देश की सर्वोच्च अदालत ने पूर्व अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस विशेष याचिका को नामंजूर कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने और दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के मध्य रहे संबंधों को आधिकारिक वैवाहिक मान्यता दिए जाने की गुहार लगाई थी। सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस कानूनी लड़ाई को बेवजह का मुकदमा करार देते हुए साफ शब्दों में कहा कि इस मामले पर आगे सुनवाई करने का कोई भी ठोस विधिक आधार अदालत के समक्ष नजर नहीं आता है।
सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित याचिकाकर्ता के वकील ने दलील पेश करते हुए कहा कि इस सिविल वाद का मुख्य उद्देश्य केवल सामाजिक सम्मान और वैधानिक पहचान हासिल करना है ताकि इस पुराने रिश्ते को उचित सम्मान मिल सके। हालांकि, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की सम्मिलित पीठ ने इन दलीलों को खारिज करते हुए याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
लिव-इन रिलेशनशिप और मुंबई के बंगले से जुड़ा विवाद
अनीता आडवाणी का लंबे समय से यह दावा रहा है कि वह दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ लंबे अर्से तक लिव-इन रिलेशनशिप में जीवन व्यतीत कर चुकी हैं। उनके अनुसार वर्ष 2012 के दौरान उन्हें मुंबई स्थित प्रसिद्ध बंगले 'आशीर्वाद' से जबरन बाहर निकाल दिया गया था। इस संपूर्ण कानूनी विवाद में उन्होंने अभिनेता के परिवार के सदस्यों को पक्षकार बनाया था, जिनमें उनकी अलग रह रही पत्नी डिंपल कपाड़िया, पुत्री ट्विंकल खन्ना और दामाद अक्षय कुमार प्रमुख रूप से शामिल थे।
शीर्ष अदालत के समक्ष यह मामला मुंबई हाई कोर्ट के 01 अप्रैल के आदेश को चुनौती देते हुए पहुँचा था। याचिकाकर्ता के विधिक प्रतिनिधि ने जोर देकर कहा कि इस दीवानी मुकदमे की मूल भावना मान-सम्मान और गरिमा की रक्षा से जुड़ी हुई है, जिसके तहत वह घोषणा चाहती हैं। परंतु तमाम तर्कों के बावजूद सर्वोच्च स्तर पर इस अपील को स्वीकार नहीं किया गया और इसे खारिज कर दिया गया।
निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक मिल चुकी थी निराशा
दिग्गज अभिनेता राजेश खन्ना का निधन जुलाई 2012 में हो गया था, जिसके तुरंत बाद अनीता आडवाणी ने विभिन्न कानूनी मंचों पर न्याय पाने की गुहार लगानी शुरू कर दी थी। इसी कड़ी में उन्होंने एक दीवानी मुकदमा दायर किया था, जिसे मुंबई की डिंडोशी सत्र अदालत द्वारा वर्ष 2017 में ही खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सेशन कोर्ट के उस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जहां से भी उनकी अपील को अस्वीकार कर दिया गया था।
गुजारा-भत्ता और फ्लैट की मांग भी हो चुकी है खारिज
कानूनी लड़ाई के शुरुआती दौर में वर्ष 2013 के दौरान अनीता आडवाणी ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का सहारा लेते हुए एक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। उस शिकायत में उन्होंने मांग की थी कि उन्हें हर महीने नियमित तौर पर गुजारा-भत्ता दिया जाए तथा मुंबई के पॉश बांद्रा इलाके में तीन बेडरूम वाला एक फ्लैट रहने के लिए उपलब्ध कराया जाए।
इस मामले में मुंबई हाई कोर्ट ने वर्ष 2015 में अपना फैसला सुनाते हुए उनकी उस शिकायत को पूरी तरह खारिज कर दिया था और इसके विपरीत डिंपल कपाड़िया तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा दाखिल की गई याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि अनीता आडवाणी और राजेश खन्ना के बीच का संबंध किसी भी सूरत में वैध विवाह की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए वह घरेलू हिंसा कानून के अंतर्गत किसी भी प्रकार की राहत पाने की कानूनी हकदार नहीं हैं। अदालत का यह भी मानना था कि खन्ना परिवार के उन सदस्यों को इस कानूनी मुकदमे में बेवजह नहीं घसीटा जा सकता जिनके साथ याचिकाकर्ता कभी एक छत के नीचे नहीं रही थीं।
मालूम हो कि अनीता आडवाणी अपने शुरुआती फिल्मी करियर के दौरान 'साजिश' और 'दासी' जैसी कुछ चुनिंदा फिल्मों में भी अभिनय करती नजर आ चुकी हैं।



















