नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य पौराणिक फिल्म रामायण को लेकर सिनेप्रेमियों में भारी उत्सुकता बनी हुई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में माता सीता का केंद्रीय किरदार दक्षिण भारतीय फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री साई पल्लवी निभा रही हैं। किसी भी कलाकार के लिए यह सिर्फ एक नियमित सिनेमाई भूमिका नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील दायित्व है। अभिनेत्री ने हाल ही में साझा किया कि उन्होंने इस दिव्य स्वरूप को पर्दे पर पूरी पवित्रता, गंभीरता और समर्पण के साथ उतारने के लिए विशेष मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी की, जिसमें निरंतर प्रार्थना और ध्यान ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
क्विज शो के मंच पर अमिताभ बच्चन से की मन की बात
क्विज रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति के विशेष एपिसोड में शिरकत करने पहुंचीं साई पल्लवी ने मंच संचालक अमिताभ बच्चन के साथ विस्तार से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पौराणिक गाथा का हिस्सा बनने के अपने गहरे व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। अभिनेत्री ने बताया कि जब उन्हें माता सीता की भूमिका की जिम्मेदारी सौंपी गई, तो उनके मन में इस चरित्र के प्रति अगाध श्रद्धा के साथ-साथ एक गहरा उत्तरदायित्व भी महसूस हुआ। उनका एकमात्र लक्ष्य यही रहा कि काम के दौरान किसी भी स्तर पर कोई व्यवधान या त्रुटि न आए, ताकि पर्दे पर माता सीता के आदर्शों और उनकी अद्वितीय गरिमा की सच्ची छवि उभर सके।
भविष्य की पीढ़ियों और इतिहास के निर्माण की खातिर प्रार्थना
इस भूमिका की तैयारी के संदर्भ में बात करते हुए साई पल्लवी ने बताया कि उन्होंने कठिन चुनौतियों से पार पाने के लिए निरंतर ईश्वरीय शक्ति का स्मरण किया। उनका मानना है कि यह कोई सामान्य व्यावसायिक फिल्म नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा और इतिहास का एक ऐसा अमर अध्याय साबित होगी जिसे आने वाली पीढ़ियां कई दशकों तक देखेंगी।
इस किरदार के लिए मैंने सिर्फ प्रार्थना की।
अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि जब वर्तमान पीढ़ी के लोग इस दुनिया में नहीं रहेंगे, तब भी यह कलाकृति जीवित रहेगी। इसी ऐतिहासिक उत्तरदायित्व के कारण उन्होंने केवल यही कामना की कि अभिनय करते समय उनके सामने आने वाली सभी व्यावहारिक और मानसिक अड़चनें दूर हो जाएं, ताकि चरित्र का गौरव हर दृश्य में सुरक्षित रह सके।
मानसिक शांति और ठहराव के लिए ध्यान की दिनचर्या
फिल्म की शूटिंग के दौरान साई पल्लवी ने ध्यान यानी मेडिटेशन को अपनी दैनिक जीवनशैली का अटूट हिस्सा बना लिया। अभिनेत्री के अनुसार, जब वह ध्यान नहीं करतीं तो उनके मस्तिष्क में विचारों का भारी प्रवाह चलने लगता है, जिससे मानसिक एकाग्रता प्रभावित हो सकती थी। शूटिंग के कठिन दिनों में शांत रहने और जटिल मनोदशाओं को संभालने में ध्यान प्रक्रिया ने उनका निरंतर मार्गदर्शन किया।
इस भूमिका ने उन्हें जीवन का एक बड़ा आध्यात्मिक सबक भी सिखाया। उन्होंने समझा कि किसी भी तनावपूर्ण या विषम परिस्थिति में तुरंत उग्र प्रतिक्रिया देने के स्थान पर पहले शांत होकर स्थिति को देखना और समझना अधिक विवेकपूर्ण होता है। सेट पर जब भी कोई दबाव या परेशानी सामने आती, तो वह खुद से यही सवाल करती थीं कि इस स्थिति में माता सीता किस शालीनता और संयम के साथ आचरण करतीं। यही आंतरिक ठहराव उनके अभिनय की मुख्य ताकत बना।
दिग्गज सितारों से सजी स्टारकास्ट और रिलीज कार्यक्रम
नितेश तिवारी के निर्देशन में तैयार हो रही इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में भारतीय सिनेमा के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आने वाले हैं। फिल्म में भगवान श्रीराम के रूप में रणबीर कपूर दिखाई देंगे, जबकि भगवान लक्ष्मण का अहम किरदार रवि दुबे निभा रहे हैं। वहीं लंकापति रावण की प्रभावशाली भूमिका में दक्षिण भारतीय सिनेमा के रॉकिंग स्टार यश अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। दर्शकों के भारी आकर्षण का केंद्र बनी इस दो भागों वाली गाथा का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा।



















