हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्म निर्देशक संजय गुप्ता के निधन की खबर सामने आने के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री गहरे सदमे में डूब गई है। सिनेमा जगत से जुड़े कलाकारों, तकनीकी जानकारों और उनके करीबी दोस्तों के बीच इस वक्त भारी मायूसी का माहौल है। कई लोग सोशल मीडिया के जरिए अपने दुख को साझा कर रहे हैं, वहीं कुछ करीबी सीधे उनके घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड के मशहूर लेखक और निर्देशक मिलाप जावेरी जब दिवंगत फिल्ममेकर के आवास पर पहुंचे, तो वह अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख पाए और फफक कर रो पड़े।
घर पहुंचकर खुद को संभाल नहीं पाए लेखक
संजय गुप्ता के घर से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में मिलाप जावेरी बेहद मायूस और टूटते हुए नजर आ रहे हैं। वह अपने आंसू रोक नहीं सके और वहां मौजूद लोगों के सामने ही रोने लगे। एक मीडिया बातचीत के दौरान भी जब उनसे इस क्षति को लेकर सवाल हुआ, तो वह अपने पुराने दिनों को याद करते हुए फिर से भावुक हो गए। उनका यह मार्मिक रूप देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। उनके लिए यह सिर्फ किसी वरिष्ठ सहकर्मी का जाना नहीं, बल्कि अपने सबसे करीबी मार्गदर्शक को हमेशा के लिए खो देने जैसा है।
शुरुआती दिनों का सहारा और अटूट भरोसा
मिलाप जावेरी ने अपने करियर में संजय गुप्ता की भूमिका को बेहद अहम बताया है। उन्होंने एक भावनात्मक संदेश साझा करते हुए खुलासा किया कि वह महज 21 साल की उम्र में पहली बार उनसे मिले थे। उस युवा अवस्था में निर्देशक ने न केवल उन्हें जीवन के कई गहरे सबक सिखाए, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का पहला बड़ा अवसर भी दिया। उन्हें अपनी चर्चित फिल्म ‘कांटे’ के जरिए मौका मिला था। मिलाप के शब्दों में, जब भी उनका पेशेवर सफर किसी कठिन मोड़ या मंदी से गुजरता, संजय गुप्ता उन पर भरोसा जताते और उन्हें काम देकर सहारा देते थे।
पिता, भाई और दोस्त के रूप में याद किया
अपने विचार साझा करते हुए मिलाप जावेरी ने कहा कि संजय गुप्ता उनके लिए सिर्फ एक फिल्म निर्देशक नहीं थे, बल्कि वह उन्हें अपना गुरु, गॉडफादर, पिता, भाई और सच्चा दोस्त मानते थे। उन्होंने बताया कि निर्देशक ने केवल काम की पेशकश नहीं की, बल्कि एक नए लेखक की प्रतिभा पर उस वक्त विश्वास जताया जब बहुत कम लोग ऐसा करते थे। यही कारण है कि यह विदाई उनके लिए एक गहरा व्यक्तिगत नुकसान है। उन्होंने कहा कि वह इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि उनके गुरु अब इस दुनिया में मौजूद नहीं हैं, और उनका स्नेह तथा मार्गदर्शन हमेशा उनकी यादों में जिंदा रहेगा।
अपराध, अंडरवर्ल्ड और सिनेमा का अनोखा अंदाज
संजय गुप्ता को भारतीय सिनेमा में अपनी एक अलग शैली और विजुअल ट्रीटमेंट के लिए खास पहचान मिली थी। उन्होंने अपने निर्देशन करियर में अपराध जगत, एक्शन और मुंबई की अंडरवर्ल्ड पृष्ठभूमि को बेहद स्टाइलिश अंदाज में बड़े पर्दे पर पेश किया। अभिनेता संजय दत्त के साथ उनकी जोड़ी सिनेमा प्रेमियों के बीच काफी चर्चित रही। दोनों दिग्गजों ने मिलकर ‘कांटे’, ‘मुसाफिर’, ‘जिंदा’ और ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ जैसी यादगार फिल्मों में साथ काम किया था। इसके अलावा साल 2013 में रिलीज हुई फिल्म ‘शूटआउट एट वडाला’ भी उनके निर्देशन की चर्चित और सफल फिल्मों में गिनी जाती है।



















