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दक्षिण कश्मीर के अवनीरा में बगीचे से आईईडी बरामद, जवानों ने धमाका कर टाली बड़ी आतंकी साजिशजम्मू-कश्मीर
20 सित॰ 2026, 10:48 pm (52 मिनट पहले)· 1

दक्षिण कश्मीर के अवनीरा में बगीचे से आईईडी बरामद, जवानों ने धमाका कर टाली बड़ी आतंकी साजिश

शोपियां और कुलगाम की सीमा पर स्थित अवनीरा गांव के एक बगीचे में मिले विस्फोटक को बम निरोधक दस्ते ने नियंत्रित तरीके से नष्ट किया।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने चौकसी दिखाते हुए एक बड़ा आतंकी मंसूबा मिट्टी में मिला दिया। दक्षिण कश्मीर के शोपियां और कुलगाम जिले की सीमा के पास स्थित एक फल के बगीचे में छिपाकर रखे गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) को बरामद कर समय रहते डिफ्यूज कर दिया गया। विस्फोटक मिलने की सूचना के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई और सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अवनीरा के आसपास सख्त घेराबंदी कर दी।

अवनीरा के बगीचे में मिला विस्फोटक, बम निरोधक दस्ते ने किया नष्ट

शोपियां और कुलगाम जिले की सीमा पर स्थित जैनापोरा क्षेत्र के अवनीरा गांव के एक बगीचे में यह विस्फोटक छिपाया गया था। सुरक्षा बलों को इलाके में संदिग्ध हलचल की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया गया था। बगीचे में संदिग्ध आईईडी नजर आते ही जवानों ने तुरंत मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया।

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इलाके में मौजूद स्थानीय निवासियों को सतर्क करते हुए पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की गई और तुरंत बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। बम निरोधक दस्ते ने बेहद सावधानी बरतते हुए निर्धारित प्रक्रिया के तहत इस विस्फोटक को नियंत्रित विस्फोट के जरिए सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया। इस नियंत्रित प्रक्रिया में किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, जिससे आसपास रहने वाले नागरिकों ने राहत की सांस ली।

तीन सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान और व्यापक तलाशी

इस ऑपरेशन में सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 178 बटालियन और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला था। संयुक्त दल इलाके में पहले से ही निगरानी रख रहा था और गश्त के दौरान ही यह विस्फोटक बरामद किया गया। आईईडी को निष्क्रिय करने के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को चारों तरफ से घेर लिया है और यह पता लगाने के लिए सघन तलाशी अभियान जारी रखा है कि बगीचे या उसके आसपास कोई अन्य विस्फोटक सामग्री तो नहीं छिपाई गई है।

लश्कर के लॉजिस्टिक्स मॉड्यूल से जुड़े तीन मददगारों की गिरफ्तारी

इससे पहले भी सुरक्षा बलों ने सीमा पार पाकिस्तान से संचालित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक महत्वपूर्ण नेटवर्क को ध्वस्त किया था। जांच एजेंसियों ने लश्कर से जुड़े तीन सहयोगियों को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपियों की पहचान राजौरी जिले के कोट चरवाल निवासी मोहम्मद आजम, जाकिर हुसैन और मोहम्मद मुश्ताक के रूप में हुई है।

ये तीनों आरोपी पिछले कई वर्षों से लगातार सक्रिय थे और आतंकी समूहों के लिए एक लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मॉड्यूल का संचालन कर रहे थे। जांच में सामने आया कि इन्होंने जम्मू संभाग के राजौरी और रियासी जिलों से पीर पंजाल के रास्तों से होते हुए दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले तक कई आतंकी गुटों को सुरक्षित आवाजाही, पनाह और जमीनी मदद मुहैया कराई थी।

2023 के चसाना एनकाउंटर से जुड़े तार और हथियारों की बरामदगी

पुलिस के अनुसार इन तीनों आरोपियों ने वर्ष 2023 में रियासी जिले के चसाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के दौरान भी आतंकियों की मदद की थी, जिसमें आतंकी मारे गए थे। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर गांव से सटे जंगली इलाके से पहले एक शक्तिशाली आईईडी बरामद किया गया था। इसके बाद बृहस्पतिवार को आरोपियों के गुप्त ठिकाने से एक पिस्तौल, मैगजीन, जिंदा गोला-बारूद और चीन में बने दो हथगोले भी बरामद किए गए।

