भारतीय सिनेमा के बड़े प्रोजेक्ट्स में शुमार फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों और प्रशंसकों के बीच सरगर्मियां तेज हो गई हैं। रणबीर कपूर और साई पल्लवी की मुख्य भूमिकाओं वाली इस बहुचर्चित फिल्म की स्टार कास्ट को लेकर लगातार नई प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सबसे तीव्र चर्चा माता सीता के रूप में अभिनेत्री साई पल्लवी के चयन और उनके स्क्रीन अपीयरेंस को लेकर देखी जा रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों का वर्ग इस फैसले पर स्पष्ट रूप से दो अलग विचारों में बंट गया है। जहां एक तबका अभिनेत्री की स्वाभाविक सादगी, सौम्यता और अभिनय क्षमता की सराहना कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इस पौराणिक चरित्र के लिए उनके उपयुक्त होने पर लगातार संदेह जता रहा है।
पौराणिक छवि, ग्रंथ और स्क्रीन लुक की तुलना
प्राचीन धर्मग्रंथों और ऐतिहासिक किताबों के वर्णनों का संदर्भ देकर लोग यह विचार कर रहे हैं कि माता सीता का स्वरूप कैसा रहा होगा। भारतीय दर्शक अब तक दूरदर्शन के क्लासिक धारावाहिकों से लेकर बड़े पर्दे की विभिन्न फिल्मों तक सीता के किरदार को कई प्रतिष्ठित कलाकारों के अलग-अलग अंदाजों में देखते आए हैं। ऐसी पूर्व छवियों के कारण साई पल्लवी के सामने आने वाले लुक को लेकर अपेक्षाएं बहुत संवेदनशील हो गई हैं। सोशल मीडिया मंचों पर लोगों का मानना है कि अभिनेत्री की व्यक्तिगत सरलता और सुंदरता निर्विवाद है, लेकिन इस पौराणिक भूमिका के सांचे में वह पूरी तरह सटीक नहीं बैठ पा रही हैं। इस विवाद ने क्षेत्रीय सिनेमाई प्राथमिकताओं यानी उत्तर बनाम दक्षिण की एक नई बहस को भी जन्म दे दिया है।
मेकअप और प्रेजेंटेशन पर उठते सवाल
डिजिटल जगत में फिल्मी हस्तियों के लुक्स पर बारीक नजर रखी जाती है और अक्सर तीखे कमेंट्स किए जाते हैं। फिल्म में साई पल्लवी के मेकअप और लुक को लेकर कई दर्शकों ने निर्माताओं के काम पर सवाल खड़े किए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मेकअप टीम ने अभिनेत्री को वह गरिमापूर्ण और पारंपरिक टच नहीं दिया जिसकी इस रोल में दरकार थी। दर्शकों का एक वर्ग यह मानता है कि तकनीकी टीम और निर्माताओं ने प्रेजेंटेशन के स्तर पर न्याय नहीं किया है। इस दौरान कुछ यूजर्स ने अत्यधिक तल्ख टिप्पणियां भी कीं, जिनमें कास्टिंग टीम और मेकअप आर्टिस्ट के काम की खुली आलोचना की गई और इसे चरित्र की गरिमा के विपरीत बताया गया।
वैकल्पिक कास्टिंग और भाषा का मुद्दा
कास्टिंग को लेकर चल रहे इस विवाद में दर्शकों ने अपनी ओर से दूसरे कलाकारों के नाम भी सुझाने शुरू कर दिए हैं। कुछ प्रशंसकों ने सारा अर्जुन का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि वह इस पावन भूमिका के लिए कहीं अधिक उपयुक्त और स्वाभाविक विकल्प साबित हो सकती थीं। उनका दावा है कि साई पल्लवी के वर्तमान लुक से माता सीता के उस खास आभा मंडल का अहसास नहीं हो रहा है। इसके साथ ही, संवाद अदायगी और उच्चारण को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि कोई कलाकार संबंधित भाषा पर स्वाभाविक पकड़ नहीं रखता, तो इतनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परियोजना में उसका चयन कितना उचित है। इन तमाम बहसों और तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच यह बड़ी फिल्म दिवाली के पावन अवसर पर 5 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।


















