बिहार की राजधानी पटना में टॉक्सिक और मिर्जापुर जैसी फिल्मों के बीच हनुमान अंश को लेकर दर्शकों में जबरदस्त दीवानगी देखने को मिल रही है। फिल्म देखने के बाद जब दर्शक सिनेमा हॉल से बाहर आए, तो उनके चेहरों पर एक अलग ही उत्साह और अनुभव साफ झलक रहा था। सिनेमा हॉल से बाहर निकलने वाले कई लोगों ने बताया कि उन्हें इस फिल्म को देखने के बाद एक खास तरह की दैवीय शक्ति और गहरी आस्था का अहसास हुआ है। पटना के रिजेंट सिनेमा में फिल्म देखने पहुंचे लोगों के साथ एक खास नजारा भी जुड़ा हुआ दिखा, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सिनेमा हॉल के बाहर बंटी हनुमान चालीसा
रिजेंट सिनेमा से बाहर आ रहे लगभग हर एक दर्शक के हाथ में हनुमान चालीसा नजर आई। कोई उसे अपने हाथ में थामे हुए था तो कोई उसके पन्नों को पलटता हुआ आगे बढ़ रहा था। पहली नजर में देखने वाले को ऐसा लगा कि शायद सिनेमाघर की तरफ से फिल्म का कोई प्रचार वाला पंपलेट या पोस्टर दिया जा रहा है। लेकिन बाद में यह स्पष्ट हुआ कि फिल्म की स्क्रीनिंग खत्म होने के बाद दर्शकों को विशेष रूप से हनुमान चालीसा भेंट की जा रही थी। इस अनोखे आयोजन ने सिनेमा परिसर के माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया और लोग पूरी तरह से आस्था के रंग में रंगे दिखे।
किसने किया इस अनोखी पहल में सहयोग
रिजेंट सिनेमा में प्रदर्शित हो रही हनुमान अंश फिल्म के बाद दर्शकों के बीच हनुमान चालीसा वितरित करने के इस कार्य में मां ब्लड सेंटर, रिजेंट सिनेमा के ऑनर और वहां के कर्मचारियों ने मिलकर अपना पूरा सहयोग दिया। जैसे ही दोपहर का शो समाप्त हुआ और दर्शक हॉल से बाहर आने लगे, वैसे-वैसे उन्हें हनुमान चालीसा सौंपी जाने लगी। इस वितरण के बाद सिनेमाघर के बाहर का दृश्य काफी अलग हो गया, जहां लोगों के हाथों में सामान्य दिनों की तरह सिर्फ मोबाइल फोन और टिकट ही नहीं, बल्कि हनुमान चालीसा भी दिखाई दी। कुछ सिनेमा प्रेमियों ने इसे संभालकर अपने बैग के अंदर सुरक्षित रख लिया, तो वहीं कई लोग इसे अपने हाथों में थामे हुए ही सड़क की तरफ जाते नजर आए।
आयोजकों का उद्देश्य और शो की जानकारी
इस आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य सिनेमा देखने आने वाले दर्शकों के मन में धार्मिक भावनाओं को जागृत करना और आस्था का संदेश घर-घर तक पहुंचाना है। आयोजकों ने यह भी साफ किया है कि जब तक रिजेंट सिनेमा में हनुमान अंश फिल्म का प्रदर्शन चलता रहेगा, तब तक यह हनुमान चालीसा वितरण का सिलसिला भी लगातार जारी रहेगा। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में इस सिनेमाघर में हनुमान अंश को केवल एक ही शो मिला है, जो हर दिन दोपहर 2:10 बजे शुरू होता है। इसके बावजूद इस फिल्म को लेकर स्थानीय लोगों और दर्शकों के बीच गजब का उत्साह बना हुआ है और पहले ही दिन कुल 652 हनुमान चालीसा का वितरण किया गया।
दर्शकों की जुबानी फिल्म और चालीसा का अनुभव
फिल्म देखकर बाहर निकले प्रफुल्ल उस वक्त थोड़े हैरान जरूर हुए, जब अचानक से उनके हाथों में हनुमान चालीसा थमा दी गई। कुछ पल तक वह उसे देखते रहे और फिर उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई, जिसके बाद उन्होंने इसे एक वाकई बेहतरीन पहल बताया। उन्होंने कहा कि धर्म और अपनी आस्था के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के प्रयासों को हमेशा बढ़ावा दिया जाना चाहिए और इसके लिए उन्होंने सभी आयोजकों का दिल से आभार भी व्यक्त किया।
सिनेमा हॉल के बाहर चल रही इस अनूठी पहल की सराहना नीरज कुमार ने भी खुलकर की। उनका साफ तौर पर कहना था कि इस तरह के सकारात्मक प्रयास लगातार होते रहने चाहिए। फिल्म देखने के बाद सिनेमाघर से निकलते ही हाथ में हनुमान चालीसा मिलना उनके लिए एक सुखद और अच्छा अनुभव रहा।
राजकुमार पांडे के लिए यह फिल्म देखना एक बेहद अलग और यादगार अनुभव साबित हुआ। फिल्म की जमकर तारीफ करते हुए उन्होंने बताया कि जब वह पर्दे पर पूरी कहानी देख रहे थे, तो उन्हें लगातार अपने भीतर एक अलग तरह की ऊर्जा और आंतरिक शक्ति महसूस हो रही थी। फिल्म समाप्त होने के बाद जैसे ही उनके हाथों में हनुमान चालीसा आई, तो उन्हें ऐसा लगा कि उस सकारात्मक ऊर्जा का अहसास और भी ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने अंत में कहा कि जिन लोगों ने अभी तक हनुमान अंश फिल्म नहीं देखी है, उन्हें एक बार जरूर इस सिनेमा को देखने जाना चाहिए।



















