अल्बानिया की राजधानी तिराना की सड़कें शनिवार को लगातार पांचवें दिन रणक्षेत्र में तब्दील रहीं, जहां सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखा संघर्ष देखने को मिला। मुख्य रूप से हाई स्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्रों से भरी भीड़ ने शिक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बड़े पैमाने पर बल प्रयोग करना पड़ा।
शिक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर भारी पथराव
विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय का भवन था, जिसे बचाने के लिए दंगा पुलिस ने मोर्चा संभाल रखा था। चेहरे पर मास्क लगाए प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश करते हुए पुलिसकर्मियों पर भारी पथराव किया और पेट्रोल बम फेंके। इन हमलों के जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें और लगातार आंसू गैस के गोले छोड़े। सड़कों पर पहली बार रबर की गोलियों के इस्तेमाल की भी बात सामने आई है।
दोपहर होते-होते विरोध की लहर शहर के मुख्य बुलेवार्ड पर स्थित प्रधानमंत्री एदी रामा के आधिकारिक कार्यालय की ओर मुड़ गई। यहां जुटी भीड़ पिछले दिनों के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ी थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरों, ईंटों और पटाखों से हमला जारी रखा। पुलिस की तरफ से दागे गए आंसू गैस के कई गोले भीड़ के काफी पीछे जाकर गिरे, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, गैस का असर कम होते ही उग्र प्रदर्शनकारी फिर संगठित होकर आगे बढ़े और हमलों का सिलसिला तेज कर दिया।
राजधानी में युद्ध जैसे हालात और विशेष बलों की तैनाती
शाम ढलते-ढलते पूरे तिराना शहर के मध्य भाग का मंजर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा दिखने लगा। चारों तरफ टूटे हुए शीशे, जले हुए कचरे और पत्थरों का ढेर बिखरा हुआ था। एक जलते हुए वाहन से उठता घना काला धुआं आसमान में छा गया, जबकि एम्बुलेंस और पुलिस गाड़ियों के सायरन लगातार गूंजते रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दंगा पुलिस की मदद के लिए पुलिस विशेष बलों को तैनात किया गया।
इन लगातार झड़पों में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अब तक उपद्रव फैलाने के आरोप में 80 लोगों पर औपचारिक मामले दर्ज किए हैं, जबकि सैकड़ों अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया है या उनके खिलाफ जांच चल रही है। सड़क पर आंसू गैस के असर से निपटने के लिए कई युवाओं ने गैस मास्क पहने हुए थे, वहीं स्वयंसेवक प्रदर्शनकारियों की आंखों में सेलाइन वॉटर डालकर उनकी जलन कम करने में जुटे रहे।
छात्रों का आक्रोश और व्यवस्था परिवर्तन की मांग
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि वे पूरे भ्रष्ट राजनीतिक तंत्र के खिलाफ खड़े हुए हैं। जले हुए शिक्षा मंत्रालय के समीप खड़े 19 वर्षीय मेडिकल छात्र जॉर्ज, जो अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए इलेक्ट्रीशियन के रूप में भी काम करते हैं, ने अपने आक्रोश को बयां किया। जॉर्ज ने कहा, "हम 135 दिनों तक पूरी तरह शांतिपूर्ण थे। अब हम फ्रांस की तरह क्रांति लाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारी सरकार शांति नहीं चाहती, इसलिए हम हिंसा का सहारा ले रहे हैं।"
विश्वविद्यालय की 17 वर्षीय प्रथम वर्ष की छात्रा क्लेआ भी कक्षाओं का बहिष्कार कर सड़कों पर उतरी हुई हैं। उन्होंने बताया कि छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए शिक्षण संस्थानों को छोड़कर बाहर आ गए हैं। इसके साथ ही क्लेआ ने यह आरोप भी लगाया कि प्रदर्शन को बदनाम करने के इरादे से भीड़ में कुछ उपद्रवी तत्व घुसाए गए हैं, जो दुकानों और बैंकों में तोड़फोड़ कर रहे हैं।
