बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त अपने एक हालिया बयान के चलते खासी चर्चा में आ गए हैं। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जब एक मंत्री ने उनसे मराठी भाषा में बात करने का आग्रह किया, तो उन्होंने बेहद बेबाकी और मजाकिया लहजे में ऐसा जवाब दिया कि वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए और उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। यह पूरा वाकया तब सामने आया जब अभिनेता ने मंच पर महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ मंच साझा किया था। कार्यक्रम के दौरान माहौल काफी हल्का-फुल्का और दोस्ताना था, लेकिन मंत्री की एक टिप्पणी ने इस कार्यक्रम को इंटरनेट की सुर्खियों में ला खड़ा किया।
मंच पर क्या हुआ था
कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद मंत्री प्रताप सरनाईक ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इन दिनों वह हर किसी को मराठी सिखाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अभिनेता संजय दत्त को भी अब मराठी में ही अपनी बात रखनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि हालांकि अभिनेता आमतौर पर हिंदी में ही बात करते हैं, लेकिन वहां मौजूद हर शख्स मराठी भाषा को अच्छी तरह समझता है। उनके इस हल्के-फुल्के तंज और अनुरोध के बाद सभी की निगाहें संजय दत्त पर टिक गईं और लोगों को उम्मीद थी कि वह इस पर कोई सामान्य प्रतिक्रिया देंगे, लेकिन अभिनेता ने जो कहा उसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।
संजय दत्त का करारा जवाब
मंत्री की बात सुनते ही संजय दत्त ने बिना किसी झिझक के माइक संभाला और बेहद बेबाकी से कहा कि प्रताप भाई, वह यरवदा जेल में पूरे छह साल तक रहे, लेकिन उसके बावजूद वह मराठी भाषा नहीं सीख पाए और केवल थोड़ी सी ही भाषा ही उनके पल्ले पड़ी। अपनी इस बात को खुलकर कहने के बाद उन्होंने मराठी भाषा में ही दो पंक्तियां बोलीं, जिसमें उन्होंने सभी का आभार जताया और हर हर महादेव का नारा लगाया। उनके इस अप्रत्याशित और खुलेआम दिए गए जवाब को सुनकर वहां बैठे सभी लोग ठहाके लगाकर हंसने लगे। इसके बाद उन्होंने मंत्री प्रताप सरनाईक को उस कार्यक्रम में न्यौता देने के लिए धन्यवाद भी ज्ञापित किया।
पुरानी दोस्ती और सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएं
मंच पर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए अभिनेता ने मंत्री के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि वे दोनों पिछले पच्चीस वर्षों से एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं। इस बयान के बाद कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से हल्का हो गया, लेकिन इंटरनेट पर यह क्लिप सामने आते ही बहस छिड़ गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों की तरफ से काफी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई कि मुंबई में इतने लंबे समय तक रहने के बावजूद वह स्थानीय भाषा में पारंगत क्यों नहीं हो पाए, तो वहीं कई लोगों ने उनके इस बेबाक और हास्य भरे अंदाज की सराहना की कि उन्होंने स्थिति को कितनी सहजता से संभाल लिया।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस पूरे वाकये के बाद इंटरनेट पर एक यूजर ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि संजय दत्त पिछले पचास साल से मुंबई में रह रहे हैं और खुद यह स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने छह साल यरवदा जेल में बिताए, फिर भी वे मराठी नहीं सीख सके। यूजर ने आगे लिखा कि यह उनकी हिम्मत है कि वे इस बात को सबके सामने खुलेआम स्वीकार करते हैं। उस यूजर ने सवाल उठाया कि क्या अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव ठाकरे की पार्टी के लोग संजय दत्त के खिलाफ उसी तरह का रुख अपनाएंगे जैसा वे अक्सर गरीब टैक्सी चालकों, ऑटो ड्राइवरों और रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ दिखाते हैं। इसके साथ ही कई अन्य यूजर्स ने यह भी टिप्पणी की कि केवल सलमान खान और संजय दत्त जैसे बड़े सितारे ही ऐसे नेताओं को इस तरह से बेबाकी से चुप करा सकते हैं।



















