बेंगलुरु में आकार लेने लगी देश की पहली बुलेट ट्रेन, बीईएमएल की फैक्ट्री में कार बॉडी का स्ट्रक्चरल टेस्ट शुरूरामायण के आगमन से पहले समझिए रणबीर कपूर का बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट कार्ड, पिछली पांच में से केवल एक फिल्म हुई नाकामविवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए दिवाली पर अपनाएं ज्योतिषीय उपायदीवाली पर घर पर बनाएं राजस्थान की पारंपरिक बेसन चक्की, जानें मावा और एक तार की चाशनी से मोहनथाल तैयार करने का सही तरीकाआहोर की मशहूर रबड़ी का सवा सदी पुराना इतिहास, 20 किलो गाय के दूध से ऐसे तैयार होती है सिर्फ 4.5 किलो मिठाईत्योहारी सीजन में रेलवे की सौगात, लुधियाना और पूर्णिया के बीच दौड़ेगी आरक्षित स्पेशल ट्रेनभारतीय बाजार में उतरी नई हुंडई बायोन, शुरुआती कीमत 10 लाख रुपयेपहाड़ों पर एआई चैटबॉट्स की गलत सलाह से भटक रहे ट्रैकर्स, बढ़ रहा रेस्क्यू का खतराभोपाल के शौर्य स्मारक में 55 जिलों की मिट्टी से रोपा गया संकल्प वृक्ष, सेना दिवस की तैयारियों का शंखनादमुंगेर के रणगांव स्थित रत्नेश्वरनाथ मंदिर का 9.10 करोड़ से होगा कायाकल्प, पर्यटन विभाग ने शुरू की टेंडर प्रक्रिया
आहोर की मशहूर रबड़ी का सवा सदी पुराना इतिहास, 20 किलो गाय के दूध से ऐसे तैयार होती है सिर्फ 4.5 किलो मिठाईराजस्थान
1 नव॰ 2026, 4:39 pm (9 मिनट पहले)· 1

आहोर की मशहूर रबड़ी का सवा सदी पुराना इतिहास, 20 किलो गाय के दूध से ऐसे तैयार होती है सिर्फ 4.5 किलो मिठाई

जालोर के आहोर में राठी परिवार पिछले 127 सालों से पारंपरिक तरीके से रबड़ी तैयार कर रहा है, जहां घंटों धीमी आंच पर दूध पकाने के बाद बेहतरीन स्वाद तैयार होता है।

राजस्थान के जालोर जिले में स्थित आहोर की पहचान वहां मिलने वाली खास रबड़ी से जुड़ी हुई है। यहां के राठी परिवार द्वारा तैयार की जाने वाली यह पारंपरिक मिठाई पिछले 127 वर्षों से अपने खास स्वाद और शुद्धता के लिए जानी जाती है। इस पारंपरिक स्वाद को हासिल करने के पीछे कई घंटों का कड़ा परिश्रम शामिल होता है, जिसमें शुद्ध गाय के दूध को पारंपरिक चूल्हे पर धीमी आंच में तब तक पकाया जाता है जब तक वह गाढ़ा न हो जाए। लगभग 18 से 20 किलो दूध को लगातार आंच पर खौलाने के बाद महज 4.5 किलो तैयार रबड़ी प्राप्त होती है।

कढ़ाई में घंटों की मेहनत से तैयार होती है लच्छेदार मलाई

इस अनूठी मिठाई को बनाने की विधि पूरी तरह से पारंपरिक और धैर्य की मांग करने वाली है। सबसे पहले एक बड़ी लोहे की कढ़ाई में शुद्ध गाय का दूध डालकर उसे धीमी आंच पर पकाया जाता है। जैसे-जैसे दूध उबलता है, उसके ऊपर मलाई की परत जमने लगती है। इस मलाई को हलवाई बड़ी सावधानी से हटाकर कढ़ाई के किनारों पर लगाते जाते हैं, जबकि बीच का हिस्सा लगातार उबलता रहता है। घंटों तक दूध को इसी क्रम में पकाने से उसकी मात्रा घटती जाती है और वह बेहद गाढ़ा हो जाता है। जब दूध अपनी अंतिम अवस्था में पहुंचता है, तब किनारों पर जमा की गई परतों वाली मलाई को खुरचकर उस गाढ़े दूध में वापस मिला दिया जाता है, जिससे रबड़ी को मलाईदार बनावट और दानेदार स्वाद मिलता है।

ये भी पढ़ें

दुकान मालिक मुकेश कुमार राठी का अनुभव और रोजाना की खपत

दुकान के संचालक मुकेश कुमार राठी ने बताया कि उनका यह व्यावसायिक प्रतिष्ठान लगभग 127 साल पुराना है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। यहां रोजाना लगभग 10 से 12 किलो रबड़ी तैयार की जाती है। जब पूरी रबड़ी पककर तैयार हो जाती है, तब इसमें स्वादानुसार शक्कर मिलाई जाती है। इसके बाद इसे सामान्य तापमान पर ठंडा होने के लिए रखा जाता है और फिर ग्राहकों को परोसा जाता है। शादियों, पारिवारिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों के लिए ऑर्डर मिलने पर इसकी उत्पादन मात्रा काफी बढ़ा दी जाती है।

कीमत और उत्सवों के दौरान मांग में भारी बढ़ोतरी

बाजार में इस उच्च गुणवत्ता वाली गाय के दूध की रबड़ी की कीमत 450 रुपए प्रति किलो है। आहोर के स्थानीय निवासियों के अलावा बाहर से आने वाले पर्यटक और मुसाफिर भी इसे बेहद चाव से खरीदते हैं। शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन के दौरान इसकी मांग में जबर्दस्त इजाफा देखा जाता है। इन मौकों पर बड़े आयोजनों के लिए भारी तादाद में अग्रिम आर्डर आते हैं, जिसकी वजह से रोजाना बनने वाली रबड़ी की मात्रा में भी काफी बढ़ोतरी करनी पड़ती है। शुद्ध दूध, धीमी आंच और पारंपरिक मेहनत का यह तालमेल ही इस 127 साल पुराने स्वाद को कायम रखे हुए है।

सवाल-जवाब

आहोर की मशहूर रबड़ी कितने सालों से बनाई जा रही है?
यह रबड़ी आहोर में राठी परिवार द्वारा पिछले 127 वर्षों से पारंपरिक तरीके से बनाई जा रही है।
4.5 किलो रबड़ी बनाने के लिए कितने दूध की जरूरत होती है?
लगभग 4.5 किलो रबड़ी तैयार करने के लिए करीब 18 से 20 किलो शुद्ध गाय के दूध को घंटों पकाया जाता है।
दुकान पर रोजाना कितनी मात्रा में रबड़ी तैयार की जाती है?
दुकान में सामान्य दिनों में रोजाना लगभग 10 से 12 किलो रबड़ी बनाई जाती है, जबकि आयोजनों पर यह मात्रा बढ़ जाती है।
इस प्रसिद्ध रबड़ी की प्रति किलो कीमत क्या है?
शुद्ध गाय के दूध से बनने वाली इस पारंपरिक रबड़ी की कीमत 450 रुपए प्रति किलो है।
इस रबड़ी का खास मलाईदार टेक्सचर कैसे बनता है?
दूध को पकाते समय मलाई को कढ़ाई के किनारों पर लगाया जाता है और बाद में उसे गाढ़े दूध में मिलाकर यह टेक्सचर तैयार होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp