दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करने वाले कैप्टन स्मित मच्छार हाल ही में पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए। संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उन्हें गले लगाकर देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया। इस दौरान कैप्टन स्मित के सिर पर कुल्हाड़ी के हमले से आई चोट के निशान साफ देखे जा सकते हैं, जिन्हें देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। ओमान के एक को-पायलट ने पीछे से उन पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया था, जिससे वह हथियार उनकी खोपड़ी में धंस गया और हड्डी तक टूट गई। इसके बावजूद इस खौफनाक परिस्थिति में भी लहूलुहान कैप्टन स्मित ने जरा भी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने हमलावर का डटकर मुकाबला किया, कॉकपिट का दरवाजा खोला और विमान को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाते हुए कुल 174 यात्रियों की सुरक्षित जान बचाई।
कैप्टन स्मित की असाधारण जिजीविषा और सम्मान
कैप्टन स्मित की अदम्य शक्ति और हौसले का अंदाजा उनकी हालिया तस्वीरों से लगाया जा सकता है। सिर पर गंभीर चोट लगने और अत्यधिक खून बहने के बाद भी उन्होंने अपना होश नहीं गंवाया और सूझबूझ से कॉकपिट का गेट खोलकर बड़ी आपदा टाल दी। जिस तरह से उन्होंने 174 जिंदगियों की रक्षा की, उसे किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान द्वारा कैप्टन स्मित को दिया गया यह सम्मान दरअसल हर एक भारतीय का सम्मान है। अब पूरे देश को उस पल का बेसब्री से इंतजार है जब यह साहसी पायलट भारत की धरती पर कदम रखेंगे।
सनातन धर्म के अपमान और दुष्प्रचार के खिलाफ रामदेव की हुंकार
योग गुरु स्वामी रामदेव ने देश भर में सनातन संस्कृति को बदनाम करने वालों के विरुद्ध एक बड़ा अभियान छेड़ने का फैसला किया है। इस देशव्यापी मुहिम में देश भर के तमाम साधु-संत और अखाड़े पूरी ताकत से शामिल होंगे। पतंजलि यूनिवर्सिटी के प्राच्य विद्या सम्मेलन में विशेष रूप से साधु-संतों और देश के जाने-माने विद्वानों को आमंत्रित किया गया था। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सोशल मीडिया रील्स और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के माध्यम से सनातन धर्म को लेकर बड़े पैमाने पर भ्रम फैलाया गया। इंटरनेट और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर संस्कृत के श्लोकों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उन्हें शास्त्रों का आदेश बताकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई।
शास्त्रों की आड़ में फैलाई गई भ्रांतियों का वैज्ञानिक समाधान
नारी के सम्मान, दलित और वनवासी समाज तथा देवी-देवताओं के खान-पान को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां जानबूझकर फैलाई गईं। आधा-अधूरा सच दिखाकर सनातन संस्कृति की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों तक से कर दी गई। इसके जवाब में सोशल मीडिया पर बयान देने वाले कई तथाकथित विशेषज्ञ भी अपने-अपने तरीके से राय रखने लगे, जिससे समाज में और अधिक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। यही वजह है कि धार्मिक ग्रंथों से जुड़े भ्रम को हमेशा के लिए समाप्त करने के वास्ते स्वामी रामदेव की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। शास्त्रों में जहां-जहां शब्दों के गलत अर्थ निकाले गए हैं या उनका अनर्थ किया गया है, उन्हें ठीक करने का प्रयास भी स्वागत योग्य कदम है। आज पूरी दुनिया में सनातन धर्म, उसके प्राचीन ग्रंथों, वेदों और शास्त्रों को जानने के लिए गहरी उत्सुकता है। इसलिए यह बिल्कुल सही समय है कि इस धर्म से जुड़े तमाम दुष्प्रचारों का जवाब वैज्ञानिक और तार्किक तरीके से दिया जाए।
मुकेश अंबानी की कंपनी जियो का शेयर बाजार में ऐतिहासिक आगाज
भारतीय शेयर बाजार में मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स ने एक रिकॉर्डतोड़ आईपीओ के साथ धमाकेदार शुरुआत की है। स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग के साथ ही जियो प्लेटफॉर्म्स देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। कंपनी का कुल मार्केट कैप बढ़कर साढ़े 12 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े पर पहुंच गया है। इस सूची में पहले स्थान पर रिलायंस इंडस्ट्रीज कायम है जिसका मार्केट कैप 16.12 लाख करोड़ रुपये है। बेल रिंगिंग सेरेमनी के खास मौके पर अनंत अंबानी ने जब अपने दादा धीरूभाई अंबानी और पिता मुकेश अंबानी के कड़े संघर्षों, उनकी दूरदर्शिता और हौसले का जिक्र किया, तो मुकेश अंबानी बेहद भावुक हो गए।
भावनाओं से ओतप्रोत जियो की सफलता की दास्तान
जियो का यह आईपीओ यूं तो अपने आप में एक बड़ी सक्सेस स्टोरी है, लेकिन अनंत अंबानी के भाषण ने इस वित्तीय सफलता को बेहद भावनात्मक मोड़ दे दिया। अनंत की बातें सुनकर उद्योगपति मुकेश अंबानी की आंखों से आंसू छलक आए। अनंत ने जियो के सफर को एक बच्चे की पढ़ाई और रसोई में मां की सब्जी के रंगों तक से जोड़कर समझाया। जियो ने देश के आम आदमी के लिए इलाज के नए रास्ते कैसे सुगम बनाए और सरहद पर देश की रक्षा करने वाले जवान को उसके परिवार के करीब कैसे ला खड़ा किया, इन बातों का जिक्र सिर्फ भावनाओं में बहकर नहीं किया गया था। अनंत अंबानी ने इस बात की भी याद दिलाई कि डिजिटल इंडिया का यह सपना देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देखा था।
डिजिटल इंडिया की ताकत और युवाओं के हाथ में देश का भविष्य
यदि डिजिटल इंडिया की यह दूरदृष्टि न होती, तो करोड़ों देशवासियों के बैंक खातों में सीधे पैसे का ट्रांसफर कैसे संभव हो पाता? कोरोना महामारी के कठिन समय में देश के नागरिकों को आसानी से वैक्सीन कैसे लग पाती? हर बड़े संकट के समय डिजिटल इंडिया देश के काम आया। इसलिए जियो की यह डिजिटल सफलता केवल सबसे बड़ा आईपीओ लाने या नंबर दो मार्केट कैप वाली कंपनी बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के हर नागरिक को एक-दूसरे से जोड़ने का मजबूत माध्यम है। अनंत अंबानी उम्र में छोटे हैं, लेकिन उन्होंने बहुत बड़ी बात कही है। आने वाला कल निश्चित रूप से भारत का है, देश के युवाओं का है और विकसित भारत के सपने को हकीकत में बदलने का है।
आज की बात, रजत शर्मा के साथ



















