बाल्टिक देश लिथुआनिया के हवाई क्षेत्र में देर रात दाखिल हुए एक मानवरहित ड्रोन को नाटो के गश्ती लड़ाकू विमानों ने हवा में ही नष्ट कर दिया। यह घटना मंगलवार को आधी रात के ठीक बाद घटी, जब संदिग्ध ड्रोन ने पड़ोसी देश बेलारूस की सीमा पार कर दक्षिणी लिथुआनिया की सीमा में प्रवेश किया। इस घुसपैठ का केंद्र लिथुआनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर कौनास के निकटवर्ती क्षेत्र को बताया गया है। आसमान में अज्ञात उड़ती वस्तु के दिखने के तत्काल बाद राजधानी विलनियस और आसपास के कई जिलों में हवाई खतरे के सायरन बज उठे और सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया।
आधी रात को गूंजे सायरन, लोगों को सुरक्षित रहने की चेतावनी
स्थानीय समय के अनुसार मध्यरात्रि के तुरंत बाद, यानी 21:00 GMT के आसपास, पूरे क्षेत्र के निवासियों के मोबाइल फोन पर आपातकालीन संदेश प्रसारित किए गए। इन चेतावनियों में संभावित ड्रोन हमले या घुसपैठ की सूचना देते हुए नागरिकों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने और आधिकारिक तौर पर स्थिति सामान्य होने की घोषणा तक वहीं बने रहने का निर्देश दिया गया। हालांकि बाद में नाटो विमानों की त्वरित कार्रवाई के बाद खतरे को निष्प्रभावी कर दिया गया, जिससे जमीन पर किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई।
इटली के पायलटों और स्थानीय सेना का त्वरित अभियान
लिथुआनिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नाटो एयर डिफेंस मिशन के तहत तैनात इटली की वायुसेना के पायलटों और लिथुआनिया के अपने सशस्त्र बलों ने इस आपात स्थिति पर असाधारण फुर्ती और जिम्मेदारी का परिचय दिया। राडार पर अज्ञात वस्तु चिन्हित होते ही नाटो के लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और ड्रोन को ट्रैक करके हवा में ही मार गिराया। लिथुआनिया के राष्ट्रपति गीतानास नौसेदा ने सोशल मीडिया मंच X पर इस सफल अभियान की पुष्टि की।
"लिथुआनियाई हवाई क्षेत्र में अभी-अभी प्रवेश करने वाले एक ड्रोन को नाटो लड़ाकू विमानों द्वारा नष्ट कर दिया गया है।"
राष्ट्रपति गीतानास नौसेदा ने अपने बयान में आगे रेखांकित किया कि यूक्रेन के खिलाफ रूस की ओर से तेज की जा रही आक्रामकता के मौजूदा दौर में क्षेत्रीय सुरक्षा और ऐसी तत्परता बेहद आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लिथुआनिया अपने सभी नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर अपनी सीमाओं और संप्रभु हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।
ड्रोन की उत्पत्ति की जांच और बेलारूस का पहलू
लिथुआनिया के राष्ट्रीय संकट प्रबंधन केंद्र के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि नष्ट किए गए इस ड्रोन के वास्तविक मूल और निर्माण स्रोत का पता लगाया जा रहा है। जांच एजेंसियां मलबे का विश्लेषण कर यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि इसे कहां से और किस उद्देश्य से भेजा गया था। लिथुआनिया अपनी दक्षिणी और पूर्वी सीमा का एक बहुत बड़ा हिस्सा बेलारूस के साथ साझा करता है, जिसे रूस का करीबी सैन्य सहयोगी माना जाता है। मास्को की ओर से इस पूरी सैन्य घटना पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या टिप्पणी नहीं आई है।
बाल्टिक सीमा पर लगातार बढ़ रही हैं हवाई घुसपैठ की घटनाएं
यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर किए गए आक्रमण के बाद से ही समूचे पूर्वी यूरोप और बाल्टिक देशों में सैन्य ड्रोनों के भटकने या जानबूझकर सीमा लांघने के मामले बार-बार देखे जा रहे हैं। लिथुआनिया में इससे पहले रविवार, 13 सितंबर को भी ड्रोन देखे जाने की पुष्टि हुई थी। उस समय राष्ट्रीय संकट प्रबंधन केंद्र ने बताया था कि एक उड़ती वस्तु संभवतः बेलारूस की तरफ से देश की सीमा में दाखिल हुई और लिथुआनियाई भूभाग को पार करते हुए रूस के हवाई क्षेत्र में चली गई। हालांकि उस 13 सितंबर की घटना के दौरान नागरिक हवाई चेतावनी सायरन जारी नहीं किए गए थे।
इससे पूर्व मई के महीने में भी लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में एक संदिग्ध ड्रोन के कारण हाई अलर्ट घोषित करना पड़ा था, जिसके चलते हवाई उड़ानों और रेल सेवाओं को कुछ समय के लिए पूरी तरह रोकना पड़ा था और नागरिकों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी थी।
पड़ोसी देशों में सतर्कता और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का प्रभाव
तनाव की यह स्थिति सिर्फ लिथुआनिया तक सीमित नहीं है। पोलैंड ने भी सोमवार की रात अपने हवाई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विमानन अभियानों के संचालन की घोषणा की। पोलिश रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम यूक्रेनी ठिकानों पर हमला करने वाले रूसी संघ के जेट-संचालित मानवरहित विमानों की भारी हलचल को देखते हुए एहतियातन उठाया गया था। पोलैंड का कहना था कि यह कार्रवाई संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक निवारक कदम के रूप में की गई।
मौजूदा वर्ष के दौरान नाटो के लड़ाकू विमानों को बाल्टिक देशों, विशेष रूप से एस्टोनिया और लातविया के हवाई क्षेत्र में भटककर पहुंचे यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराने के लिए भी कई बार उड़ानें भरनी पड़ी हैं। इस संदर्भ में यूक्रेन का स्पष्ट रुख रहा है कि ड्रोनों का रास्ता भटकना रूसी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीकों का नतीजा है। यह आधुनिक जैमिंग तकनीक यूक्रेनी ड्रोनों के नेविगेशन और उड़ान पथ को भटकाने के लिए तैयार की गई है, जिससे वे अनियंत्रित होकर पड़ोसी मुल्कों की सीमाओं में प्रवेश कर जाते हैं।
सामूहिक सुरक्षा का नाटो संकल्प
लिथुआनिया, एस्टोनिया और लातविया तीनों बाल्टिक राष्ट्र वर्ष 2004 में औपचारिक रूप से नाटो सैन्य गठबंधन में शामिल हुए थे। ये सभी देश नाटो की संधि के अनुच्छेद 5 के हस्ताक्षरकर्ता हैं। इस महत्वपूर्ण प्रावधान के अनुसार, किसी भी एक नाटो सदस्य देश पर किया गया सशस्त्र हमला गठबंधन के सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। लगातार हो रही ड्रोन घुसपैठ की इन घटनाओं ने इस सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय वायु रक्षा तंत्र की सतर्कता को अंतरराष्ट्रीय पटल पर फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।



















