मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को हाल ही में देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया। गुजरात के एकता नगर में आयोजित इस सम्मान समारोह में उन्हें इस बड़ी उपलब्धि से नवाजा गया। हालांकि, इस ऐतिहासिक खुशी के मौके के तुरंत बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने अभिनेता को उनके माथे पर लगे तिलक को लेकर निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस घटना के बाद इंटरनेट पर छिड़ी बहस के बीच फिल्म उद्योग के उनके सह-कलाकारों और प्रशंसकों ने खुलकर उनके समर्थन में आवाज उठाई है और इस संकीर्ण सोच का विरोध किया है।
समारोह स्थल पर पहुंचने के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें ममूटी का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया जा रहा था। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर साझा किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि ममूटी बेहद साधारण पोशाक में नजर आ रहे हैं। उन्होंने सफेद शर्ट और क्रीम रंग की पैंट पहनी हुई है। समारोह स्थल पर प्रवेश करते ही एक महिला आयोजक ने बेहद आदर के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने ममूटी को फूलों का गुलदस्ता भेंट किया, सम्मान के रूप में उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाया और उनके गले में तिरंगे के रंगों वाला पारंपरिक 'थोरथू' (एक प्रकार का सूती वस्त्र, जिसे कंधे पर रखा जाता है) डाला। ममूटी ने इस पूरे आतिथ्य को बेहद शालीनता और एक सौम्य मुस्कान के साथ स्वीकार किया। उनके चेहरे पर इस सम्मान के प्रति कृतज्ञता साफ देखी जा सकती थी।
सोशल मीडिया पर ट्रोल्स का निशाना बने ममूटी
जहां एक तरफ दुनिया भर में ममूटी के प्रशंसक और सिनेमा जगत के लोग उनकी इस राष्ट्रीय जीत का जश्न मना रहे थे, वहीं सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी सोच रखने वाले कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। इन ट्रोल्स ने इस बात पर सवाल उठाए कि एक मुस्लिम होने के बावजूद ममूटी ने अपने माथे पर हिंदू परंपरा के अनुसार तिलक क्यों लगवाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और अभिनेता को अनावश्यक आलोचना का सामना करना पड़ा। ट्रोलर्स ने उनके धार्मिक विश्वास को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखीं, जिससे इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई।
हरिश्री युसूफ ने ट्रोल्स को दिया करारा जवाब
इस पूरे विवाद के बीच मलयालम फिल्म जगत के जाने-माने अभिनेता और फिल्म निर्माता हरिश्री युसूफ ममूटी के बचाव में आगे आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर इस संकीर्ण सोच की कड़े शब्दों में निंदा की। हरिश्री युसूफ ने ममूटी के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए कहा कि भारत जैसे महान और विविधतापूर्ण देश में इस तरह की छोटी बातों पर विवाद खड़ा करके सांप्रदायिकता को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कई अन्य लोगों ने भी उनके इस रुख का समर्थन किया है।
उन्होंने अपने वीडियो में उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो इस खूबसूरत स्वागत परंपरा को मजहबी चश्मे से देख रहे थे। युसूफ ने ऐसे ट्रोल्स की सोच को बेहद संकीर्ण बताते हुए उनकी तुलना 'कुएं के मेंढक' से की, जो बाहरी दुनिया की खूबसूरती और विशालता से पूरी तरह अनजान हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज में केवल नफरत फैलाने का काम करते हैं और उन्हें भारतीय संस्कृति की समझ नहीं है।
सांस्कृतिक परंपरा और ईश्वर की आराधना पर युसूफ के विचार
अपने वीडियो संदेश में हरिश्री युसूफ ने भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता पर जोर दिया। उन्होंने बेहद खूबसूरती से समझाया कि भारत जैसे देश में ईश्वर तक पहुंचने और उसकी पूजा करने के कई अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। युसूफ ने कहा, "चाहे आप क्रॉस बनाएं, तिलक लगाएं या प्रार्थना करें, यह सब अंततः एक ही ईश्वर को समर्पित है।" उनके अनुसार, ये सभी तरीके भगवान के प्रति इंसान के गहरे प्रेम और श्रद्धा को दर्शाते हैं और इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि हमारे देश में मेहमानों के स्वागत के लिए माथे पर तिलक लगाना एक बहुत ही पुरानी और सम्मानित परंपरा है। इसे किसी विशेष धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के आतिथ्य सत्कार का एक अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने देश के लोगों से अपील की कि वे ऐसी तुच्छ बातों पर आपस में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने वाली ताकतों को बढ़ावा न दें और इस खूबसूरत सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करें।



















