जाने-माने अभिनेता विक्रांत मैसी ने एक बार फिर अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली है। उनकी हालिया रिलीज हुई सीरीज मुसाफिर कैफे को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। यह एक खूबसूरत रोमांटिक लव स्टोरी है, जो अपनी दमदार कहानी के साथ-साथ इसमें दिखाए गए एक मनमोहक कैफे के कारण भी चर्चा का विषय बनी हुई है। यह सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज की गई है। कई लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि क्या यह कैफे वास्तव में मौजूद है या यह केवल एक फिल्मी सेट है।
कहां स्थित है यह प्रसिद्ध कैफे
अगर आप भी इस लोकप्रिय कैफे की तलाश में हैं, तो आपको यह जानकर बेहद खुशी होगी कि सीरीज में नजर आने वाला यह खूबसूरत दृश्य कोई कृत्रिम सेट नहीं, बल्कि हकीकत है। यह शानदार कैफे उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्वतीय शहर मसूरी में स्थित है। यह जगह आम जनता और पर्यटकों के लिए भी पूरी तरह खुली है, जहां जाकर कोई भी इसकी खूबसूरती का आनंद ले सकता है। यह खूबसूरत ठिकाना मसूरी के ऐतिहासिक झरीपानी किले का एक मुख्य हिस्सा है। यहां पहुंचने पर आपको बिल्कुल वही माहौल और चीजें देखने को मिलेंगी जैसी पर्दे पर नजर आती हैं।
क्या है झरीपानी कैसल का इतिहास
इस ऐतिहासिक प्रॉपर्टी में पर्यटकों को लकड़ी से बने कॉटेज, हरी टीन की छतें, बोगनविलिया के फूलों से ढकी दीवारें, झूला, सीढ़ियां, छत और स्ट्रीट लाइट के नीचे लटके हुए वे दो खास गमले देखने को मिलते हैं, जो सीरीज में भी प्रमुखता से दिखाए गए हैं। इस कैफे का मुख्य प्रवेश द्वार भी बिल्कुल वैसा ही है, बस आगे का नाम बदला गया है। रात के समय इस जगह से पूरे मसूरी शहर का नजारा बेहद भव्य दिखाई देता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे तारों से भरा आसमान सीधे जमीन पर उतर आया हो। झरीपानी किले की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार भी इस सीरीज की शूटिंग साल 2025 में इसी परिसर में की गई थी।
कैसे पहुंच सकते हैं इस ऐतिहासिक स्थल पर
इस खूबसूरत जगह तक पहुंचने के लिए आपको उत्तराखंड के मसूरी जिले के झरीपानी जाना होगा। यह कैफे देहरादून शहर से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर एक ऊंची पहाड़ी पर बसा हुआ है। यहां जाने के लिए आपको सिद्ध ओक ग्रोव स्कूल के पास, एसबीआई के सामने और पटियाला हाउस में स्थित हेरिटेज हिल प्रॉपर्टी यानी झरीपानी कैसल पहुंचना होगा। सड़क मार्ग से यात्रा करने पर झरीपानी देहरादून से मसूरी जाने वाले मुख्य मार्ग पर बरलोगंज के रास्ते से होकर पड़ता है। यह एक खूबसूरत बुटीक प्रॉपर्टी है, जिसके हर कमरे को बेहद अनूठे और अलग अंदाज में डिजाइन किया गया है।
पहाड़ियों के बीच ठहरने का शानदार अनुभव
इस परिसर में आने वाले पर्यटक पारंपरिक गांव जैसी लकड़ी की झोपड़ियों, पहाड़ों के सामने बने डीलक्स कमरों और प्राइवेट जकूज़ी की सुविधा वाले सुइट्स में रुक सकते हैं। इन सभी कमरों में कांच की बड़ी दीवारें सीधे पहाड़ों की तरफ खुलती हैं, जहां से प्रकृति के अद्भुत और शांत नजारे देखने को मिलते हैं। इस कैफे परिसर में एक बेहतरीन बार और रेस्तरां की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा शाम के समय यहां अलाव जलाने का भी इंतजाम किया जाता है, जो ठंड के मौसम में पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है।
आप यहां की खूबसूरत लाइटों से सजे हुए विशाल बगीचों में किसी भी तरह के निजी या पारिवारिक फंक्शन का आयोजन भी कर सकते हैं। ढलते सूरज के साथ शाम के वक्त इस कैफे का पूरा वातावरण बेहद जादुई और दिल को छू लेने वाला हो जाता है, जो हर यात्री के मन में एक गहरी छाप छोड़ जाता है।



















