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कोरिया की महिलाओं ने मिलेट्स से संवारी अपनी किस्मत, खेती के साथ स्नैक्स और लड्डू बनाकर कमा रहीं ₹15 हजार तकछत्तीसगढ़
29 अक्तू॰ 2026, 10:08 pm (2 घंटे पहले)· 2

कोरिया की महिलाओं ने मिलेट्स से संवारी अपनी किस्मत, खेती के साथ स्नैक्स और लड्डू बनाकर कमा रहीं ₹15 हजार तक

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य खेती के साथ मिलेट्स से विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ग्रामीण महिलाएं अब खेती के साथ-साथ मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पादों के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर यहां की महिलाएं धान की खेती के साथ नमकीन, लड्डू, सत्तू और अन्य पौष्टिक सामग्रियां तैयार कर रही हैं। इस पहल ने न केवल महिलाओं को नया रोजगार उपलब्ध कराया है बल्कि उनके परिवारों को आर्थिक संबल भी प्रदान किया है। अपने कौशल और मेहनत के दम पर ये महिलाएं कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय में तब्दील कर चुकी हैं और इनके द्वारा बनाए जाने वाले उत्पाद अब स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्रों तक भी पहुंच रहे हैं।

वर्ष 2017 से शुरू हुआ स्व-सहायता समूह का सफर

इस बदलाव की कहानी से जुड़ी समूह की सदस्य कुसुम सिंह बताती हैं कि वह साल 2017 से स्व-सहायता समूह का हिस्सा बनी थीं। शुरुआती दिनों में वह अपने घर की चारदीवारी से बाहर नहीं निकलती थीं और घरेलू कामकाज तक ही सीमित थीं। हालांकि समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव आने शुरू हुए और उन्हें कई नई बातें सीखने का अवसर मिला। इस प्रक्रिया ने उनके भीतर छिपे आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के लिए आगे आने की प्रेरणा दी।

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आर्थिक मदद और ऋण के जरिए खड़ा किया कारोबार

कुसुम सिंह के अनुसार इस उद्यम की शुरुआत के शुरुआती चरण में समूह को 15 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई थी। इसके पश्चात चक्र विधि के आधार पर धनराशि मिलती गई और व्यवसाय को विस्तार देने के लिए एक लाख रुपये का मुद्रा लोन भी स्वीकृत हुआ। इसी शुरुआती पूंजी और ऋण के बलबूते पर उन्होंने अपना काम व्यवस्थित ढंग से शुरू किया। वर्तमान में इस कारोबार के माध्यम से उन्हें हर महीने लगभग 10 हजार रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है।

पांच ब्लॉकों की महिलाओं ने मिलकर बनाई विशेष कंपनी

व्यापार को व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए मोर सेवा नामक समूह के माध्यम से वर्ष 2022 में एक बड़ा कदम उठाया गया। इसके तहत पांच अलग-अलग ब्लॉकों की महिलाओं को आपस में जोड़ा गया और महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की स्थापना की गई। इस पंजीकृत कंपनी में कुल 12 महिलाएं मिलकर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। ये सभी महिलाएं सामूहिक रूप से कृषि कार्यों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के पौष्टिक खाद्य उत्पादों के निर्माण की जिम्मेदारी संभालती हैं।

चावल, दाल और रागी के लड्डू का हो रहा है निर्माण

यह महिला समूह पूरी तरह से जैविक और सुगंधित जीराफूल चावल, उच्च गुणवत्ता वाली अरहर दाल, पारंपरिक सत्तू और पौष्टिक रागी-सत्तू के लड्डू जैसे बेहतरीन उत्पाद तैयार कर रहा है। इन तैयार उत्पादों की नियमित आपूर्ति महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों में की जा रही है। इस सरकारी और सामाजिक जुड़ाव के कारण महिलाओं को लगातार काम मिल रहा है और उनके इस छोटे से स्टार्टअप को बाजार में आगे बढ़ने में काफी मदद मिल रही है।

खेती और कारोबार के तालमेल से हो रहा है सशक्तिकरण

कोरिया जिले की ये महिलाएं कृषि और लघु उद्योग के अनूठे मेल से समाज में अपनी एक नई पहचान गढ़ रही हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से उन्हें न सिर्फ आजीविका का साधन मिला है बल्कि नई तकनीक सीखने और बेहतर कमाई करने के अनगिनत अवसर भी प्राप्त हुए हैं। इस पूरी यात्रा में मिले सहयोग के लिए कुसुम सिंह ने सरकार के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है, जिसकी वजह से आज ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

सवाल-जवाब

छत्तीसगढ़ के किस जिले में महिलाएं मिलेट्स से उत्पाद बना रही हैं?
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में महिलाएं मिलेट्स से उत्पाद बना रही हैं।
कुसुम सिंह किस वर्ष स्व-सहायता समूह से जुड़ी थीं?
कुसुम सिंह साल 2017 से स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं।
समूह को कारोबार शुरू करने के लिए कितना मुद्रा लोन मिला था?
कारोबार शुरू करने के लिए समूह को एक लाख रुपये का मुद्रा लोन मिला था।
महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की स्थापना कब हुई थी?
इस कंपनी की स्थापना वर्ष 2022 में पांच ब्लॉकों की महिलाओं को जोड़कर की गई थी।
कंपनी में कुल कितनी महिलाएं काम कर रही हैं?
इस कंपनी में कुल 12 महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं।
उत्पादों की सप्लाई किन केंद्रों पर की जा रही है?
तैयार उत्पादों की सप्लाई महिला एवं बाल विकास विभाग के आंगनवाड़ी केंद्रों में की जा रही है।
महिलाओं को इस कारोबार से हर महीने कितनी आमदनी हो रही है?
महिलाओं को हर महीने करीब 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है।
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टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·24 मिनट पहले

गांव की महिलाओं का ऐसे स्टार्टअप शुरू करके खुद को संभालना बहुत बड़ी बात है। मुद्रा लोन और एसएचजी का ऐसा सही इस्तेमाल देखकर वाकई अच्छा लगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

महिलाओं का ऐसे खुद बिजनेस संभालना और आंगनवाड़ी तक सामान पहुंचाना वाकई बड़ी बात है। इससे घर चलाने में जो मदद मिलती है, उसका असर सीधे बच्चों की पढ़ाई और सेहत पर दिखता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

करण, बात तो बिल्कुल सही है तुम्हारी। पर क्या आंगनवाड़ी के अलावा भी इन्हें कोई बड़ा बाजार मिला है?

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

ऐसी खबरें देखकर वाकई बहुत सुकून मिलता है। कोरिया की इन महिलाओं ने साबित कर दिया कि थोड़ी सी मदद और पक्का इरादा मिल जाए, तो घर की चारदीवारी से निकलकर खुद की कमाई करना बिल्कुल मुमकिन है।

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