सवाल-जवाब

विस्फोटक उपकरण किस स्थान से बरामद किया गया?
यह आईईडी शोपियां और कुलगाम जिले की सीमा के पास जैनापोरा क्षेत्र के अवनीरा गांव में स्थित एक बगीचे से बरामद किया गया।
आईईडी को निष्क्रिय करने में कौन से सुरक्षा बल शामिल थे?
इस ऑपरेशन में सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ की 178 बटालियन और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों के साथ बम निरोधक दस्ता शामिल था।
क्या नियंत्रित विस्फोट के दौरान कोई नुकसान हुआ?
अधिकारियों के अनुसार बम निरोधक दस्ते द्वारा किए गए नियंत्रित विस्फोट में किसी भी प्रकार के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
लश्कर-ए-तैयबा के किन तीन सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था?
सुरक्षा बलों ने 14 सितंबर को राजौरी के कोट चरवाल निवासी मोहम्मद आजम, जाकिर हुसैन और मोहम्मद मुश्ताक को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तार आरोपियों के ठिकानों से क्या-क्या बरामद हुआ था?
उनकी निशानदेही पर जंगल से एक शक्तिशाली आईईडी बरामद हुई, जबकि ठिकाने से एक पिस्तौल, मैगजीन, कारतूस और चीन निर्मित दो ग्रेनेड मिले।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी किस प्रकार की गतिविधियों में शामिल थे?
ये आरोपी आतंकी गुटों को लॉजिस्टिक्स सहायता, पनाह और राजौरी-रियासी से पीर पंजाल होते हुए शोपियां तक आवाजाही में मदद मुहैया कराते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·10 मिनट पहले

सुरक्षा बलों द्वारा अवनीरा में आईईडी को समय रहते नष्ट करना और हाल ही में लश्कर के लॉजिस्टिक्स मॉड्यूल का पर्दाफाश होना यह दर्शाता है कि सुरक्षा एजेंसियों का खुफिया नेटवर्क बहुत मजबूत हो चुका है। ज़मीनी स्तर पर इस तरह की त्वरित कार्रवाई से न सिर्फ संभावित तबाही टलती है, बल्कि आतंकी संगठनों की स्थानीय नेटवर्क और सप्लाई चेन को भी गहरा आघात पहुंचता है। आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों को इस क्षेत्र में अपनी सर्विलांस तकनीक और बढ़ानी होगी ताकि पीर पंजाल के रास्तों से होने वाली हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 मिनट पहले

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस आईईडी को समय रहते नष्ट करना और हाल ही में लश्कर के लॉजिस्टिक्स मॉड्यूल का पर्दाफाश होना यह साबित करता है कि ज़मीनी स्तर पर खुफिया तंत्र और संयुक्त बलों के बीच तालमेल बेहद प्रभावी हो चुका है। हालांकि, पीर पंजाल के रास्तों से आतंकियों और उनके मददगारों की आवाजाही को पूरी तरह रोकने के लिए रणनीतिक रूप से निगरानी और बढ़ानी होगी ताकि दक्षिण कश्मीर के इन संवेदनशील इलाकों में आतंकी संगठनों की सप्लाई चेन को जड़ से खत्म किया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·31 मिनट पहले

सुरक्षा बलों की यह सफलता और पिछले दिनों लश्कर के लॉजिस्टिक्स मॉड्यूल का पर्दाफाश यह संकेत देता है कि शोपियां और कुलगाम क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क लगातार अपनी जमीन तलाशने की कोशिश में है। खुफिया तंत्र की यह मुस्तैदी और सेना व पुलिस का यह संयुक्त अभियान आगे भी सीमावर्ती इलाकों में ऐसी साजिशों को रोकने के लिए बेहद अहम रहेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 मिनट पहले

यह घटना दिखाती है कि सुरक्षा बलों और खुफिया तंत्र का आपसी तालमेल कितना मजबूत हो चुका है। जिस तरह से शोपियां-कुलगाम सीमा पर संयुक्त अभियान चलाकर समय रहते आईईडी को नष्ट किया गया, उससे बड़ी जनहानि टली है। हाल ही में पकड़े गए लॉजिस्टिक्स मददगारों से जुड़े तार और इस बरामदगी के बीच के पैटर्न यह बताते हैं कि एजेंसियां अब केवल आतंकियों तक ही नहीं, बल्कि उनके पूरे सपोर्ट नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने पर फोकस कर रही हैं। आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों में इस तरह के कॉर्डन-एंड-सर्च ऑपरेशंस और तेज किए जा सकते हैं।

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