सिनेमा जगत में ऐतिहासिक रूप से ह्वेल के पेट में फंसने की कहानियां कई बार सामने आ चुकी हैं, जिनमें बाइबिल के जोनाह की कथा से लेकर पिनोचियो में मोन्स्ट्रो के विशालकाय भीतर फंसे कठपुतली-लड़के का जिक्र मिलता है। हालांकि, आज तक किसी भी फिल्मी कहानी ने इस बात का सटीक अहसास नहीं कराया है कि किसी जीव द्वारा जीवित निगले जाने और सीधे उसके पेट के अंदर पहुंचने पर वास्तव में कैसा महसूस होता है। अब निर्देशक ब्रायन डफील्ड की नई और रोमांचक सर्वाइवल थ्रिलर फिल्म Whalefall इस अनूठे अनुभव को पर्दे पर उतारने जा रही है, जिसमें अभिनेता ऑस्टिन एब्रम्स द्वारा निभाए गए गोताखोर जे को गहरे पानी में भयंकर संकट का सामना करना पड़ता है।
व्यापक और प्रामाणिक दृश्य प्रभावों का प्रयोग
ह्वेल के पेट के अंदर फंसने के बाद जे के पास वहां से बाहर निकलने के लिए केवल एक घंटे का समय होता है, और इस स्थिति को पूरी तरह वास्तविक महसूस कराया जाना जरूरी था। यही वजह है कि निर्देशक ब्रायन डफील्ड ने यथासंभव प्रैक्टिकल इफेक्ट्स यानी वास्तविक भौतिक प्रभावों का इस्तेमाल किया है, ताकि दर्शकों को इस बात का एक सजीव और खौफनाक अहसास मिल सके कि यह सब उस किरदार के साथ असलियत में घटित हो रहा है। दर्शक इस खौफ को सिर्फ देख ही नहीं पाएंगे, बल्कि उसे महसूस भी करेंगे। निर्देशक ने बताया कि ह्वेल का दिल सीधे पेट के ठीक बगल में होता है, इसलिए पूरी फिल्म के दौरान दिल की धड़कन सुनाई देती रहती है और ह्वेल का पेट उन धड़कनों के साथ प्रतिक्रिया करता रहता है।
पेट के अंदर अनपेक्षित चुनौतियां और स्क्विड पपेट
केवल तेजाब और तेजी से खत्म होती ऑक्सीजन ही उस भयानक जगह पर जे की एकमात्र मुश्किलें नहीं हैं, बल्कि उसे और भी कई खौफनाक चीजों का सामना करना होगा। ब्रायन डफील्ड ने खुलासा किया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान एक समय के लिए उस पेट के अंदर एक स्क्विड पपेट यानी ऑक्टोपस जैसी आकृति भी मौजूद थी। उन्होंने इस पेट के सेट को एक नखरेबाज कलाकार या दिवा की तरह बताया, क्योंकि इसे सेट पर ढालने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। सेट को पानी से भरना और फिर उसे खाली करना अपने आप में एक अलग प्रक्रिया थी, जिसके बाद रातों-रात पेट का आकार पूरी तरह बदल जाता था।
शूटिंग के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयां
फिल्म की शूटिंग की चुनौतियों के बारे में बात करते हुए निर्देशक ने साझा किया कि उनकी तरफ से की गई सारी स्टोरीबोर्डिंग, प्रीविजुअलाइजेशन और तमाम योजनाएं धरी की धरी रह गईं, जैसे ही उनकी टीम ह्वेल के उस कृत्रिम पेट के अंदर दाखिल हुई। वह दौर वास्तव में काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण था, जिसके कारण सेट पर कई बार बेहद निराशाजनक और तनावपूर्ण दिन भी देखने को मिले। इससे यह साबित होता है कि सिंथेटिक या नकली ह्वेल का पेट भी कितना खतरनाक और जोखिम भरा माहौल पैदा कर सकता है। फिल्म के फैंस इस रोमांचक सफर का अनुभव करने के लिए सिनेमाघरों में जा सकेंगे, क्योंकि यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है।


















