जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने चौकसी दिखाते हुए एक बड़ा आतंकी मंसूबा मिट्टी में मिला दिया। दक्षिण कश्मीर के शोपियां और कुलगाम जिले की सीमा के पास स्थित एक फल के बगीचे में छिपाकर रखे गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) को बरामद कर समय रहते डिफ्यूज कर दिया गया। विस्फोटक मिलने की सूचना के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई और सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अवनीरा के आसपास सख्त घेराबंदी कर दी।
अवनीरा के बगीचे में मिला विस्फोटक, बम निरोधक दस्ते ने किया नष्ट
शोपियां और कुलगाम जिले की सीमा पर स्थित जैनापोरा क्षेत्र के अवनीरा गांव के एक बगीचे में यह विस्फोटक छिपाया गया था। सुरक्षा बलों को इलाके में संदिग्ध हलचल की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया गया था। बगीचे में संदिग्ध आईईडी नजर आते ही जवानों ने तुरंत मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया।
इलाके में मौजूद स्थानीय निवासियों को सतर्क करते हुए पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की गई और तुरंत बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। बम निरोधक दस्ते ने बेहद सावधानी बरतते हुए निर्धारित प्रक्रिया के तहत इस विस्फोटक को नियंत्रित विस्फोट के जरिए सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया। इस नियंत्रित प्रक्रिया में किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, जिससे आसपास रहने वाले नागरिकों ने राहत की सांस ली।
तीन सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान और व्यापक तलाशी
इस ऑपरेशन में सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 178 बटालियन और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला था। संयुक्त दल इलाके में पहले से ही निगरानी रख रहा था और गश्त के दौरान ही यह विस्फोटक बरामद किया गया। आईईडी को निष्क्रिय करने के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को चारों तरफ से घेर लिया है और यह पता लगाने के लिए सघन तलाशी अभियान जारी रखा है कि बगीचे या उसके आसपास कोई अन्य विस्फोटक सामग्री तो नहीं छिपाई गई है।
लश्कर के लॉजिस्टिक्स मॉड्यूल से जुड़े तीन मददगारों की गिरफ्तारी
इससे पहले भी सुरक्षा बलों ने सीमा पार पाकिस्तान से संचालित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक महत्वपूर्ण नेटवर्क को ध्वस्त किया था। जांच एजेंसियों ने लश्कर से जुड़े तीन सहयोगियों को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपियों की पहचान राजौरी जिले के कोट चरवाल निवासी मोहम्मद आजम, जाकिर हुसैन और मोहम्मद मुश्ताक के रूप में हुई है।
ये तीनों आरोपी पिछले कई वर्षों से लगातार सक्रिय थे और आतंकी समूहों के लिए एक लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मॉड्यूल का संचालन कर रहे थे। जांच में सामने आया कि इन्होंने जम्मू संभाग के राजौरी और रियासी जिलों से पीर पंजाल के रास्तों से होते हुए दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले तक कई आतंकी गुटों को सुरक्षित आवाजाही, पनाह और जमीनी मदद मुहैया कराई थी।
2023 के चसाना एनकाउंटर से जुड़े तार और हथियारों की बरामदगी
पुलिस के अनुसार इन तीनों आरोपियों ने वर्ष 2023 में रियासी जिले के चसाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के दौरान भी आतंकियों की मदद की थी, जिसमें आतंकी मारे गए थे। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर गांव से सटे जंगली इलाके से पहले एक शक्तिशाली आईईडी बरामद किया गया था। इसके बाद बृहस्पतिवार को आरोपियों के गुप्त ठिकाने से एक पिस्तौल, मैगजीन, जिंदा गोला-बारूद और चीन में बने दो हथगोले भी बरामद किए गए।























