हाल ही में सिक्किम के नाथू ला दर्रे पर चीनी वाहनों की आवाजाही को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों ने सनसनी फैला दी थी। कई यूजर यह दावा कर रहे थे कि चीन के वाहन अनाधिकृत रूप से भारतीय सीमा में दाखिल हो गए हैं और इस बात को मीडिया द्वारा दबाया जा रहा है। इन दावों पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय सेना ने स्थिति स्पष्ट की है और इन सभी वायरल संदेशों को पूरी तरह से भ्रामक और आधारहीन करार दिया है। सेना ने यह साफ कर दिया है कि जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है और वायरल फुटेज को गलत संदर्भ में पेश किया गया है।
व्यापार मार्ग पर चल रहे थे वाहन
सेना की फैक्ट चेक इकाई ने इस मामले की सच्चाई सामने लाते हुए बताया कि वीडियो में नजर आने वाली गाड़ियां चीन के जेएसी ब्रांड की कॉमर्शियल गाड़ियां हैं। ये सभी वाहन नाथू ला मार्ग पर संचालित हो रहे थे, जो कि भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार के लिए पहले से ही तय किया गया आधिकारिक मार्ग है। दोनों देशों के बीच इस स्थान पर व्यापार आपसी समझौतों, निर्धारित सुविधाओं और तय नियमों के दायरे में ही किया जाता है। सेना के अनुसार, वायरल वीडियो में इसी स्वीकृत व्यापारिक गतिविधि का हिस्सा बने वाहनों को दिखाया गया था, लेकिन वीडियो से जरूरी और प्रासंगिक संदर्भ हटा दिए गए ताकि जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की जा सके।
समन्वित तरीके से फैलाया गया भ्रम
सेना की जांच में सामने आया कि एक ही तरह के झूठे दावों को सुनियोजित तरीके से कई अलग-अलग सोशल मीडिया खातों के माध्यम से प्रचारित किया गया, जिससे देश की सीमा सुरक्षा को लेकर एक भ्रामक और गलत तस्वीर बनी। इस सिलसिले में फैक्ट चेक यूनिट ने 26 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 26 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 56 मिनट के बीच इस भ्रामक सामग्री को पोस्ट करने वाले कुल 12 सोशल मीडिया खातों की शिनाख्त की है। सेना ने नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से यह अपील की है कि वे किसी भी वीडियो या सूचना को आगे साझा करने से पहले उसकी मूल फुटेज, लोकेशन और आधिकारिक पुष्टि की अच्छी तरह जांच-परख जरूर कर लें।
अरुणाचल प्रदेश से जुड़ा डीपफेक वीडियो भी खारिज
सिर्फ सिक्किम ही नहीं, बल्कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी सोशल मीडिया पर एक फर्जी वीडियो प्रसारित किया गया था जिसे सेना ने खारिज कर दिया। इस भ्रामक वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया के हवाले से एक बयान गढ़ा गया था, जिसमें यह दावा किया गया कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के असाफिला, लोंगजू और तक्सिंग सर्कल के क्षेत्रों पर कब्जा जमा लिया है। इसके अलावा वीडियो में यह भी प्रोपोगंडा फैलाया गया कि वहां तैनात भारतीय जवानों को जरूरी रसद और सामान नहीं मिल रहा है। सेना ने इन तमाम बयानों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया और कहा कि एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के नाम का दुरुपयोग कर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
एआई तकनीक का हुआ दुरुपयोग
सेना ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश से जुड़े इस वायरल वीडियो में पुरानी और वास्तविक फुटेज के ऊपर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक यानी AI की मदद से तैयार की गई सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। इस प्रकार की तकनीकों का गलत इस्तेमाल करके देश की सुरक्षा और सेना की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सेना ऐसे सभी भ्रामक अभियानों पर लगातार नजर बनाए हुए है और समय-समय पर इनकी सच्चाई जनता के सामने लाती रहती है ताकि देशवासियों के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी या अफवाह न फैले।



















