नॉर्वे के राजा हाराल्ड V का शुक्रवार को 89 वर्ष की आयु में ओस्लो के नेशनल हॉस्पिटल में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही उनके उत्तराधिकारी और बेटे क्राउन प्रिंस हाकोन ने देश की बागडोर संभाल ली है और अब वे राजा हाकोन VIII के नाम से नॉर्वे के नए शासक बन गए हैं। राजा हाराल्ड यूरोप के सबसे उम्रदराज सक्रिय शासक थे। नॉर्वे के शाही महल की ओर से जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, राजा ने शुक्रवार सुबह 6:35 बजे अंतिम सांस ली और देश की सरकार ने भी उनके निधन की इस दुखद खबर की पुष्टि की है। अपने लगभग साढ़े तीन दशकों के लंबे शासनकाल के दौरान उन्होंने देश में कई बदलाव देखे और आधुनिक समय में राजशाही को प्रासंगिक बनाए रखा।
पिता के देहांत के बाद संभाली थी राजसत्ता
अपने शासन के दौरान राजा हाराल्ड ने राजशाही को आधुनिक दौर के हिसाब से ढालने के कई प्रयास किए, लेकिन उन्होंने अपने समकालीन कई अन्य यूरोपीय राजाओं की तरह उम्रदराज होने पर पद छोड़ने के मार्ग को नहीं अपनाया। नॉर्वे में संवैधानिक राजशाही की व्यवस्था है, जहाँ राजा की स्थिति मुख्य रूप से एक प्रतीकात्मक प्रमुख की होती है, जबकि प्रशासनिक और राजनीतिक शक्तियां पूरी तरह से चुनी हुई संसद के हाथों में निहित होती हैं। लगभग 55 लाख की आबादी वाले इस नॉर्डिक देश में राजा को आम जनता के बीच अपार स्नेह और लोकप्रियता हासिल थी। उन्होंने अपने पिता राजा ओलाव V के जनवरी 1991 में हुए निधन के बाद राजकाज संभाला था। उनके शासनकाल में देश को उत्तर सागर से मिलने वाले तेल और गैस भंडारों के कारण भारी आर्थिक समृद्धि हासिल हुई।
प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे ने जताया गहरा शोक
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे ने राजा के महाप्रयाण पर अत्यंत दुख व्यक्त किया और कहा कि पूरा राष्ट्र इस समय गहरे शोक में डूबा हुआ है। उन्होंने देश के प्रति राजा की लंबी सेवाओं को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर की। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि तीन दशकों से अधिक लंबे समय तक राजा के रूप में हाराल्ड V ने नॉर्वे की जनता पर अटूट भरोसा दिखाया और सभी को आपस में जोड़े रखा। उन्होंने 2011 की त्रासदियों के दौरान लोगों को सांत्वना दी और देश के खिलाड़ियों की सफलताओं पर हमेशा गर्व किया। प्रधानमंत्री ने रानी सोन्या और पूरे शाही परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
बचपन में नाजियों के कब्जे से बचाए गए थे हाराल्ड
राजा हाराल्ड का जन्म वर्ष 1937 में ओस्लो के निकट आस्कर क्षेत्र में हुआ था। वह वर्ष 1370 के बाद नॉर्वे की धरती पर जन्म लेने वाले पहले नॉर्वेजियन राजकुमार थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब नाजी जर्मनी की सेनाओं ने नॉर्वे पर आक्रमण कर उस पर कब्जा कर लिया, तब हाराल्ड की उम्र मात्र 3 वर्ष थी। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनकी माता उन्हें और उनकी दोनों बहनों राग्नहिल्ड तथा एस्ट्रिड को लेकर पहले स्वीडन और बाद में समुद्री मार्ग से अमेरिका चली गईं। इसके विपरीत, उनके पिता और दादा नॉर्वे की वैध सरकार के साथ ब्रिटेन चले गए थे, जहाँ उन्होंने निर्वासन में रहकर संघर्ष किया। जर्मनी के सामने समर्पण न करने के कारण उनके दादा हाकोन VII को नॉर्वे की आम जनता का अत्यधिक आदर और सम्मान प्राप्त हुआ।
कम उम्र में ही उठानी पड़ी थी आधिकारिक जिम्मेदारी
संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवास के दौरान नॉर्वे का शाही परिवार अक्सर व्हाइट हाउस के विशेष मेहमानों के रूप में जाया करता था। जब हाराल्ड केवल 6 वर्ष के थे, तब उन्होंने अपने जीवन का पहला आधिकारिक दायित्व निभाया और कनाडा में स्थित एक नॉर्वेजियन एयर बेस पर नए युद्धक विमानों के नामकरण समारोह में हिस्सा लिया। युद्ध की समाप्ति के उपरांत जून 1945 में पूरा शाही परिवार सकुशल अपने वतन लौट आया। हाराल्ड ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय सरकारी स्कूलों में पूरी की, जिसके बाद उन्होंने नॉर्वेजियन मिलिट्री कॉलेज और प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले शासक
अपने पिता की तरह ही राजा हाराल्ड को भी समुद्र और नौकायन का अत्यधिक शौक था। उनके पिता राजा ओलाव ने वर्ष 1928 के ओलंपिक खेलों में नौकायन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। राजा हाराल्ड ने स्वयं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई ओलंपिक स्पर्धाओं में नॉर्वे का गौरव बढ़ाया। उन्होंने वर्ष 1987 में अपनी नौका की खुद कप्तानी करते हुए विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
राजघराने की परंपरा से हटकर चुनी जीवनसंगिनी
