सिनेमा जगत के मशहूर अभिनेता राजेश खन्ना की निजी जिंदगी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। दिवंगत सुपरस्टार के साथ लंबा समय बिताने का दावा करने वाली उनकी साथी अनीता आडवाणी ने अभिनेता के वैवाहिक जीवन और तलाक को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर अस्सी और नब्बे के दशक के उन पन्नों पर बहस छिड़ गई है, जो अक्सर परदे के पीछे ही दबे रहते हैं।
राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया की शादी और अलगाव
राजेश खन्ना ने साल 1973 में डिंपल कपाड़िया के साथ सात फेरे लिए थे। उस समय डिंपल कपाड़िया की उम्र महज 16 वर्ष थी। इस वैवाहिक बंधन से दोनों की दो बेटियां ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना हुईं। हालांकि, कुछ ही वर्षों बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं और मतभेदों के चलते साल 1982 में दोनों ने अलग रहने का फैसला कर लिया। हैरानी की बात यह है कि अलग होने के बावजूद दोनों ने कभी भी कानूनी तौर पर तलाक नहीं लिया और ताउम्र पति-पत्नी के रिश्ते में ही बंधे रहे।
अनीता आडवाणी के साथ लिव-इन रिश्ता
डिंपल कपाड़िया से अलगाव के बाद राजेश खन्ना की जिंदगी में अनीता आडवाणी का प्रवेश हुआ। दोनों ने एक लंबा अरसा साथ बिताया और लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। एक ही छत के नीचे करीब एक दशक तक यह रिश्ता चलता रहा, जो साल 2012 में राजेश खन्ना के निधन तक कायम रहा। इस दौरान अनीता आडवाणी उनके हर सुख-दुःख की साथी बनकर रहीं और अभिनेता के अंतिम दिनों में भी उनके साथ मजबूती से खड़ी नजर आईं।
तलाक न होने की पीछे की वजह
एक पुरानी बातचीत में अनीता आडवाणी ने राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया के रिश्ते की परतें खोलते हुए कहा था कि अभिनेता खुद कानूनी रूप से अलग होना चाहते थे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों और साक्षात्कारों में इस इच्छा का इजहार किया था। अनीता के अनुसार, राजेश खन्ना अक्सर यह कहते थे कि वे तलाक देना चाहते हैं लेकिन डिंपल इसके लिए तैयार नहीं होती थीं। उनका कहना था कि जब पति-पत्नी साथ नहीं रह रहे हैं, तो केवल नाम के लिए इस रिश्ते को ढोने का क्या तुक बनता है।
डिंपल कपाड़िया की कथित शर्त
अनीता आडवाणी ने यह भी दावा किया कि राजेश खन्ना ने करीब दस बार तलाक की पहल की थी, लेकिन बात कभी आगे नहीं बढ़ पाई। उनके मुताबिक डिंपल कपाड़िया ने तलाक के एवज में एक बड़ी शर्त रख दी थी। उनका कहना था कि यदि अभिनेता तलाक चाहते हैं, तो उन्हें अपनी सारी संपत्ति उनके नाम करनी होगी। इसी वजह से बात अटक गई और अभिनेता अकेलेपन में अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर हो गए। अनीता का यह भी मानना था कि भले ही राजेश खन्ना का मिजाज थोड़ा कठिन था, लेकिन यदि कोई उनके साथ रहना ही नहीं चाहता था, तो ऐसे कानूनी बंधन का कोई औचित्य नहीं बचता।
कानूनी लड़ाई और अदालत का फैसला
राजेश खन्ना के निधन के बाद अनीता आडवाणी ने उनके आशीर्वाद और संपत्ति में अपना कानूनी हक पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राजेश खन्ना के साथ अपने लिव-इन रिश्ते को एक वैध शादी के रूप में मान्यता देने की मांग की थी, ताकि उन्हें उनका अधिकार मिल सके। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 1 अप्रैल 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनीता आडवाणी की इस अपील को खारिज कर दिया, जिससे उन्हें बड़ा झटका लगा।



