दूसरी ओर, राजनीतिक हलकों में मौजूदा संकट का हल तलाशने की मांग भी उठ रही है। न्यूज24 चैनल के पत्रकार और बदलाव के पैरोकार उस्मान स्ताफा ने संकट से निपटने के लिए एक साल की अवधि वाली निष्पक्ष कार्यवाहक सरकार के गठन की वकालत की है, ताकि पारदर्शी तरीके से नए चुनाव कराए जा सकें।
एदी रामा की राजनीतिक स्थिति और यूरोपीय संघ का पहलू
सोशलिस्ट पार्टी के नेता एदी रामा पिछले 13 वर्षों से अल्बानिया की सत्ता पर काबिज हैं और उन्होंने देश की राजनीति में एकतरफा प्रभुत्व बनाए रखा है, ठीक वैसे ही जैसे विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी साली बेरीशा दशकों तक करते रहे थे। अल्बानियाई संसद की कुल 140 सीटों में से 83 सीटों पर रामा की सोशलिस्ट पार्टी का मजबूत बहुमत है, और देश में अगले संसदीय चुनाव 2029 तक प्रस्तावित नहीं हैं।
हालांकि, सड़कों पर जारी इस उथल-पुथल ने एक करिश्माई नेता के तौर पर रामा की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है। विडंबना यह है कि रामा को यूरोपीय संघ में लंबे समय से एक सकारात्मक और प्रगतिशील नेता के रूप में देखा जाता रहा है, जिसका सदस्य बनने की अल्बानिया पुरजोर कोशिश कर रहा है। शनिवार सुबह सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी करते हुए प्रधानमंत्री रामा ने जनता से आग्रह किया कि वे उनकी सरकार द्वारा हासिल की गई असाधारण उपलब्धियों को न भूलें। उन्होंने इन हिंसक प्रदर्शनों के लिए विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी और 2030 तक यूरोपीय संघ में शामिल होने की देश की प्रक्रिया को बाधित करने में जुटे विदेशी तत्वों के गुप्त एजेंडे को जिम्मेदार ठहराया, हालांकि उन्होंने किसी विशिष्ट देश या तत्व का नाम नहीं लिया।
विशेष अभियोजन जांच और सत्ता के इर्द-गिर्द बढ़ता दबाव
सड़क पर जारी विरोध के अलावा, विशेष अभियोजन सेवा द्वारा की जा रही जांच भी एदी रामा के शासन के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के दबाव में 2019 में स्थापित इस विशेष अभियोजन संस्था ने हाल ही में शक्तिशाली खुफिया सेवा प्रमुख वोरा हिसेनी को गिरफ्तार किया है। हिसेनी पर आरोप है कि उन्होंने एक प्रमुख कारोबारी, पूर्व सरकारी अधिकारी और प्रधानमंत्री रामा के करीबी मित्र एर्गिस अगासी को कानूनी कार्रवाई से बचने में मदद की।
39 वर्षीय अगासी फिलहाल हिरासत में हैं। उनके वकील ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका भ्रष्टाचार से कोई संबंध नहीं है। वहीं हिसेनी ने अभियोजकों को बताया कि उन्होंने अगासी से केवल खुफिया सेवा में भर्ती के सिलसिले में संपर्क साधा था। अल्बानियाई मीडिया संस्थानों का दावा है कि अगासी प्रधानमंत्री और संगठित आपराधिक गिरोहों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते रहे हैं। प्रधानमंत्री रामा ने अगासी से व्यक्तिगत पहचान स्वीकार की है, लेकिन किसी भी गैरकानूनी लेन-देन की जानकारी होने से साफ इनकार किया है।
राजनीतिक विश्लेषक और विश्वविद्यालय के प्राध्यापक लुतफी देरविशी के अनुसार, एदी रामा इस समय बेहद नाजुक स्थिति में फंस चुके हैं। देरविशी ने रेखांकित किया कि रामा अपनी ही सफलता के शिकार बन गए हैं, क्योंकि सारी शक्तियां अपने हाथों में केंद्रित कर लेने के कारण जनता अब अपनी हर शिकायत और नाकामी के लिए केवल उन्हीं को जिम्मेदार मान रही है।





















