इस दिन को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।


















