डिजिटल दुनिया में पहचान बनाने के बाद अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हुईं अंजलि अरोड़ा जल्द ही बड़े पर्दे पर एक प्रतिष्ठित पौराणिक चरित्र को साकार करती दिखाई देंगी। वह आगामी पौराणिक फिल्म ‘श्री रामायण कथा’ में माता सीता की मुख्य भूमिका निभाने जा रही हैं। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को स्वीकार करने को लेकर अभिनेत्री का स्पष्ट मानना है कि यह अवसर उन्हें प्रभु श्री राम और पवनपुत्र हनुमान जी की विशेष कृपा और आशीर्वाद के स्वरूप प्राप्त हुआ है।
प्रार्थना और आस्था से जुड़ा सफर
अपनी आध्यात्मिक आस्था और दिनचर्या के बारे में बात करते हुए अभिनेत्री ने साझा किया कि वह प्रत्येक मंगलवार को नियमित रूप से हनुमान मंदिर में दर्शन करने जाती हैं। मंदिर में पूजा अर्चना के दौरान वह सदैव यही प्रार्थना करती आई हैं कि उनके परिश्रम और सामर्थ्य के अनुसार जो उनके हक में हो, वही उन्हें जीवन में मिले। जब इस विशाल पौराणिक कथा पर आधारित परियोजना का प्रस्ताव उनके पास पहुंचा, तो उन्हें यह अपनी नियमित प्रार्थनाओं और अटूट श्रद्धा का ही फल प्रतीत हुआ।
एआई तकनीक से तैयार तस्वीर देखकर हुई थी शुरुआत
इस बड़े प्रोजेक्ट के सिलसिले में जब निर्देशक अभिषेक सिंह पहली बार उनके पास प्रस्ताव लेकर पहुंचे, तो वह क्षण काफी अप्रत्याशित और दिलचस्प था। निर्देशक अपने साथ माता सीता के रूप में अंजलि अरोड़ा की एक विशेष छवि लेकर आए थे, जिसे एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से तैयार किया गया था। अपने सामान्य स्वरूप से एकदम भिन्न और अलौकिक छवि को देखकर अभिनेत्री शुरू में काफी चकित रह गईं और अपनी हंसी नहीं रोक पाईं। वह पहली नजर में उस डिजिटल रूप में खुद को पहचान भी नहीं सकी थीं।
उस लम्हे को साझा करते हुए अंजलि ने बताया कि जब उन्होंने निर्देशक से आश्चर्य में पूछा कि क्या यह वाकई वही हैं, तो निर्देशक ने पूरे भरोसे के साथ कहा कि यह तस्वीर उन्हीं की है। शुरुआत में अंजलि के मन में अपनी क्षमताओं को लेकर कुछ संशय भी था। उन्होंने निर्देशक से सीधे तौर पर पूछा भी था कि क्या वह वाकई इस गंभीर और पावन चरित्र को निभाने के काबिल हैं। इस पर निर्देशक अभिषेक सिंह ने उनके भीतर भरोसा जगाते हुए कहा था कि वह इस भूमिका को पूरी तरह निभा सकती हैं।
गहन विचार के बाद स्वीकार की जिम्मेदारी
इस ऐतिहासिक और संवेदनशील भूमिका के लिए हामी भरने से पहले अंजलि अरोड़ा ने जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया। उन्होंने इस प्रस्ताव पर गहराई से विचार करने के लिए थोड़ा वक्त लिया। उन्होंने आत्ममंथन किया कि यदि इतना बड़ा पौराणिक चरित्र उनके सामने प्रस्तुत हुआ है, तो यह निश्चय ही किसी ईश्वरीय संकेत अथवा आशीर्वाद से कम नहीं है। मंगलवार के नियम और मंदिर में की जाने वाली प्रार्थनाओं का स्मरण करते हुए उन्होंने अंततः इस भूमिका को स्वीकार करने का मन बनाया।
किरदार के नैतिक गुणों और त्याग को आत्मसात करने का प्रयास
माता सीता के पावन व्यक्तित्व को परदे पर सजीव करने के लिए अंजलि अरोड़ा ने उनके स्वभाव और मूल्यों को गहराई से समझने पर विशेष ध्यान दिया है। अभिनेत्री के अनुसार, उन्होंने इस भूमिका को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास किया है। उन्होंने माता सीता के अतुलनीय धैर्य, मर्यादा, त्याग और धर्म के प्रति निष्ठा जैसे मानवीय व आध्यात्मिक गुणों को अपनी अदाकारी में उतारने की हरसंभव कोशिश की है।
अपने काम और दर्शकों की प्रतिक्रिया को लेकर बात करते हुए अंजलि ने कहा कि हर कलाकार अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करता है और बाकी सब दर्शकों के निर्णय पर निर्भर करता है। सिनेमाघरों में जब यह प्रस्तुति सामने आएगी, तब दर्शक ही यह तय करेंगे कि काम कैसा हुआ है। लोग इसे स्वीकार करते हैं या नहीं, यह पूरी तरह दर्शकों के हाथ में है, जबकि एक कलाकार के तौर पर उनका प्राथमिक दायित्व सौंपे गए चरित्र के साथ संपूर्ण न्याय करना था।


















