उत्तरी फ्रांस के तटीय क्षेत्र में स्थित विशाल ग्रेवलाइंस परमाणु ऊर्जा संयंत्र को समुद्री जीवों के अप्रत्याशित संकट का सामना करना पड़ रहा है। उत्तरी सागर से पानी खींचने वाली संयंत्र की शीतलन प्रणाली में लाखों जेलीफिश घुस आई हैं। इस कारण सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए संयंत्र के कई रिएक्टरों में बिजली उत्पादन पूरी तरह रोक दिया गया है। देश की प्रमुख ऊर्जा कंपनी इलेक्ट्रीसाइट डी फ्रांस (EDF) ने पुष्टि की है कि तटीय कैनाल से आने वाले पानी के फिल्टर में जेलीफिश की भारी उपस्थिति के चलते संयंत्र के संचालन पर गहरा असर पड़ा है।
शीतलन प्रणाली में समस्या और रिएक्टर इकाइयों की वर्तमान स्थिति
डनकर्क और कैले शहरों के बीच ओ-दे-फ्रांस क्षेत्र में स्थापित ग्रेवलाइंस परमाणु संयंत्र में कुल छह इकाइयां संचालित होती हैं। प्रत्येक इकाई की बिजली उत्पादन क्षमता 900 MW है। वर्तमान में संयंत्र की छह में से तीन इकाइयां पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। कंपनी के अनुसार बुधवार और गुरुवार के दौरान जल छानने वाली प्रणालियों में जेलीफिश के भारी जमाव को देखते हुए दो इकाइयों को तत्काल प्रभाव से बंद करना पड़ा। इसके अतिरिक्त एक अन्य इकाई को नियमित निरीक्षण के चलते पहले ही रोक दिया गया था।
संयंत्र के तकनीकी ब्योरे के मुताबिक इकाई संख्या तीन, चार और छह इस समय पूरी तरह बंद हैं। इकाई तीन को 10 अगस्त को जेलीफिश के पहले हमले के बाद बंद किया गया था और इसे 18 अगस्त को ही दोबारा ग्रिड से जोड़ा गया था। हालांकि समुद्र से जेलीफिश का नया झुंड आने के कारण इसे फिर से रोकना पड़ा है। वहीं इकाई चार पूर्व निर्धारित निरीक्षण कार्य के कारण बंद चल रही है। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए कंपनी ने एहतियाती तौर पर इकाई एक और दो को भी कम क्षमता पर चलाने का फैसला किया है ताकि पानी का प्रवाह नियंत्रित रहे और फिल्टर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
गर्मी के मौसम में जेलीफिश के झुंड बढ़ने का वैज्ञानिक कारण
परमाणु संयंत्र की जल निकासी प्रणाली में जेलीफिश का घुसना मुख्य रूप से मौसम में बदलाव और समुद्री पारिस्थितिकी से जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के महीनों में जब समुद्र का तापमान बढ़ता है, तब तटीय इलाकों में जेलीफिश की गतिविधि बहुत अधिक तेज हो जाती है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण समुद्र की ऊपरी सतह पर प्लवक यानी प्लैंकटन का स्तर काफी बढ़ जाता है। ये सूक्ष्म जीव जेलीफिश का मुख्य भोजन होते हैं, जिनकी तलाश में जेलीफिश के विशाल झुंड पानी के ऊपरी हिस्से में आ जाते हैं।
उत्तरी सागर से जुड़ी जिस नहर से ग्रेवलाइंस संयंत्र अपने रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए पानी खींचता है, वह इन जीवों के संपर्क में आ जाती है। जब विशाल पंप समुद्र से पानी खींचते हैं, तो पानी के साथ-साथ जेलीफिश भी खींच ली जाती हैं और फिल्टर स्क्रीन पर फंस जाती हैं। इससे पानी का प्रवाह रुक जाता है, जो रिएक्टर के सुरक्षित संचालन के लिए बेहद जरूरी है। ग्रेवलाइंस संयंत्र में यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले साल अगस्त के महीने में भी इसी प्रकार जेलीफिश के कारण संयंत्र का काम ठप पड़ गया था।
स्थानीय मछुआरों के साथ साझेदारी और वैश्विक उदाहरण
समुद्री जीवों से संयंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष उपाय लागू किए जा रहे हैं। कंपनी ने स्थानीय मछुआरों के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस योजना के तहत मछुआरे संयंत्र के जल प्रवेश मार्ग के पास अपने जाल लगाते हैं और जेलीफिश को पकड़कर तट से दूर गहरे समुद्र में छोड़ आते हैं। इस प्रयास का उद्देश्य संयंत्र के वाटर इनटेक फिल्टर तक पहुंचने वाले जीवों की संख्या को कम करना है ताकि बार-बार होने वाले व्यवधानों पर रोक लगाई जा सके।
यद्यपि परमाणु संयंत्रों में जेलीफिश के कारण उत्पादन बाधित होने की घटनाएं दुर्लभ मानी जाती हैं, फिर भी दुनिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2011 में स्कॉटलैंड के टॉरनेस परमाणु संयंत्र को समुद्री जीवों के जमाव के कारण बंद करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2013 में स्वीडन के ओस्करशामन परमाणु संयंत्र में भी ऐसा ही संकट देखा गया था, जहां जेलीफिश ने टर्बाइन के शीतलन मार्ग को अवरुद्ध कर दिया था। समुद्र तटीय परमाणु बुनियादी ढांचों के लिए बढ़ती वैश्विक गर्मी और समुद्री जीव तंत्र में बदलाव एक नई परिचालन चुनौती बनकर उभर रहे हैं।



















