जर्मनी के दो राज्यों में हुए स्थानीय चुनावों के एग्जिट पोल सामने आने के बाद सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। केंद्र की सत्ता संभाल रहे सीडीयू दल को प्रांतीय स्तर पर भारी मतों के नुकसान का सामना करना पड़ा है। इस राजनीतिक झटके के बीच चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साफ कर दिया है कि वह अपने पद से पीछे हटने वाले नहीं हैं। रविवार की शाम को मतदान खत्म होते ही उन्होंने अपने इरादे जाहिर करते हुए कहा कि वे राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए आर्थिक और नीतिगत बदलावों को हर हाल में आगे बढ़ाते रहेंगे।
पूर्वोत्तर राज्य में कड़ा मुकाबला और पार्टी की स्थिति
पूर्वोत्तर के प्रांत मेक्लेनबुर्ग-फोरपोमेर्न में सामने आए शुरुआती अनुमानों ने सत्तारूढ़ दल की चिंता बढ़ा दी है। इस इलाके में धुर दक्षिणपंथी मानी जाने वाली एएफडी सबसे बड़े दल के रूप में उभरती नजर आ रही है। सार्वजनिक प्रसारणकर्ता जेडीएफ के चुनावी आंकड़ों के अनुसार एएफडी को लगभग 38% वोट शेयर मिलने की संभावना जताई गई है। इसके ठीक पीछे केंद्र-वाम झुकाव वाली एसपीडी लगभग 36% वोट हासिल करके दूसरे स्थान पर बनी हुई है। वहीं चांसलर के अपने दल क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन की स्थिति इतनी कमजोर रही कि वह संसद में न्यूनतम सीमा पार कर बमुश्किल प्रवेश करने की स्थिति में दिख रहा है।
इन निराशाजनक नतीजों को खुद फ्रेडरिक मर्ज ने अपनी पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी तबाही करार दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि मतदाताओं का यह रुख उनके संगठन के लिए बेहद चिंताजनक है। हालांकि सबसे ज्यादा वोट हासिल करने की ओर अग्रसर होने के बाद भी एएफडी के सरकार बनाने की संभावना काफी कम आंकी जा रही है, क्योंकि अन्य प्रमुख दलों ने उसके साथ किसी भी तरह का गठबंधन करने अथवा काम करने से साफ इनकार कर रखा है।
राजधानी बर्लिन में वामपंथी दल ने बनाई बढ़त
देश की राजधानी बर्लिन में भी चांसलर के दल को कड़वे अनुभवों का सामना करना पड़ा है। स्थानीय प्रशासन में प्रभाव रखने वाली सीडीयू को वहां डाई लिन्के यानी वामपंथी दल ने पीछे छोड़ दिया है। मतदान केंद्र बंद होने के वक्त सामने आए आंकड़ों में वामपंथी पार्टी को लगभग 26% मत मिलने के संकेत मिले हैं, जबकि सीडीयू सिमटकर केवल 20% मतों के आसपास रह गई है। बड़े शहरों में मतदाताओं के इस मिजाज ने यह साफ कर दिया है कि पारंपरिक नीतियों के प्रति असंतोष लगातार गहराता जा रहा है।
स्थानीय समयानुसार शाम 18:00 बजे और ब्रिटिश ग्रीष्मकालीन समय के मुताबिक शाम 17:00 बजे दोनों राज्यों में मतदान संपन्न हुआ। शुरुआती अनुमानों के बाद अंतिम आधिकारिक आंकड़ों की प्रतीक्षा की जा रही है, परंतु प्राथमिक रुझानों ने यह संकेत दे दिया है कि क्षेत्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण किस हद तक बढ़ चुका है।
सुधारों के एजेंडे पर आगे बढ़ने की तैयारी
चुनावी निराशा के बाद पत्रकारों से संवाद करते हुए जर्मन चांसलर ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनका गठबंधन सरकार कल्याणकारी नियमों, कराधान प्रणाली और अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने के वादे से डिगने वाला नहीं है। अपने रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि सुधारों को लागू करना ही होगा और वे देश को आगे ले जाने के लिए यह पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले रहे हैं।
चांसलर ने समाज में उभर रही उग्र राजनीतिक प्रवृत्तियों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आगाह किया कि लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत रखने के लिए साहसिक कदम उठाने की जरूरत है। उनके अनुसार प्रस्तावित नीतिगत बदलाव उस सत्तावादी जहर का सटीक तोड़ हैं जो समाज में धीरे-धीरे अपनी जड़ें जमा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्थिक परेशानियों और अनिश्चितता का फायदा उठाकर जो ताकतें व्यवस्था को कमजोर करना चाहती हैं, उन्हें केवल ठोस सुधारों के जरिए ही रोका जा सकता है।
नेतृत्व पर सवाल और भविष्य की राजनीतिक राह
फ्रेडरिक मर्ज ने चांसलर की कुर्सी संभाले हुए केवल 16 महीने का समय बिताया है, लेकिन इतने कम कार्यकाल में ही उन पर चौतरफा दबाव बन चुका है। जनमत सर्वेक्षणों में घटती लोकप्रियता और गठबंधन के भीतर आंतरिक मतभेदों के चलते हाल के दिनों में यह चर्चा जोरों पर रही कि क्या कार्यकाल के बीच में ही चांसलर बदलने की नौबत आ सकती है। चुनाव से ठीक पहले देश भर के राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार अटकलें थीं कि यदि प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ तो नेतृत्व परिवर्तन तय है।
हालांकि मौजूदा संकट से ठीक पहले जर्मनी के आठ प्रमुख राज्यों के मुख्य नेताओं ने मर्ज के प्रति अपना खुला समर्थन जताया था। प्रांतीय मुख्यमंत्रियों के इस भरोसे ने चांसलर को अपनी ही पार्टी के भीतर बगावत से कुछ समय के लिए राहत जरूर दी थी। अब इन दो राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या गठबंधन के सहयोगी और प्रांतीय नेतृत्व का यह समर्थन बरकरार रहता है या फिर केंद्रीय नेतृत्व के भविष्य को लेकर नए सिरे से खींचतान शुरू होती है।



















