भारतीय सिनेमा के गलियारों में आजकल फिल्मों के वीएफएक्स और विजुअल इफेक्ट्स को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। स्थिति यह है कि किसी भी बड़ी मेगा बजट फिल्म का टीजर या ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर उसके एक-एक फ्रेम को लेकर ट्रोलिंग शुरू हो जाती है। एनिमेशन इंडस्ट्री में तीन दशक यानी 30 सालों का लंबा अनुभव रखने वाले नेशनल अवॉर्ड विनर एक्सपर्ट सीबी अरुण कुमार ने इस बढ़ते ट्रेंड पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है।
उन्होंने खुलकर इस बात पर चर्चा की है कि आखिर क्यों आज के दौर के दर्शक रामायण और जेलर 2 जैसी बड़ी फिल्मों के विजुअल्स को देखते ही उस पर तुरंत सवाल उठाने लगते हैं।
दर्शक कैसे बन गए हैं क्रिटिक
सीबी अरुण कुमार ने एक इंटरव्यू के दौरान साझा किया कि 1980 के दशक में जब उन्होंने इस क्षेत्र में काम करना शुरू किया था, तब कंटेंट देखने के साधन बहुत सीमित हुआ करते थे। लोग या तो सिनेमाघरों में जाकर फिल्में देखते थे या फिर देश में सिर्फ एक सरकारी टीवी चैनल होता था। उस दौर में फिल्मों की समीक्षा या रिव्यू करने वाले लोग भी बहुत कम संख्या में हुआ करते थे। लेकिन वक्त के साथ इंटरनेट, डीवीडी और तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आने के बाद अब हर इंसान के हाथ में कंटेंट पहुंच चुका है। आज के समय में हर एक दर्शक खुद को एक फिल्म क्रिटिक समझता है और पर्दे पर दिखने वाले हर छोटे सीन को बेहद बारीकी से नोटिस करता है।
हर खराब सीन को एआई बताना गलत
आजकल किसी भी फिल्म का कोई विजुअल यदि कमजोर या खराब नजर आता है, तो लोग तुरंत यह कह देते हैं कि इसे एआई से तैयार किया गया है। एनिमेशन एक्सपर्ट के अनुसार यह सोच बिल्कुल भी सही नहीं है। यदि कोई विजुअल दर्शकों को पसंद नहीं आ रहा है, तो उस पर सीधे तौर पर एआई का ठप्पा लगा देना पारंपरिक वीएफएक्स आर्टिस्ट्स की सालों की कड़ी मेहनत के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने फिल्म मेकर्स को यह सलाह भी दी है कि वे दर्शकों के सामने पर्दे के पीछे का काम यानी मेकिंग वीडियो साझा करें, ताकि आम लोग कलाकारों की असली मेहनत को समझ सकें और मेकर्स पर अपना भरोसा बनाए रख सकें।
क्रिस्टोफर नोलन को भी देनी पड़ती है सफाई
फिल्म प्रेमियों का अविश्वास अब इस हद तक बढ़ चुका है कि हॉलीवुड के जाने-माने दिग्गज डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन को भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। उन्हें दुनिया के सामने यह साबित करना पड़ता है कि उनकी फिल्मों में दिखाए गए दृश्य किसी वीएफएक्स या कंप्यूटर ग्राफिक्स से नहीं, बल्कि असल जिंदगी में शूट किए गए हैं। सीबी अरुण कुमार के मुताबिक, एआई आज पुराने वीएफएक्स शॉट्स की नकल करके खुद को प्रशिक्षित कर रहा है। ऐसे में आम दर्शकों के लिए यह पहचान पाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है कि कौन सा शॉट असली वीएफएक्स है और कौन सा एआई की मदद से तैयार किया गया है।
आने वाले समय की बड़ी चुनौतियां
भविष्य को लेकर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा है कि जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा, यह समस्या और अधिक गंभीर होती जाएगी। एआई इंसानों द्वारा बनाए गए किसी भी विजुअल को बेहद आसानी से कॉपी कर सकता है। ऐसे फिल्म मेकर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे दर्शकों को कुछ नया और पूरी तरह से एंगेजिंग कंटेंट दें, जिससे सिनेमा के प्रति लोगों का भरोसा हमेशा बना रहे।


















