मॉस्को में आयोजित एक महत्वपूर्ण संसदीय संबोधन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश की सुरक्षा, संप्रभुता और यूक्रेन में जारी सैन्य कार्रवाइयों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सोमवार को स्टेट ड्यूमा के आठवें कार्यकाल के सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस अपने सभी निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करके रहेगा। रूसी नेतृत्व ने देशवासियों की एकजुटता पर विश्वास जताते हुए कहा कि समस्त राष्ट्र मिलकर अपनी स्वतंत्रता और सुरक्षा की रक्षा करेगा। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी ताकतों की नीतियों, प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनके द्वारा अपनाए जाने वाले दोहरे मानदंडों पर तीखा हमला बोला।
रूस की संप्रभुता और विशेष सैन्य अभियान पर व्लादिमीर पुतिन का संदेश
संसद के आठवें कार्यकाल के सदस्यों के सामने अपनी बात रखते हुए व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस के लिए अपनी सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि रूसी बल और नागरिक मिलकर हर स्थिति का मुकाबला करेंगे और जीत सुनिश्चित करेंगे। पिछले पांच वर्षों की अवधि को देश के इतिहास में अत्यंत कठिन और निर्णायक बताते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि इस दौरान राष्ट्र और उसके नागरिकों के धैर्य व भविष्य की कड़ी परीक्षा हुई है।
रूसी राष्ट्रपति ने सांसदों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सभी विधायी प्रतिनिधियों ने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर प्रयास किए हैं। विशेष सैन्य अभियान में तैनात सैनिकों के साहस की प्रशंसा करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहे सैनिकों को पूरे समाज और राष्ट्र का अटूट समर्थन प्राप्त है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जब भी रूस को बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, तब देश की जनता ने अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया है और वर्तमान समय में भी वही राष्ट्रीय भावना दिखाई दे रही है।
पश्चिमी देशों पर आरोप: दोहरा रवैया, पाबंदियां और रूसोफोबिया
अपने भाषण में व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी राष्ट्रों की अंतरराष्ट्रीय नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रावधानों और आत्मनिर्णय के सिद्धांतों को पश्चिमी देश केवल अपने व्यक्तिगत राजनीतिक हितों के आधार पर लागू करते हैं। वर्ष 2022 से रूस के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने रिकॉर्ड संख्या में आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाए तथा रूसोफोबिया की भावना को बढ़ावा दिया, लेकिन ये तमाम उपाय अपने आर्थिक व रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जब रूस के विरोधी सैन्य मोर्चे पर सफलता पाने में असफल रहे, तो उन्होंने रूसी नागरिकों के खिलाफ खुले तौर पर भय फैलाने और आतंकवादी तरीके अपनाने का रास्ता चुना। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि रूसी जनता के मनोबल को कभी तोड़ा नहीं जा सकता, न तो अतीत में ऐसा संभव हुआ है और न ही भविष्य में ऐसा होगा। उन्होंने देश की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत तथा किसी भी बाहरी दबाव का सामना करने में सक्षम करार दिया।
वॉशिंगटन में वोलोदिमिर जेलेंस्की और डोनाल्ड ट्रंप की शांति वार्ता
यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब एक तरफ यूक्रेन में युद्ध जारी है और दूसरी तरफ कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज हो रही हैं। पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को सैन्य और वित्तीय सहायता भेज रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की अमेरिका की यात्रा पर वॉशिंगटन पहुंच चुके हैं। व्हाइट हाउस में उनकी मुलाकात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तय मानी जा रही है, जहां इस सैन्य संघर्ष को समाप्त करने और शांति बहाली के मार्गों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब इस संघर्ष को विराम देने का समय आ गया है। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि रूस अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी संवेदनशील खुफिया जानकारियां ईरान के साथ साझा कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि रूस इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल है, और निश्चित रूप से बड़े पैमाने पर तो बिल्कुल नहीं।
पोलैंड के मंत्री का परमाणु हमले रोकने संबंधी बड़ा दावा
कूटनीतिक और रणनीतिक घटनाक्रमों के बीच पोलैंड के एक मंत्री की ओर से एक बड़ा दावा सामने आया है। पोलिश मंत्री के अनुसार, युद्ध के एक चरण के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर परमाणु हथियारों का उपयोग करने की योजना बना रहे थे, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के कारण इस संभावित परमाणु हमले को रोका जा सका। यह दावा ऐसे समय में चर्चा में आया है जब वैश्विक समुदाय इस पूरे क्षेत्र में स्थिरता और स्थायी शांति कायम करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है।



















