दीवाली के उत्सव के दौरान बाजारों में तरह-तरह के पकवान और मिष्ठान सज जाते हैं, मगर घर पर शुद्ध सामग्रियों से तैयार की जाने वाली पारंपरिक मिठाइयों का कोई सानी नहीं होता। राजस्थान के जालोर जिले में त्योहारों के अवसर पर आज भी घरों की रसोई में पारंपरिक मिठाइयों को अपने हाथों से बनाने की समृद्ध परंपरा कायम है। इन्हीं खास पारंपरिक व्यंजनों में मोहनथाल अत्यंत लोकप्रिय है, जिसे स्थानीय बोलचाल में बेसन की चक्की भी कहा जाता है। बेसन, शुद्ध घी और मावे के संतुलित मेल से बनने वाली यह मिठाई अपने खास स्वाद और बनावट के लिए जानी जाती है।
चने की दाल की पिसाई और बेसन की भुनाई
जालोर की गृहिणी नीता सोनी के अनुसार, इस पारंपरिक मिठाई को घर पर बहुत ही सहजता से बनाया जा सकता है क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली अधिकांश सामग्री आमतौर पर हर घरेलू रसोई में पहले से मौजूद रहती है। इस विधि का सबसे अहम चरण बेसन की तैयारी से शुरू होता है। इसके लिए चने की दाल को पहले अच्छी तरह से सेंका जाता है और फिर उसे पिसवाया जाता है। इस प्रकार तैयार बेसन का दाना मिठाई को एक बेहतरीन बनावट देता है। इसके बाद एक कड़ाही में शुद्ध घी गर्म करके बेसन को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूना जाता है। भूनने की यह प्रक्रिया तब तक जारी रखी जाती है जब तक कि बेसन का कच्चापन पूरी तरह खत्म न हो जाए और रसोई में उसकी सोंधी खुशबू न फैलने लगे।
मावे की सिकाई और एक तार की चाशनी का निर्माण
बेसन भूनने के साथ-साथ मिठाई में इस्तेमाल होने वाले फीके मावे यानी खोए की तैयारी भी बेहद जरूरी होती है। फीके मावे को भी अलग से कड़ाही में घी डालकर अच्छी तरह सेंक लिया जाता है, ताकि उसमें मौजूद नमी निकल जाए और उसका स्वाद निखर सके। जब बेसन और मावा दोनों अपनी पूरी सिकाई पर पहुंच जाते हैं, तब इन दोनों गर्म सामग्रियों को आपस में एकसार मिला दिया जाता है। इसके पश्चात मिठाई में मिठास और सही गाढ़ापन लाने के लिए एक अलग बर्तन में शक्कर और पानी का घोल चढ़ाया जाता है। इस घोल को मध्यम आंच पर पकाते हुए एक तार की सटीक चाशनी तैयार की जाती है। जैसे ही चाशनी एक तार की अवस्था में आती है, उसमें पहले से भुना हुआ बेसन और मावे का मिश्रण डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है।
केसर, इलायची का तड़का और चक्की जमाने की प्रक्रिया
मिश्रण के गाढ़े होते ही इसमें खुशबू और पारंपरिक स्वाद बढ़ाने के लिए ताजी पिसी हुई इलायची का पाउडर मिलाया जाता है। मिठाई को गहरा आकर्षक रंग और शाही अंदाज देने के लिए केसर के धागे और आवश्यकतानुसार हल्का मीठा फूड कलर शामिल किया जाता है। चमचे की मदद से पूरे मिश्रण को अच्छी तरह फेंटा जाता है ताकि चाशनी, मावा, बेसन और सुगंधित मसाले आपस में पूरी तरह घुल-मिल जाएं। इसके बाद मिश्रण को जमाने के लिए थालियों की सतह पर शुद्ध घी लगाकर चिकना कर लिया जाता है।
तैयार गर्म मिश्रण को घी लगी थालियों में समान मोटाई के साथ फैला दिया जाता है। थालियों को कुछ समय के लिए सामान्य तापमान पर ठंडा होने और पूरी तरह जमने के लिए छोड़ दिया जाता है। जब मोहनथाल ठोस होकर अच्छी तरह सेट हो जाता है, तब धारदार चाकू से इसे चौकोर चक्की के आकार में काट लिया जाता है। अंत में इन चक्कियों के ऊपर महीन कटे सूखे मेवे सजाए जाते हैं और पारंपरिक रूप से चांदी का वर्क लगाकर परोसने के लिए तैयार किया जाता है।



