राजा हाराल्ड का व्यक्तिगत जीवन और विवाह भी काफी चर्चा का विषय रहा था। युवावस्था में उन पर यह सामाजिक और पारिवारिक दबाव था कि वे यूरोप के किसी अन्य शाही या कुलीन घराने की राजकुमारी के साथ विवाह करें। लेकिन उन्होंने इन प्रस्तावों को लगभग नौ वर्षों तक लगातार ठुकराए रखा। वे अपनी स्कूली सहपाठी सोन्या हाराल्डसन के साथ परिण परिणय सूत्र में बंधना चाहते थे, जो एक साधारण व्यवसायी की पुत्री थीं। अंततः उन्होंने अपने पिता राजा ओलाव को इसके लिए राजी कर लिया। राजा ओलाव को इस बात की आशंका थी कि एक सामान्य परिवार की युवती से विवाह करने पर नॉर्वे की राजशाही कमजोर पड़ सकती है, लेकिन जनता ने इस रिश्ते को खुले दिल से अपनाया। 29 अगस्त 1968 को दोनों का विवाह हुआ।
संवैधानिक बदलाव और उत्तराधिकार के नियम
विवाह के पश्चात रानी सोन्या को भी जनता से भरपूर स्नेह और सम्मान मिला। इस दंपत्ति के दो संतानें हुईं, जिनमें क्राउन प्रिंस हाकोन और उनकी बड़ी बहन राजकुमारी मार्था लुईस शामिल हैं। वर्ष 1990 में नॉर्वे के संविधान में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया, जिसके तहत लड़का हो या लड़की, जन्म के क्रम के अनुसार ही उत्तराधिकार तय होने का नियम बनाया गया। हालांकि यह नया नियम पहले से जन्मी संतानों पर लागू नहीं किया गया, जिसके चलते राजकुमार हाकोन अपनी बड़ी बहन मार्था लुईस से पहले देश के उत्तराधिकारी बने। वर्ष 1991 में राजा बनने के बाद उन्होंने अपने पूर्वजों के आदर्श वाक्य 'सब कुछ नॉर्वे के लिए' को अपने शासन का आधार बनाया।
संकट के समय देश को एकजुट करने वाले भाषण
वर्ष 2011 में दक्षिणपंथी चरमपंथी एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक द्वारा किए गए भयानक बम धमाकों और गोलीबारी में 77 मासूम लोगों की जान चली गई थी। इस राष्ट्रीय त्रासदी के बाद आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में राजा हाराल्ड ने बेहद मर्मस्पर्शी और सांत्वना देने वाला भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें आज भी इस बात पर पूरा भरोसा है कि स्वतंत्रता और खुलेपन की भावना हर प्रकार के डर से कहीं अधिक मजबूत होती है।
विविधता और समावेशी समाज का पुरोधा समर्थन
वर्ष 2016 में राजा हाराल्ड ने शरणार्थियों, धार्मिक सहिष्णुता और LGBTQ+ अधिकारों के समर्थन में एक ऐतिहासिक और भावुक भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि नॉर्वे के समाज में हर उस व्यक्ति के लिए जगह है जो अपनी पसंद के साथी से प्रेम करता है, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं। उन्होंने अफगानिस्तान, पोलैंड और अन्य देशों से आकर नॉर्वे को अपना घर बनाने वाले प्रवासियों का भी जिक्र किया। उनका यह भाषण सोशल मीडिया पर काफी सराहा गया था।
पारिवारिक विवादों के कारण चर्चा में रहा राजपरिवार
अपने शासन के अंतिम वर्षों में नॉर्वे का यह शाही परिवार कुछ अप्रत्याशित विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहा। राजा की बहू क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट के अतीत में दिवंगत अमेरिकी सेक्स अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ संपर्कों को लेकर कई तरह के सवाल उठाए गए। हालांकि प्रिंसेस पर किसी भी प्रकार के गलत आचरण का औपचारिक आरोप नहीं है और उन्होंने इसके लिए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया। इसके अलावा, मेटे-मैरिट के पिछले रिश्ते से उत्पन्न पुत्र मारियस बोर्ग होइबी को एक गंभीर मामले में कानूनी मुकदमे का सामना करना पड़ा।
पद छोड़ने की अटकलों को किया था खारिज
जनवरी 2024 में डेनमार्क की महारानी मार्ग्रेथ के अपने पद से हटने के बाद यह सवाल जोर पकड़ने लगा था कि क्या नॉर्वे के राजा भी ऐसा ही कदम उठाएंगे। इस पर राजा हाराल्ड ने स्पष्ट कर दिया था कि उन्होंने जीवन भर के लिए राजा बने रहने की शपथ ली है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में उनकी गिरती सेहत चिंता का विषय बन गई थी। वर्ष 2024 में मलेशिया की यात्रा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पेसमेकर लगाया गया था, और फरवरी 2026 में स्पेन की यात्रा के दौरान त्वचा के संक्रमण के कारण उनका इलाज हुआ था।
अब राजकुमार हाकोन ने संभाली राजा की जिम्मेदारी
नियमों के अनुसार शासक के देहांत के तुरंत बाद अगला उत्तराधिकारी स्वतः ही राजा के पद पर आसीन हो जाता है। इसी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अब क्राउन प्रिंस हाकोन देश के नए राजा बन गए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और शाही महल की विशेष बैठकों के जरिए औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। वर्ष 1991 के बाद यह पहला अवसर है जब नॉर्वे को नया सम्राट मिला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्त किया गहरा शोक
विश्वभर के नेताओं ने राजा हाराल्ड के निधन पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से याद किया कि वे इस वर्ष की शुरुआत में अपनी नॉर्वे यात्रा के दौरान राजा हाराल्ड से मिले थे और उनकी आत्मीयता ने उन्हें बहुत प्रभावित किया था। उन्होंने शाही परिवार और नॉर्वे की संपूर्ण जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं प्रेषित की हैं।



















